भारतीय सिनेमा के इतिहास में फिल्मों के निर्माण, संगीत की शैलियों और गायकों की पीढ़ियों में लगातार बदलाव आते रहे हैं। समय के हर पड़ाव पर नए कलाकारों ने जन्म लिया, लेकिन कुछ जादुई आवाजें ऐसी रहीं जिन्होंने वक्त की सीमाओं को लांघकर दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। पुराने दौर में जहां मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश और लता मंगेशकर जैसे महान गायकों ने कलाकारों को उनकी असल पहचान दी, वहीं बाद के दौर में कुमार सानू, उदित नारायण, अलका याग्निक और श्रेया घोषाल जैसी आवाजों ने इस महान विरासत को बखूबी आगे बढ़ाया। इन सभी गायकों की अपनी-अपनी खूबियां थीं, लेकिन संगीत की दुनिया में एक ऐसा भी फनकार हुआ जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह पर्दे पर अभिनय कर रहे अभिनेता के हाव-भाव और व्यक्तित्व के अनुसार अपनी आवाज का लहजा पूरी तरह बदल लेता था।
इस अद्भुत प्रतिभा के धनी कोई और नहीं बल्कि महान गायक एसपी बालासुब्रमण्यम थे। उन्होंने संगीत जगत को हजारों सदाबहार गीत दिए और कई अलग-अलग भाषाओं में अपनी गायकी का लोहा मनवाया। एसपी बालासुब्रमण्यम की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वे जिस भी नायक के लिए पार्श्व गायन करते थे, उसकी स्क्रीन पर्सनैलिटी और बोलने के अंदाज को अपनी आवाज में ढाल लेते थे। हालांकि उन्होंने भारतीय सिनेमा के कई बड़े अभिनेताओं के लिए अपनी आवाज दी, लेकिन हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच वे मुख्य रूप से अभिनेता सलमान खान की पहचान बनकर उभरे।
पांच दशकों का शानदार सफर और सुरों का विशाल साम्राज्य
एसपी बालासुब्रमण्यम का संगीत सफर लगभग पांच दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 25 सितंबर 2020 को जब एसपीबी इस दुनिया से रुखसत हुए, तो भारतीय संगीत जगत को एक ऐसा झटका लगा जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने अपने पूरे करियर में लगभग 16 क्षेत्रीय और राष्ट्रीय भाषाओं में गाने गाकर यह साबित किया कि संगीत की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में उनका कद बेहद ऊंचा था, जहां उन्होंने कई पीढ़ियों के सुपरस्टार्स के लिए अपनी आवाज का जादू बिखेरा।
सलमान खान की ऑन-स्क्रीन पहचान बनने की कहानी
हिंदी भाषी दर्शकों के बीच एसपीबी की आवाज सीधे तौर पर सलमान खान के शुरुआती दौर के स्टारडम से जुड़ गई थी। साल 1989 में जब निर्देशक सूरज बड़जात्या ने फिल्म 'मैंने प्यार किया' बनाई, तो सलमान खान ने एक नए जमाने के रोमांटिक हीरो के रूप में बड़े पर्दे पर कदम रखा। इस फिल्म के गानों में एसपीबी की अनूठी आवाज ने सलमान खान की रोमांटिक इमेज को गढ़ने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फिल्म का मशहूर गाना 'दिल दीवाना' उस दौर में युवाओं की धड़कन बन गया था। सलमान खान के चेहरे पर एसपीबी की सुरीली आवाज का यह संगम दर्शकों को इतना पसंद आया कि आने वाले सालों में यह एक सुपरहिट फॉर्मूला बन गया। इसके बाद यह जुगलबंदी केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रही। 'साजन' और 'हम आपके हैं कौन' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में भी एसपीबी ने सलमान खान के लिए कई यादगार गीत गाए। फिल्म 'हम आपके हैं कौन' का गाना 'पहला पहला प्यार है' आज भी प्यार के सबसे खूबसूरत अहसासों को बयां करता है। एसपीबी की गायकी में जहां एक तरफ बेमिसाल मिठास थी, वहीं दूसरी तरफ भावनाओं का ऐसा ज्वार भी था जो पर्दे पर दिखने वाले दृश्य को जीवंत कर देता था।
कमल हासन और रजनीकांत के साथ अद्भुत जुगलबंदी
एसपीबी का जादू सिर्फ बॉलीवुड या सलमान खान तक ही सीमित नहीं था, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनका योगदान इससे कहीं अधिक व्यापक और ऐतिहासिक था। उन्होंने बहुमुखी अभिनेता कमल हासन के लिए कई फिल्मों में अपनी आवाज दी। कमल हासन अपनी फिल्मों में बेहद जटिल और अलग तरह के किरदार निभाने के लिए जाने जाते थे, और एसपीबी उनके हर किरदार के मनोविज्ञान को समझकर अपनी गायकी में वही बदलाव ले आते थे। फिल्म 'एक दूजे के लिए' में कमल हासन के चरित्र के लिए की गई उनकी गायकी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां आवाज के उतार-चढ़ाव ने अभिनय को और अधिक प्रभावशाली बना दिया था।
इसी तरह मेगास्टार रजनीकांत के साथ भी एसपीबी का एक बेहद अनूठा और गहरा रिश्ता था। दक्षिण भारत के सिनेमाघरों में जब भी रजनीकांत की एंट्री होती थी, तो बैकग्राउंड में एसपीबी की दमदार आवाज गूंजती थी। रजनीकांत के स्टारडम और उनकी फिल्मों के गानों को खास बनाने में एसपीबी का बहुत बड़ा हाथ रहा। रजनीकांत के लिए गाते समय एसपीबी की आवाज में एक अलग ही ऊर्जा, जोश और स्वैग दिखाई देता था, जो पर्दे पर थलाइवा के अनोखे अंदाज के साथ पूरी तरह न्याय करता था।
असाधारण उपलब्धियों से भरा एक महान जीवन
एसपीबी की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्हें किसी एक खास शैली या जॉनर के गानों में बांधकर नहीं रखा जा सकता था। वे जितने सहज भावुक और दर्द भरे गीतों में थे, उतने ही उल्लास और मस्ती से भरे गानों में भी उनका कोई सानी नहीं था। अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने 40 हजार से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक विश्व कीर्तिमान है। उनकी इस अद्वितीय कला साधना के लिए उन्हें चार अलग-अलग भाषाओं में कुल छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनकी भाषाई समझ और कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है।



















