धनतेरस के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा का चयन करते समय उनके स्वरूप और बैठने की मुद्रा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना गया है। पंडित कल्कि राम के अनुसार, घर में स्थापित करने के उद्देश्य से लाई जा रही मूर्ति सदैव बैठी हुई मुद्रा में होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी प्रतिमा को घर की स्थिरता और संपन्नता के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कमल के आसन वाली प्रतिमा का चयन
प्रतिमा खरीदते समय उनके वाहन और आसन पर गौर करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उल्लू के स्थान पर कमल के पुष्प पर विराजमान स्वरूप को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कमल के आसन पर विराजित देवी का यह रूप जीवन में सुख, शांति तथा स्थायी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सोने-चांदी के अभाव में पीली कौड़ियां और गोमती चक्र
पंडित कल्कि राम के अनुसार, यदि पारिवारिक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण सोना अथवा चांदी खरीदना संभव न हो, तो बाजार से कम से कम 16 पीली कौड़ियां खरीदी जा सकती हैं। धार्मिक परंपरा में इसे एक बेहद शुभ विकल्प का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही 11 या 16 गोमती चक्र खरीदना भी मंगलकारी माना गया है, किंतु क्रय करते समय यह अवश्य जांच लें कि वे कहीं से भी टूटे या खंडित न हों।
शाम के दीपदान और कौड़ी पूजन का विधान
पंडित कल्कि राम के अनुसार, धनतेरस की संध्या पर घर के भीतर 13 घी के दीपक प्रज्वलित करने का पारंपरिक विधान है। इस परंपरा के तहत इन दीपकों के भीतर कौड़ी रखने का नियम बताया गया है।
इसके बाद शेष बची 3 कौड़ियों को एक लाल सूती वस्त्र पर रखकर देवी लक्ष्मी के समक्ष स्थापित किया जाता है। इन कौड़ियों पर हल्दी और कुमकुम से तिलक अर्पित करें, निकट ही एक दीपक प्रज्वलित करें और देवी लक्ष्मी के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप संपन्न करें।


















