दिवंगत फ्रांसीसी सिनेमा हस्ती ब्रिजित बारदो की वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर जारी खींचतान अब और तेज हो गई है। हाल ही में सामने आई एक निजी हस्तलिखित चिट्ठी ने इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। यह पत्र दर्शाता है कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वह अपने अंतिम साथी बर्नार्ड डी कियारा से बेहद आहत थीं और उनसे पूरी तरह भावनात्मक दूरी बना चुकी थीं। नवंबर 2022 की तारीख वाले इस पत्र में उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक साथ रहे अपने साथी पर खुद को धीरे-धीरे तबाह करने का गंभीर आरोप लगाया था। यह खत सेंट-ट्रोपेज़ स्थित उनके आवास पर उनके निधन से ठीक तीन साल पहले लिखा गया था।
यह अप्रत्याशित खुलासा ब्रिजित बारदो फाउंडेशन के लिए कानूनी और नैतिक रूप से बेहद अहम साबित हुआ है। पशु कल्याण के लिए काम करने वाली यह संस्था अभिनेत्री के नाम पर बनी है और उनकी वसीयत की मुख्य उत्तराधिकारी है। दूसरी ओर, 85 वर्षीय बर्नार्ड डी कियारा ने इस संस्था पर आरोप लगाया था कि वह अभिनेत्री के करीबी लोगों और दोस्तों की उपेक्षा करते हुए पूरी संपत्ति को हड़पने की जल्दबाजी में है। हालिया परिस्थितियों के चलते डी कियारा को समुद्र किनारे स्थित ऐतिहासिक विला 'ला माद्राग' खाली करने के लिए विवश होना पड़ा, जहां वे 1990 के दशक की शुरुआत से बारदो के साथ रह रहे थे।
विला से निष्कासन और वित्तीय संकट
सालों तक ब्रिजित बारदो पर पूरी तरह आर्थिक रूप से निर्भर रहने के बाद अब डी कियारा की स्थिति बेहद अनिश्चित हो गई है। उनके पास न तो कोई निजी बैंक खाता है और न ही सामाजिक सुरक्षा कार्ड उपलब्ध है। वर्तमान में वह सेंट-ट्रोपेज़ के टाउन हॉल द्वारा उपलब्ध कराए गए एक किराए के अपार्टमेंट में जीवन बिता रहे हैं। विला से बाहर निकाले जाने के अलावा वह उस सार्वजनिक नीलामी से भी बेहद आहत थे, जो सितंबर के महीने में आयोजित की गई थी। इस नीलामी में पेरिस स्थित अभिनेत्री के फ्लैट से घरेलू सामान और वस्तुएं बेची गई थीं।
पेरिस की इस नीलामी से लगभग 10 लाख यूरो जुटाए गए, जो ब्रिटिश मुद्रा में करीब 835,000 पाउंड के बराबर थे। यह पूरी धनराशि बारदो की फाउंडेशन और ओस्लो में एकांत जीवन व्यतीत कर रहे उनके इकलौते बेटे निकोलस शारिए के बीच बांटी गई। डी कियारा ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना था कि ब्रिजित के जाने के महज कुछ ही महीनों बाद उनकी निजी वस्तुओं को स्मृति चिन्ह बनाकर बेचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य था।
निजी खत में छलका दर्द
सामने आई इस हस्तलिखित चिट्ठी की शुरुआत 'बर्नार्ड, यह एक नाकामी है!' शब्दों से होती है। पत्र में बारदो ने लिखा था कि उन्होंने रिश्ते में अपना सब कुछ इस उम्मीद के साथ झोंक दिया था कि उन्हें एक ऐसा साथी मिलेगा जो उनके प्यार का बदला प्यार से दे सके, उनके सुख और गहरे दुखों को साझा कर सके और उस जीवन से खुश रहे जो वह उसे दे रही थीं। लेकिन रिश्ते का अंत बेहद निराशाजनक रहा।
चिट्ठी के अंत में बारदो ने अपनी गहरी मानसिक व्यथा बयां करते हुए लिखा था कि वह अपनी परेशानी के चरम बिंदु पर पहुंच चुकी थीं। उन्हें एक ऐसे सहारे, कोमलता, उपस्थिति और आत्मीयता की सख्त आवश्यकता थी, जिसे देने में उनका साथी पूरी तरह असमर्थ रहा। डी कियारा, जिन्हें अक्सर 'द'ओरमाल' के उपनाम से जाना जाता था, पहले एक व्यवसायी थे और धुर दक्षिणपंथी नेता ज्यां-मारी ले पेन के सहयोगी भी रह चुके थे। उनका यह उपनाम फ्रांसीसी मुहावरे 'दोर माल' (खराब नींद) पर आधारित एक शब्द-व्यंग्य था।
