कीव में आयोजित कार्यक्रमों और यूक्रेन के 35वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर, राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश के लिए सार्वजनिक रूप से आभार प्रकट किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी बात रखते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से यूक्रेन की जनता के लिए शांति और समृद्धि की कामना पाना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर जब उनका देश अपनी आजादी का जश्न मना रहा है, तब रूस द्वारा थोपे गए युद्ध का एक सम्मानजनक और न्यायपूर्ण अंत ही लाखों यूक्रेनी नागरिकों की सबसे बड़ी प्राथमिकता और सपना है।
भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को लेकर बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने अपने संबोधन में दोहराया कि यूक्रेन भारत के साथ पारस्परिक हितों और परस्पर लाभ पर आधारित द्विपक्षीय संवाद को निरंतर मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यूक्रेनी नेतृत्व का यह बयान दोनों देशों के बीच व्यापारिक, राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत द्वारा लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीति और संवाद के माध्यम से शांति की वकालत किए जाने के बीच जेलेंस्की की यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच संपर्क को और प्रगाढ़ करने की इच्छा को दर्शाती है।
यूरोपीय नेताओं की उपस्थिति और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति
फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष लगातार जारी है। इस कठिन समय के बावजूद कीव में आयोजित 35वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में कई प्रमुख यूरोपीय नेताओं ने हिस्सा लिया। इन नेताओं की मौजूदगी का उद्देश्य यूक्रेन की राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना और उसके लॉन्ग-रेंज मिसाइल प्रोग्राम को और मजबूती देना था। वैश्विक समुदाय के सहयोग से यूक्रेन अपनी रक्षा क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, ताकि रूसी हमलों का प्रभावी जवाब दिया जा सके और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की जा सके।
सोवियत संघ से आजादी और 1991 का ऐतिहासिक जनादेश
यूक्रेन का एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरना आधुनिक इतिहास की एक प्रमुख घटना रही है। सोवियत संघ के विघटन के दौर में यूक्रेन के सांसदों ने 24 अगस्त, 1991 को देश की स्वतंत्रता का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद उसी वर्ष के अंत में आयोजित एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह में देश भर की जनता ने भारी बहुमत से इस ऐतिहासिक फैसले पर अपनी मुहर लगाई थी। आज 35 साल बाद भी यूक्रेनी नागरिक अपने उसी लोकतांत्रिक और स्वतंत्र अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
युद्ध का सम्मानजनक अंत और सैन्य आत्मनिर्भरता पर जोर
अपने राष्ट्रीय संबोधन में राष्ट्रपति जेलेंस्की ने देश की जनता, सशस्त्र बलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस की ओर से शांति की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जबकि यूक्रेन अपनी संप्रभुता या भूभाग से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। इसके अतिरिक्त, जेलेंस्की ने रक्षा तकनीकों में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अहम जानकारी साझा की। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर के निर्माण और लाइसेंसिंग को लेकर सार्थक चर्चा हुई है। यूक्रेन का लक्ष्य घरेलू स्तर पर पैट्रियट मिसाइलों का उत्पादन शुरू करना है ताकि वह अपनी वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत कर सके।



















