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शेयर बाजार में गिरावट के बीच आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के संकरन नरेन ने सुझाया पूंजी सुरक्षा का फॉर्मूलाबाज़ार
10 अक्तू॰ 2026, 9:24 pm (46 मिनट पहले)· 1

शेयर बाजार में गिरावट के बीच आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के संकरन नरेन ने सुझाया पूंजी सुरक्षा का फॉर्मूला

बाजार के भारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक दबावों के बीच आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के संकरन नरेन ने एसेट एलोकेशन, कॉन्ट्रारियन रणनीति और निरंतर निवेश पर टिके रहने की सलाह दी है।

घरेलू शेयर बाजारों में जारी तेज हलचल और लगातार दबाव के बीच आम निवेशकों के लिए अपनी पूंजी को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। साल 2026 की शुरुआत से ही इक्विटी बाजारों में मंदी और बिकवाली का माहौल देखा जा रहा है। इस जटिल दौर में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के कार्यकारी निदेशक (ईडी) और मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) संकरन नरेन ने निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन और पूंजी निर्माण से जुड़े जरूरी सुझाव साझा किए हैं। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक बुनियादी स्थिति काफी मजबूत है, जिसे लंबी अवधि के नजरिए से कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

बाजार पर हावी वैश्विक कारक और आर्थिक दबाव

भारतीय वित्तीय बाजारों पर इस समय कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वजहों का दोहरा असर साफ दिखाई दे रहा है। प्रमुख दबावों में अमेरिका में ब्याज दरों का बढ़ना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विभिन्न देशों के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेश के इनफ्लो में आई भारी कमी प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही अमेरिकी कंपनियों की अगुआई में चल रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) निवेश चक्र ने पूरी दुनिया की पूंजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपनी तरफ खींच लिया है। विदेशी पूंजी के इस बड़े पैमाने पर अमेरिका केंद्रित होने से भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए अल्पकालिक परिस्थितियां और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गई हैं। हालांकि, इन तमाम वैश्विक रुकावटों के बाद भी भारत का घरेलू आर्थिक ढांचा बेहद मजबूत बना हुआ है और निवेशकों को इसी बुनियाद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

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नुकसान से बचाव के तीन बुनियादी सिद्धांत

संकरन नरेन के मुताबिक मौजूदा कठिन परिस्थितियों में खुदरा और संस्थागत दोनों तरह के निवेशकों को तीन बुनियादी नियमों का अनुशासन के साथ पालन करना चाहिए। इन तीन स्तंभों में पहला सही एसेट एलोकेशन, दूसरा बिना किसी रुकावट के नियमित निवेश जारी रखना और तीसरा उतार-चढ़ाव के बीच भी अपने निवेश को मजबूती से बनाए रखना शामिल है। लंबी अवधि में बड़ी वेल्थ तैयार करने के लिए इक्विटी एक बेहद शक्तिशाली माध्यम साबित होती है, लेकिन इसके साथ यह सच्चाई भी जुड़ी है कि इक्विटी में लंबे समय तक तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए किसी एक एसेट क्लास पर बहुत अधिक निर्भर रहने वाला पोर्टफोलियो बनाना निवेशकों के लिए आत्मघाती हो सकता है। केवल इक्विटी फंडों के पीछे भागने के बजाय अलग-अलग संपत्तियों में पैसे का बंटवारा करना ही समझदारी भरा कदम है।

हाइब्रिड और विविधीकरण रणनीतियों का महत्व

इक्विटी, डेट और अन्य परिसंपत्ति वर्गों का संतुलित मिश्रण तैयार करने से निवेशकों को बाजार के विभिन्न चक्रों का मुकाबला करने में मदद मिलती है। जब किसी एक परिसंपत्ति वर्ग का प्रदर्शन कमजोर होता है, तो दूसरा वर्ग पूरे पोर्टफोलियो को सहारा देता है। हाइब्रिड और एसेट एलोकेशन आधारित योजनाएं निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में व्यापक विविधीकरण लाने का अवसर प्रदान करती हैं। विशेष रूप से जब बाजार की भावी दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हो, तब ऐसी संतुलित रणनीतियां पूंजी को भारी नुकसान से बचाने के लिए सबसे असरदार ढाल साबित होती हैं।

