अक्सर जब लोग बाजार या स्थानीय डेयरी से दूध खरीदकर घर लाते हैं, तो इस बात को लेकर उलझन बनी रहती है कि वह गाय का दूध है अथवा भैंस का। पहली नजर में सफेद दिखने वाला दूध एक जैसा लग सकता है, लेकिन अगर उसकी बनावट, रंगत और मलाई का बारीकी से मुआयना किया जाए, तो दोनों के बीच का अंतर साफ पकड़ में आ जाता है। इन दोनों किस्मों में वसा यानी फैट और प्राकृतिक तत्वों का अनुपात पूरी तरह भिन्न होता है, जिसकी बदौलत बिना किसी प्रयोगशाला जांच के भी रसोई में इनकी पहचान संभव है।
रंग का खेल: कैरोटीन तय करता है दूध की सफेदी
लखीमपुर खीरी के पशु विशेषज्ञ डॉ. एनके त्रिपाठी के अनुसार गाय और भैंस के दूध में सबसे पहला और प्रत्यक्ष अंतर उनके रंग से झलकता है। आमतौर पर गाय का दूध पूरी तरह चमकदार सफेद न होकर हल्का पीलापन लिए हुए या मखमली क्रीम रंग जैसा प्रतीत होता है। इसके विपरीत, भैंस का दूध एकदम गाढ़ा और चमकदार सफेद दिखाई देता है।
इस रंग भेद के पीछे एक वैज्ञानिक कारण काम करता है। गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से कैरोटीन नामक तत्व पाया जाता है, जिसकी वजह से उसमें हल्का पीला या क्रीमी रंग उभर आता है। वहीं दूसरी ओर, भैंस के दूध में कैरोटीन की मात्रा नगण्य या बेहद कम होती है, जिस कारण उसका रंग गहरा सफेद बना रहता है। जब आप दोनों तरह के दूध को धूप या तेज रोशनी में देखेंगे, तो यह अंतर आसानी से नजर आ जाएगा।
फैट प्रतिशत और गाढ़ेपन में बड़ा फासला
रंग के अलावा दोनों किस्मों के बीच दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसमें मौजूद फैट की मात्रा है। डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि सामान्य तौर पर गाय के दूध में वसा का स्तर करीब 4 से 4.5 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया जाता है। इसके मुकाबले भैंस का दूध कहीं अधिक भारी और रिच होता है, जिसमें फैट की मात्रा 6 से 8 प्रतिशत अथवा विशेष परिस्थितियों में इससे भी अधिक पहुंच सकती है।
फैट की यह अधिक मात्रा ही भैंस के दूध को भारी और सघन बनाती है। यही वजह है कि जब भैंस के दूध से दही जमाया जाता है, तो वह एकदम चक्केदार और सख्त जमता है। इसके अलावा हलवाई और गृहणियां जब पनीर, खोया या शुद्ध घी तैयार करते हैं, तो भैंस के दूध से निकलने वाली पैदावार गाय के दूध की तुलना में काफी ज्यादा बैठती है।
कांच के गिलास और मलाई से करें घरेलू पहचान
यदि आपके पास दोनों तरह का दूध उपलब्ध है और आप उनकी परख करना चाहते हैं, तो एक सरल घरेलू तरीका आजमाया जा सकता है। दोनों तरह के दूध को अलग-अलग पारदर्शी कांच के गिलासों में पलटकर रख दें। गाय का दूध गिलास में थोड़ा तरल और पतला दिखाई पड़ेगा, जबकि भैंस का दूध अपनी सघनता और गाढ़ेपन के कारण अलग ही नजर आएगा।
इसके अलावा दूध को कुछ समय तक बिना हिलाए-डुलाए शांत छोड़ देने पर उसकी ऊपरी सतह पर जमने वाली मलाई भी हकीकत बयां कर देती है। भैंस के दूध में वसा और कुल ठोस पदार्थों की प्रचुरता के चलते उसके ऊपर जमने वाली मलाई की परत काफी मोटी और भारी होती है। इसके विपरीत, गाय के दूध की सतह पर बनने वाली मलाई की परत अपेक्षाकृत महीन और हल्की होती है।
खान-पान और पोषण के लिहाज से कौन सा बेहतर
भारतीय रसोई और पारंपरिक खान-पान में गाय का दूध सदियों से एक प्रमुख आहार रहा है। यह प्रोटीन, कैल्शियम, लैक्टोज, जरूरी वसा और कई अन्य जीवनोपयोगी पोषक तत्वों का संतुलित भंडार माना जाता है। चूंकि इसमें भैंस के दूध के मुकाबले फैट कम होता है, इसलिए यह पचने में काफी सुपाच्य और हल्का होता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और उन तमाम लोगों के लिए जो हल्का तथा कम वसा वाला पेय पसंद करते हैं, गाय का दूध एक मुफीद विकल्प साबित होता है।
वहीं दूसरी तरफ, जो लोग शारीरिक मेहनत करते हैं या जिन्हें गाढ़े दूध से बनी मिठाइयां और डेयरी उत्पाद पसंद हैं, उनके लिए भैंस का दूध बेहतर माना जाता है। भैंस के दूध में कुल ठोस घटकों की अधिकता होने की वजह से ही उससे बनने वाले उत्पाद स्वाद और मात्रा दोनों में भरपूर रहते हैं।


















