रूस की प्रमुख इंटरनेट और टेक्नोलॉजी कंपनी यांडेक्स के सर्वर बुनियादी ढांचे पर यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमलों के बाद कंपनी की तकनीकी व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। पिछले दो दिनों के भीतर कंपनी के पांच मुख्य डेटा केंद्रों में से दो ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके चलते ऑनलाइन कार्यप्रणाली को सामान्य बनाए रखने में गंभीर संकट खड़ा हो गया है। तकनीक की दुनिया में रूस के गूगल के नाम से मशहूर यह कंपनी देश में सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाने वाला सर्च इंजन संचालित करती है। इसके अतिरिक्त, करोड़ों उपभोक्ता रोज़मर्रा के आवागमन के लिए इसकी टैक्सी सेवा तथा भोजन मंगाने के लिए इसकी फ़ूड डिलीवरी ऐप पर पूरी तरह निर्भर हैं।
रयाज़ान और कलुगा के प्रमुख ठिकानों को भारी क्षति
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, रयाज़ान क्षेत्र के सासोवो स्थित उसके डेटा केंद्र पर बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में इमारत और सर्वर प्रणाली को व्यापक नुकसान पहुंचा, जिसके तुरंत बाद वहां के सभी परिचालन पूरी तरह निलंबित कर दिए गए। यह संकट अभी थमा भी नहीं था कि शुक्रवार की सुबह मॉस्को के दक्षिण पश्चिम में स्थित कलुगा क्षेत्र के दूसरे बड़े डेटा केंद्र पर भी ड्रोन हमला बोल दिया गया। इस दूसरे हमले के कारण कलुगा स्थित परिसर का भी एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा पूरी तरह ठप हो गया।
कंपनी प्रबंधन ने शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ये डेटा केंद्र उसकी सामान्य सेवाओं के निर्बाध संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान परिस्थितियों में यह अनुमान लगाना बेहद कठिन है कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा कब तक पूरी तरह बहाल हो सकेगा। इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के दल स्थिति को संभालने के लिए दिन रात जुटे हुए हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर हुए नुकसान के कारण सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाना बिल्कुल भी आसान काम नहीं है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट होम उपकरणों पर सीधा असर
इन हमलों के चलते कंपनी की सेवाओं में कितना बड़ा व्यवधान आया है, इसका संपूर्ण दायरा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि सरकारी समाचार एजेंसी तास को दी गई जानकारी में कंपनी ने माना कि उसके कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI चैटबॉट के कई कार्य अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के घरों में लगे स्मार्ट होम उपकरणों के संचालन में भी तकनीकी रुकावटें आ रही हैं।
सासोवो स्थित जो डेटा केंद्र नष्ट हुआ है, वह तकनीकी दृष्टि से कंपनी की रीढ़ माना जाता था क्योंकि वहां कंपनी के तीन अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटरों में से दो सुपरकंप्यूटर मौजूद थे, जिनका उपयोग प्रमुख AI मॉडल को विकसित करने में किया जाता है। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आ सकी है कि वे सुपरकंप्यूटर इस भीषण हमले में सुरक्षित बच पाए हैं या नष्ट हो गए। दूसरी ओर, कलुगा स्थित सुविधा पूरे रूस के सबसे विशाल डेटा केंद्रों में गिनी जाती है। यह केंद्र 1,30,000 वर्ग मीटर यानी लगभग 13,99,000 वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इस एक केंद्र की वार्षिक बिजली खपत ब्रिटेन के लगभग 2,20,000 परिवारों की कुल खपत के बराबर है।
दोनों पक्षों के बीच बुनियादी ढांचे पर जवाबी वार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि कीव ने हाल के हफ़्तों में यूक्रेनी डेटा केंद्रों पर हुए रूसी हमलों का बिल्कुल उसी तरह आईने जैसा जवाब दिया है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने भी डेटा केंद्रों को निशाना बनाए जाने की बात स्वीकार की है। यूक्रेनी रणनीतिकारों का मानना है कि इस कदम से मॉस्को के राजस्व स्रोतों पर चोट पहुंचेगी और रूस को अपनी युद्ध मशीनरी के बजाय संसाधनों का रुख यांडेक्स की क्षतिग्रस्त क्षमता की मरम्मत की ओर मोड़ने पर विवश होना पड़ेगा।
हमलों के मानवीय प्रभाव की बात करें तो यांडेक्स ने स्पष्ट किया है कि उसके किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई है। हालांकि कलुगा के क्षेत्रीय गवर्नर ने जानकारी दी कि शहर के बुनियादी ढांचे पर हुए ड्रोन हमले में नौ लोग घायल हुए हैं। दूसरी तरफ, यूक्रेन में लगातार सर्वर केंद्रों पर हुए हमलों के कारण कई यूक्रेनी कंपनियों ने अपने संवेदनशील डेटा को क्षतिग्रस्त सर्वरों से हटाकर विदेश में मौजूद विदेशी केंद्रों में स्थानांतरित करना पहले ही शुरू कर दिया है।
सर्दियों से पहले ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर खींचतान
वर्ष 2022 में शुरू हुए पूर्ण पैमाने के सैन्य संघर्ष के लंबा खिंचने के साथ ही दोनों देश एक दूसरे के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बना रहे हैं। मॉस्को ने यूक्रेनी डेटा केंद्रों पर अपने हमलों को उचित ठहराते हुए दावा किया था कि इन सर्वरों का उपयोग यूक्रेनी सैन्य खुफिया तंत्र द्वारा किया जा रहा था। इसके विपरीत, कीव का आरोप है कि रूस जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता है। आगामी सर्दियों को ध्यान में रखते हुए रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा नेटवर्क पर अपने हमले काफी तेज़ कर दिए हैं, जैसा कि वह पिछले वर्षों में भी लगातार करता आया है। अब डिजिटल और ऊर्जा ढांचे पर केंद्रित यह जंग एक नए तकनीकी टकराव का रूप ले चुकी है।



















