रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित एक उच्च स्तरीय संक्रामक रोग अनुसंधान केंद्र में कार्यरत 28 वर्षीय महिला वैज्ञानिक की असमय मृत्यु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इस संवेदनशील घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वे रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ जल्द ही सीधी बातचीत करेंगे। अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच इस मामले पर पर्दे के पीछे गंभीर संवाद चल रहा है, जिसके नतीजे जल्द सामने आ सकते हैं।
शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के अधिकारी इस मसले पर बेहद सघन विचार विमर्श में जुटे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाले संवाद का ब्योरा संभवतः गुरुवार तक साझा किया जा सकता है। वाशिंगटन इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है क्योंकि साइबेरिया के इरकुत्स्क शहर स्थित संस्थान में प्लेग जैसे घातक रोगाणुओं पर शोध किया जाता है।
इधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस पूरे विषय पर अमेरिकी रुख स्पष्ट किया है। मार्को रुबियो ने कहा कि यदि जमीनी हालात रूसी दावों की तुलना में अधिक गंभीर पाए जाते हैं, तो अमेरिका के पास रूस को सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक उपाय उपलब्ध हैं। इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन किसी भी संभावित जैविक खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
रहस्यमयी मौत और संगरोध का साया
यह मामला तब तूल पकड़ने लगा जब इरकुत्स्क क्षेत्र में लगभग 200 लोगों को चिकित्सीय निगरानी में रखने की सूचना सामने आई। रूसी मीडिया के मुताबिक मृतका की पहचान 28 वर्षीय दारिया शिपिलोवा के रूप में हुई है, जो एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट में कार्यरत थीं। बताया गया कि उनकी तबीयत निधन से करीब दो दिन पहले अचानक तेजी से बिगड़ने लगी थी।
शुरुआती अपुष्ट चर्चाओं में दावा किया गया कि प्रयोगशाला में काम के दौरान रोगाणु से भरी एक परखनली टूट जाने अथवा जंगली कृन्तकों के प्राकृतिक प्लेग क्षेत्रों के दौरे के बाद वे बीमार पड़ी थीं। हालांकि रूसी स्वास्थ्य प्राधिकरण इन दावों को पूरी तरह खारिज करने में जुटे हैं। रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि महिला की मृत्यु अज्ञात कारण वाले निमोनिया के चलते हुई है। अधिकारियों का कहना है कि मृतका के संपर्क में आए सभी व्यक्तियों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है और न्यूमोनिक प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पारदर्शी जांच की मांग
इस पूरे मामले में स्वतंत्र सूचनाओं के अभाव के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मॉस्को से पूर्ण खुलासे की मांग की है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयेसस ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों का हवाला देते हुए समयबद्ध और स्पष्ट जानकारी साझा करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि परस्पर विरोधी दावों को शांत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों का सटीक आकलन करने के लिए तथ्य सामने आना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों का एक बेहद घातक संक्रमण है। यह बीमारी शरीर के तरल पदार्थों या दूषित सतहों के संपर्क में आने से फैल सकती है। इस बीमारी की इनक्यूबेशन अवधि कभी-कभी महज 24 घंटे जितनी छोटी होती है। इसके लक्षणों में सांस लेने में गंभीर तकलीफ, तेज खांसी और खून मिला बलगम आना शामिल हैं। समय पर पहचान और त्वरित उपचार न मिलने पर यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय रोगाणु
साइबेरिया और सुदूर पूर्व के इस इलाके में यर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु प्राकृतिक रूप से मारमोट्स जैसे जंगली कृन्तकों में पाया जाता है। यही जीवाणु प्लेग की घातक बीमारी का मुख्य कारण है। इस प्राकृतिक खतरे से निपटने के लिए ही लगभग सौ साल पहले 1920 के दशक के भयंकर प्रकोप के दौरान इस अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई थी। अब इसी ऐतिहासिक केंद्र में हुई एक शोधकर्ता की मौत ने वैश्विक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

















