मशहूर पंजाबी और बॉलीवुड गायक मीका सिंह ने सीमा पार के सामाजिक मिजाज और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर एक नई राष्ट्रीय चर्चा छेड़ दी है। हाल ही में एक पॉडकास्ट शो 'बातें दिल से' में बेबाक बातचीत करते हुए उन्होंने दोनों पड़ोसी मुल्कों के रिश्तों पर रोशनी डाली। 50 वर्षीय इस कलाकार ने साफ शब्दों में कहा कि वह पड़ोसी देश के आम नागरिकों को किसी भी तरह गलत या बुरा नहीं मानते। बातचीत के दौरान उन्होंने इस विरोधाभास पर भी गहरा ताज्जुब जताया कि कैसे भारतीय समाज संयुक्त अरब अमीरात और खासकर दुबई में रहने वाले मुस्लिम वर्ग को तो सहजता से अपना लेता है, लेकिन जब बात पड़ोसी मुल्क के मुसलमानों की आती है तो सोच पूरी तरह बदल जाती है।
दुबई बनाम पड़ोसी मुल्क का नजरिया और दोहरे मापदंड
पड़ोसी मुल्क में बिताए अपने पलों और अनुभवों को साझा करते हुए गायक ने कहा कि आम लोगों के व्यवहार को गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। समाज में पनपने वाली इस दोहरी सोच पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए मीका सिंह ने कहा,
"यह बस पता नहीं क्यों हमें पाकिस्तान के ही मुसलमान खराब लगते हैं, लेकिन दुबई के मुसलमान बहुत अच्छे लगते हैं."उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का दोहरा रवैया उनकी समझ से बिल्कुल परे है, क्योंकि इंसानियत के पैमाने पर दोनों जगहों के लोगों में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।
गुरुद्वारों की देखभाल और स्थानीय मुस्लिम समुदाय का योगदान
सिख परंपरा और धार्मिक विरासत से जुड़े पवित्र स्थलों की स्थिति पर चर्चा करते हुए गायक ने वहां के जमीनी हालात का ब्योरा दिया। उन्होंने ननकाना साहिब और पंजा साहिब जैसे ऐतिहासिक और श्रद्धेय गुरुद्वारों की मौजूदगी का उल्लेख किया। मीका सिंह ने रेखांकित किया कि इन पवित्र स्थलों के प्रबंधन और पवित्रता को बनाए रखने में स्थानीय मुस्लिम आबादी का सराहनीय सहयोग मिलता है। उन्होंने स्वयं देखा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग किस प्रकार पूरी श्रद्धा के साथ गुरुद्वारों में सेवा कार्य करते हैं, सफाई व्यवस्था संभालते हैं और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए मददगार बनते हैं।
कलाकारों के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक साझेदारी पर खुला रुख
वर्तमान समय में दिलजीत दोसांझ और सीमा पार के संगीतकारों के बीच जुगलबंदी पर उठ रहे सवालों के बीच मीका सिंह ने सांस्कृतिक जुड़ाव का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कला जगत की एक लंबी परंपरा रही है जहां हुनर का स्वागत बिना किसी भौगोलिक दीवार के किया जाता रहा है। मीका सिंह के अनुसार, यदि कोई फनकार कानूनी नियमों का पालन करते हुए वैध वीजा पर प्रस्तुति देने जाता है, अपना तय पारिश्रमिक प्राप्त करता है और स्वदेश लौट आता है, तो इसे अवांछित राजनीतिक तूल नहीं दिया जाना चाहिए। जब किसी भारतीय हुनरमंद को पड़ोसी मुल्क में भरपूर सम्मान और प्यार मिलता है, तो यह देश के लिए गर्व का विषय होना चाहिए न कि आलोचना का।
साल 2019 का कराची विवाद और उसके बाद का घटनाक्रम
इस पूरे मामले में गायक का पक्ष इसलिए भी चर्चा में रहता है क्योंकि वह खुद साल 2019 में एक बड़े विवाद के केंद्र में रह चुके हैं। अगस्त 2019 के दौरान उन्होंने कराची शहर में आयोजित एक वैवाहिक जलसे में संगीत प्रस्तुति दी थी। इस कार्यक्रम का संबंध पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के नजदीकी रिश्तेदार से बताया गया था। उस दौर में दोनों देशों के राजनीतिक संबंध बेहद तनावपूर्ण थे, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में किए गए बदलावों के तुरंत बाद यह दौरा हुआ था।
कराची में उनके मंच साझा करने की खबर सामने आते ही भारत में कड़ा आक्रोश देखने को मिला। फिल्म उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों, जिनमें ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) शामिल थे, ने कड़ा कदम उठाते हुए उन पर घरेलू फिल्म जगत में काम करने का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। विवाद के गंभीर रूप लेने पर गायक ने सार्वजनिक तौर पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया था कि यह कार्यक्रम बहुत पहले तय हुआ था और दुर्भाग्य से दौरे का समय गलत साबित हुआ। गायक द्वारा फेडरेशन और देशवासियों से मांगी गई माफी के पश्चात FWICE ने उनके ऊपर लगाया गया प्रतिबंध वापस ले लिया था।



