अंतिम इच्छा और कानूनी उलझनें
बारदो के परिचितों का कहना है कि दोनों का रिश्ता हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहा। दोनों ने फ्रांसीसी कानून के तहत कभी औपचारिक निकाह नहीं किया था, हालांकि वे नॉर्वे में आयोजित एक समारोह में परिणय सूत्र में बंधे थे जिसे कभी फ्रांस में कानूनी मान्यता नहीं दी गई। इसके बावजूद डी कियारा जीवन के अंत तक उनके साथ रहे और अंतिम समय में उनकी तीमारदारी भी की। पिछले दिसंबर में अभिनेत्री के निधन के बाद जब उनकी वसीयत पढ़ी गई, तो उसमें डी कियारा का कोई उल्लेख नहीं मिला। वसीयत में पूरी मिल्कियत फाउंडेशन और उनके बेटे के नाम दर्ज थी, साथ ही यह स्पष्ट शर्त थी कि निधन के छह महीने के भीतर ला माद्राग पूरी तरह खाली कर दिया जाए।
वकीलों द्वारा परिसंपत्तियों की विस्तृत सूची तैयार किए जाने के दौरान तनाव तब और बढ़ गया जब फाउंडेशन ने डी कियारा पर विला से सामान हटाने का आरोप लगाया। गायब हुई चीजों में अभिनेत्री की मिनी मोक जीप भी शामिल थी। फाउंडेशन के अध्यक्ष मैक्स गुआजिनी ने स्पष्ट किया कि वे डी कियारा पर चोरी का सीधा इल्जाम नहीं लगा रहे हैं, लेकिन सामान का अचानक गायब हो जाना एक गंभीर विषय है। फाउंडेशन का पक्ष है कि कानूनी तौर पर डी कियारा का पेरिस वाले फ्लैट के एक हिस्से के अलावा किसी भी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं बनता, और वह फ्लैट भी अब बिक्री के लिए रखा जा चुका है।
गुआजिनी ने कहा कि मानवीय दृष्टिकोण से घर छोड़ने को लेकर डी कियारा की झिझक समझी जा सकती है, लेकिन यह कानून और खुद ब्रिजित बारदो की अंतिम इच्छा का मामला है। अभिनेत्री ने अपने साथी को वहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं सौंपा था, इसलिए संस्था के पास नियमों के पालन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
धरोहर का भविष्य और भारी खर्च
ला माद्राग के साथ-साथ भूमध्यसागरीय तट के पीछे पहाड़ियों में स्थित बारदो के दूसरे घर 'ला गारिग' की देखरेख एक बहुत बड़ी वित्तीय चुनौती बन गई है। अभिनेत्री के निधन के समय दोनों ही इमारतें काफी जर्जर अवस्था में थीं। अब इन संपत्तियों की चौबीसों घंटे सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जिसके चलते भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए फाउंडेशन आय के नए रास्ते तलाशने में जुटा है।
शुरुआत में ला माद्राग को एक सार्वजनिक संग्रहालय में तब्दील करने का विचार सामने आया था, लेकिन कार से वहां पहुंचना संभव न होने के कारण यह योजना रद्द कर दी गई। अब संस्था विचार कर रही है कि विला को नियंत्रित गाइडेड टूर, फैशन शो और फिल्मों की शूटिंग के लिए खोला जाए ताकि आवश्यक रखरखाव की लागत निकाली जा सके।
ब्रिजित बारदो ने 1973 में सिनेमा की चकाचौंध को अलविदा कह दिया था और इसके बाद अपना पूरा जीवन पशु अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी संस्था वर्तमान में करीब 13,000 पशुओं की देखभाल का जिम्मा संभालती है। डी कियारा से पहले बारदो ने तीन शादियां की थीं, जिनमें फिल्म निर्देशक रोजर वादिम, अभिनेता जाक शारिए और उद्योगपति गुंटर सैक्स शामिल थे।



















