भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को पार कर दशकों बाद भी अपनी ताजगी बनाए रखते हैं। साल 1981 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म 'लावारिस' का बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गीत 'कब के बिछड़े हुए' ऐसा ही एक यादगार नगमा है। अमिताभ बच्चन और जीनत अमान पर फिल्माया गया यह चुलबुला गाना आज साढ़े चार दशक बीत जाने के बावजूद संगीत प्रेमियों और खास तौर पर युवाओं के बीच एक रोमांटिक एंथम की तरह सुना जाता है।
संगीत और बोल का बेजोड़ संगम
इस सदाबहार नगमे की सबसे बड़ी ताकत इसका संगीत संयोजन और कर्णप्रिय धुन है। संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने इस गीत के लिए एक ऐसा संगीत तैयार किया, जो चंचलता और गहरे अहसास दोनों को एक साथ समेटे हुए है। गीतकार अनजान ने बेहद सरल लेकिन दिल को छू लेने वाले शब्दों में इसे पिरोया था। गाने के बोल दो ऐसे प्रेमियों के लंबे अरसे बाद अचानक आमने-सामने आने के रोमांच और खुशी को सहजता से बयां करते हैं।
किशोर कुमार और आशा भोसले की जुगलबंदी
इस गीत को अमर बनाने में महान पार्श्व गायक किशोर कुमार और आशा भोसले की गायकी का सबसे बड़ा योगदान रहा। दोनों गायकों ने अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव से किरदारों की मस्ती और उनके बीच की नोकझोंक को जीवंत बना दिया। पर्दे पर अमिताभ बच्चन का अनोखा अंदाज और जीनत अमान की सहज अदाकारी ने इस आवाज को ऐसा रूप दिया जो सिनेप्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए बस गया।
सिल्वर स्क्रीन पर यादगार केमिस्ट्री
अमिताभ बच्चन और जीनत अमान की जोड़ी सत्तर और अस्सी के दशक में दर्शकों की बेहद पसंदीदा जोड़ियों में शुमार थी। 'लावारिस' के इस गाने में दोनों कलाकारों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने पर्दे पर एक नया जादू बिखेरा था। अचानक बिछड़कर मिलने की स्थिति में उपजी खुशी, हैरानी और प्यार की भावनाओं को जिस तरह से पर्दे पर उतारा गया, उसने इस गीत को हर दौर के प्रेमियों के लिए एक सदाबहार पसंद बना दिया।



