कॉन्ट्रारियन निवेश की समझ और रणनीति

बाजार में बिकवाली और अस्थिरता का दौर उन दूरदर्शी निवेशकों के लिए नए अवसर भी खोलता है जो हालिया प्रदर्शन से आगे की सोच सकते हैं। इसी जगह पर कॉन्ट्रारियन अप्रोच बहुत उपयोगी साबित होती है। कॉन्ट्रा रणनीति मूल रूप से ऐसे शेयरों और सेक्टरों की तलाश करती है जिनका हालिया प्रदर्शन काफी समय से सुस्त या खराब रहा हो। इस नजरिए का मुख्य उद्देश्य ऐसे मौके तलाशना है जहां कंपनियों के बुनियादी संकेतकों में भविष्य में सुधार की पूरी गुंजाइश हो या जहां वर्तमान वैल्यूएशन के कारण उनके दीर्घकालिक सामर्थ्य का सही अंदाजा नहीं लग पा रहा हो।

संकरन नरेन का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा दौर में भी बाजार के विभिन्न हिस्सों में निवेश के बेहतरीन अवसर मौजूद हैं, जिनमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप दोनों तरह के शेयर शामिल हैं। कुछ खास सेक्टरों में अंडरपरफॉर्मेंस अधिक स्पष्ट रूप से देखी गई है। हालांकि, कॉन्ट्रारियन नजरिए का अर्थ केवल सस्ते शेयर खरीदना भर नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ हाल के लोकप्रिय और सफल ट्रेंड्स से हटकर स्वतंत्र सोच विकसित करना है। बाजार के चक्र के आधार पर वैल्यू, ग्रोथ या क्वालिटी में से कोई भी वर्ग कॉन्ट्रारियन अवसर का रूप ले सकता है। इसके लिए गहन शोध के जरिए सही शेयरों की पहचान करना और अपनी निवेश थीसिस के साबित होने तक धैर्य बनाए रखना जरूरी होता है। इसी रणनीति के तहत आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल कॉन्ट्रा फंड का एनएफओ बाजार में पेश किया गया है, जो 12 अक्टूबर तक खुला रहेगा।

स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फंड और धैर्य की अहमियत

ऐसे निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो के निर्माण में पारंपरिक तरीकों से अधिक लचीलापन चाहते हैं, वे स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। एसआईएफ का ढांचा फंड मैनेजरों को बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग निवेश रणनीतियां अपनाने की खुली छूट और लचीलापन देता है। अनिश्चित माहौल में सबसे अहम बात यह है कि निवेशक क्षणिक उतार-चढ़ाव से घबराकर अपने दीर्घकालिक निवेश प्लान को बीच में न छोड़ें। बाजार का हर चक्र उतार-चढ़ाव से होकर गुजरता है और यह निवेश प्रक्रिया का एक स्वाभाविक पहलू है। मंदी का समय निवेशकों के सब्र की परीक्षा लेता है, लेकिन घबराहट में बिकवाली करके बाहर निकलने का सीधा मतलब यह होता है कि आप भविष्य में आने वाली रिकवरी और तेजी के लाभ से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे। इसलिए शॉर्ट-टर्म उथल-पुथल से विचलित हुए बिना अपने मूल निवेश प्लान पर टिके रहना ही सफलता की कुंजी है।

सवाल-जवाब

संकरन नरेन ने बाजार के इस मुश्किल दौर में कौन से तीन टिप्स दिए हैं?
उन्होंने सही एसेट एलोकेशन करने, बिना किसी रुकावट के लगातार निवेश जारी रखने और मुश्किल समय में भी धैर्यपूर्वक निवेश बनाए रखने की सलाह दी है।
शेयर बाजार में साल 2026 में आ रही गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं?
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें, महंगे कच्चे तेल के दाम, अंतरराष्ट्रीय तनाव, विदेशी निवेश में कमी और अमेरिकी एआई बूम की तरफ वैश्विक पूंजी का खिंचाव इसके प्रमुख कारण हैं।
कॉन्ट्रारियन निवेश रणनीति का क्या अर्थ है?
कॉन्ट्रारियन रणनीति के तहत ऐसे शेयरों और सेक्टरों में निवेश किया जाता है जिनका हालिया प्रदर्शन कमजोर रहा हो, लेकिन जिनके फंडामेंटल्स में आगे सुधार की संभावना हो।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल कॉन्ट्रा फंड का एनएफओ कब तक खुला है?
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल कॉन्ट्रा फंड का नया फंड ऑफर (एनएफओ) 12 अक्टूबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।
स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) निवेशकों के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
एसआईएफ का ढांचा फंड मैनेजरों को बदलती परिस्थितियों के हिसाब से विविध निवेश रणनीतियां अपनाने का ज्यादा लचीलापन देता है।
बाजार में गिरावट के समय निवेशकों को क्या गलती करने से बचना चाहिए?
निवेशकों को शॉर्ट-टर्म गिरावट से डरकर अपने निवेश प्लान को बीच में छोड़ने और घबराहट में बिकवाली करने से बचना चाहिए।
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