बिहार लोक सेवा आयोग की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा को लेकर चल रही पड़ताल अब सिर्फ प्रश्नपत्र लीक के दायरे में नहीं रह गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की मानें तो इस गड़बड़ी की जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं और इसमें परीक्षा की पूरी तकनीकी रीढ़ — बायोमेट्रिक सत्यापन से लेकर जैमर तक — को साधकर इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी का आकलन है कि परीक्षा की गोपनीयता तोड़ने के लिए एक नहीं, बल्कि कई स्तरों पर सोची-समझी अनियमितताएं की गईं।
बायोमेट्रिक एजेंसी ने कैसे पलटी बाजी
EOU की जांच का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह निजी एजेंसी है, जिसके कंधों पर परीक्षार्थियों के बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि इस एजेंसी ने तय प्रक्रिया को ताक पर रख दिया। निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले रेंडमाइजेशन नियमों (Randomization Rule) को नजरअंदाज करते हुए ऐन मौके पर ऐसे लोगों को परीक्षा केंद्रों पर बैठा दिया गया, जिनके नाम तय सूची में थे ही नहीं। इससे भी बड़ी बात यह सामने आई कि जिन कर्मियों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से कई खुद AEDO परीक्षा के अभ्यर्थी थे — जबकि नियम के मुताबिक उन्हें यह घोषणा पत्र देना था कि वे अभ्यर्थी नहीं हैं।
ब्लूटूथ से उत्तर, जैमर पर सवाल
EOU के अनुसार बेगूसराय, छपरा और नालंदा से ऐसे संकेत मिले हैं कि वहां ब्लूटूथ डिवाइस के सहारे परीक्षार्थियों तक उत्तर पहुंचाए जा रहे थे। इसके साथ ही एजेंसी इस पहलू को भी खंगाल रही है कि क्या कुछ केंद्रों पर जैमर के असर को जानबूझकर सिकोड़ कर रखा गया, ताकि बाहरी सिग्नल काम करते रहें। अगर यह पुष्टि हो जाती है तो इसे परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध माना जाएगा।
35 गिरफ्तारियां और दागी अतीत
अब तक अलग-अलग जिलों से कुल 35 लोग इस मामले में हिरासत में लिए जा चुके हैं। इस सूची में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, जिला समन्वयक (कोर्डिनेटर) और दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। जांच में एक और गंभीर बात उजागर हुई — इनमें से कुछ चेहरे पहले भी सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के आरोपों में घिर चुके थे, फिर भी उन्हें इस परीक्षा में अहम जिम्मेदारियां सौंप दी गईं।
एजेंसी ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव
जांच के आधार पर EOU ने अब संबंधित बायोमेट्रिक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश राज्य सरकार और दूसरी परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं तक भेज दी है। समानांतर रूप से जैमर व्यवस्था से जुड़े कर्मियों और समूची तकनीकी प्रक्रिया की भी छानबीन चल रही है। इतना ही नहीं, आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
आगे और खुलासों की आहट
EOU के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पूरे नेटवर्क की कड़ियां आपस में जोड़ी जा रही हैं। यह टटोला जा रहा है कि तकनीकी तंत्र की कमान आखिर किन हाथों में थी और कहां-कहां महज लापरवाही थी या फिर सीधी मिलीभगत। माना जा रहा है कि इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां तथा नए तथ्य सामने आ सकते हैं, और सबकी निगाहें अनुसंधान के नतीजों पर टिकी हैं।













