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राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद में राजस्थान की श्रेया कुमावत ने उठाई आवाज़, दिल्ली विधानसभा में संभाली विपक्ष की कमानराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 7:46 pm (51 मिनट पहले)· 0

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद में राजस्थान की श्रेया कुमावत ने उठाई आवाज़, दिल्ली विधानसभा में संभाली विपक्ष की कमान

भीलवाड़ा के शाहपुरा की श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए दिल्ली विधानसभा में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर अपनी बात रखी।

देश की राजधानी में स्थित दिल्ली विधानसभा के भीतर पर्यावरण सुरक्षा पर आयोजित एक विशेष राष्ट्रीय सत्र में राजस्थान की युवा आवाज गूंजी। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा क्षेत्र की छात्रा श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 के राष्ट्रीय मंच पर अपने राज्य की नुमाइंदगी की। पूरे देश से छांटे गए 95 चुनिंदा बाल प्रतिनिधियों में जगह बनाकर उन्होंने न केवल अपने जिले बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया।

हजारों छात्रों के बीच से तय हुआ राष्ट्रीय मंच का सफर

इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न विद्यालयों से कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक के हजारों विद्यार्थियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। चयन की प्रक्रिया काफी प्रतिस्पर्धी रही, जिसमें सबसे पहले क्षेत्रीय स्तर पर 400 योग्य छात्र-छात्राओं को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके उपरांत कड़े मूल्यांकन के अंतिम चरण में केवल 95 बाल प्रतिनिधियों को दिल्ली विधानसभा में अपनी बात रखने का अवसर प्राप्त हुआ, जिनमें राजस्थान से श्रेया का चयन हुआ।

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विपक्षी मंत्री की भूमिका में टिकाऊ विकास पर जोर

सदन के भीतर विधायी कामकाज के प्रारूप में आयोजित इस सत्र में श्रेया कुमावत ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की विपक्षी मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने सदन के पटल पर रासायनिक प्रभावों, प्रकृति संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तार्किक विचार रखे। इस विशेष आयोजन में छात्र-छात्राओं ने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों की भूमिकाएं निभाते हुए समसामयिक पर्यावरणीय संकटों पर गहन विचार-विमर्श किया और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।

जमीनी स्तर पर प्रकृति संरक्षण की मुहिम

श्रेया का यह चयन केवल भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से धरातल पर प्रकृति बचाने के अभियानों में सक्रिय रही हैं। वे स्थानीय स्तर पर बीज संरक्षण करने, सीड बॉल तैयार करने, सघन पौधरोपण करने तथा हर घर हरियाली मुहिम को आगे बढ़ाने में निरंतर जुटी हैं। इसके अलावा प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश देकर आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को जागरूक करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

आयोजन और सम्मान

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 का यह प्रतिष्ठित आयोजन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (पीएसजी) की ओर से आयोजित किया गया था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मेजबानी और संयोजन का दायित्व मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल (MRIS) ने संभाला। राष्ट्रीय सत्र के समापन पर भाग लेने वाले सभी बाल प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र और मोमेंटो भेंट कर उनकी प्रतिबद्धता और प्रयासों को सम्मानित किया गया।

सवाल-जवाब

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की छात्रा श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया।
इस राष्ट्रीय सत्र का आयोजन कहां किया गया था?
इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली विधानसभा में किया गया था।
सदन में श्रेया कुमावत को कौन सी भूमिका सौंपी गई थी?
श्रेया कुमावत ने सदन में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की विपक्षी मंत्री की भूमिका निभाई।
इस प्रतियोगिता में देशभर से कुल कितने छात्रों ने भाग लिया था और अंतिम चयन कितनों का हुआ?
प्रतियोगिता में कक्षा 8वीं से 12वीं के हजारों विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से क्षेत्रीय स्तर पर 400 और अंतिम चरण में राष्ट्रीय स्तर पर 95 छात्रों का चयन हुआ।
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के आयोजक और मेजबान कौन थे?
इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (पीएसजी) द्वारा किया गया और मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल (MRIS) ने मेजबानी व संयोजन की भूमिका निभाई।
श्रेया कुमावत पर्यावरण संरक्षण के लिए किन अभियानों में सक्रिय रही हैं?
वे पौधरोपण, बीज संरक्षण, सीड बॉल निर्माण, हर घर हरियाली और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

छोटी उम्र में विधानसभा तक पहुँचना बड़ी बात है, पर सत्र में सिर्फ बोलने से ज़मीनी हालात कितनी जल्दी बदलेंगे, इस पर थोड़ा शक है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

रविकेश जी, बात सही है आपकी, पर 400 में से छँटकर 95 बच्चों में आना भी कम बड़ी बात नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 मिनट पहले

बच्चे इतनी कम उम्र में संसद जैसे मंच पर भाषण तो दे देते हैं, पर असल में नीतियां बनाने वाले इनकी कितनी सुनते हैं, यह सोचने वाली बात है। कागजों पर भाषण और जमीनी हकीकत में बहुत फर्क होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 मिनट पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी। यूपी में भी युवा संसद जैसे कई मंचों पर बच्चे गजब बोलते हैं, पर जमीनी योजनाएं बनाते वक्त इनकी राय शायद ही कोई अफसर सुनता हो।

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