हिंदी सिनेमा के शीर्ष पर बैठे शाहरुख खान का दिल्ली से मुंबई तक का सफर अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले भी अभिनेता का व्यक्तित्व काफी प्रभावशाली था। बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कूल के दौर में शाहरुख खान और प्रसिद्ध गायक पलाश सेन बेहद गहरे मित्र हुआ करते थे और एक-दूसरे के काफी करीब थे।
सेंट कोलंबस स्कूल की पुरानी यादें
पलाश सेन और शाहरुख खान दोनों ने राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़ाई की थी। हालांकि पलाश सेन से शाहरुख खान एक साल जूनियर थे, लेकिन इस शैक्षणिक अंतर ने कभी उनकी दोस्ती के बीच कोई दूरी नहीं आने दी। विद्यालय के दिनों में खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, प्रश्नोत्तरी मुकाबलों या किसी भी सांस्कृतिक आयोजन में दोनों अक्सर एक साथ ही दिखाई देते थे। पलाश सेन ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि शाहरुख खान में बचपन से ही एक खास किस्म का आकर्षण और करिश्मा मौजूद था, जो सबको प्रभावित करता था।
शिक्षकों के भी चहेते थे शाहरुख खान
गायक के अनुसार, शाहरुख खान केवल अपने सहपाठियों के बीच ही लोकप्रिय नहीं थे, बल्कि स्कूल के शिक्षक भी उन्हें बहुत स्नेह करते थे। पलाश ने अभिनेता की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद महत्वाकांक्षी, ऊर्जावान और आकर्षक व्यक्तित्व का धनी बताया। उनका कहना था कि शाहरुख के भीतर जिंदगी में ऊंचे मुकाम हासिल करने की ललक और भूख बहुत पहले से ही साफ नजर आती थी, जो उन्हें अन्य छात्रों से अलग करती थी।
गायन के हुनर में पीछे थे सुपरस्टार
अपनी इस बातचीत के दौरान पलाश सेन ने शाहरुख खान की एक ऐसी कमी का भी जिक्र किया जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। पलाश के मुताबिक, अभिनय, खेल और अन्य गतिविधियों में हमेशा आगे रहने वाले शाहरुख गायन के मामले में कमजोर थे। स्कूल के समय के एक किस्से को याद करते हुए उन्होंने बताया कि एक म्यूजिकल नाटक के दौरान शाहरुख को एक भूमिका दी गई थी जिसके तहत उन्हें मंच पर गाना भी था। चूंकि शाहरुख खान की सुरीली आवाज या गाने में पकड़ नहीं थी, इसलिए उस मुश्किल समय में पलाश सेन ने उनकी मदद की थी।
समय के साथ बदली दोनों की राहें
स्कूल की दहलीज लांघते ही दोनों मित्रों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। जैसे-जैसे वे बड़े हुए, पढ़ाई और करियर की व्यस्तताओं के चलते उनकी राहें अलग हो गईं। अपनी-अपनी जिंदगी की दौड़ में व्यस्त होने के बाद वह पुराना याराना वैसा कायम नहीं रह सका, लेकिन आज भी पलाश सेन के पास उन शुरुआती दिनों की ढेरों सुनहरी यादें सुरक्षित हैं जो उनके बचपन के पन्नों से जुड़ी हैं।



















