मिठाइयों के शौकीन लोगों के बीच उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की एक बेहद पुरानी मिष्ठान दुकान अपनी खास रसमलाई के लिए जानी जाती है. परोसते ही इसकी महक और बनावट ग्राहकों को लुभा लेती है. इसका स्वाद बाहर से हल्की मिठास वाला और भीतर गाढ़ी रबड़ी से भरा होता है, जो इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाता है. इस स्वाद की असली वजह दशकों पुरानी पारंपरिक विधि और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल है.
तीन पीढ़ियों की विरासत और खास तैयारी
इस प्रतिष्ठान का नाम साधु जी का दिव्यांशु मिष्ठान भंडार है, जो बलिया शहर में पालिका गेट के पास कचहरी रोड पर स्थित है. दुकान का संचालन संभाल रहे दिव्यांशु गुप्ता के अनुसार, इस दुकान की नींव उनके दादाजी ने रखी थी और यह करीब 65 साल से लगातार चल रही है. यहां रसमलाई को दुकान की मुख्य और खास पहचान के रूप में बनाया जाता है. इसे तैयार करने के लिए बढ़िया गुणवत्ता वाले दूध और गाढ़ी रबड़ी का इस्तेमाल किया जाता है.
दिव्यांशु बताते हैं कि इस रसमलाई को बनाने वाले कारीगर भी बेहद अनुभवी हैं. कई कारीगरों के परिवार लगभग तीन पीढ़ियों से इसी दुकान पर मिठाइयां तैयार करने के काम से जुड़े हैं. रसमलाई की यह खास विधि करीब 60 से 70 साल पुरानी है, जिसमें आज तक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. इसे शुद्ध छेने से तैयार किया जाता है. सबसे पहले छेने का बारीक पेस्ट तैयार होता है, फिर उसे दुकान पर ही उत्तम गुणवत्ता वाले दूध से तैयार की गई गाढ़ी रबड़ी में पकाया और मिलाया जाता है.
आसपास के जिलों और अफसरों के बीच जबरदस्त मांग
दुकान पर तैयार होने वाली इस मिठाई की मांग सिर्फ बलिया शहर तक सीमित नहीं रहती. स्थानीय ग्राहकों के अलावा लखनऊ, मऊ और गाजीपुर जैसे पड़ोसी और दूरदराज के जिलों तक भी लोग इसे मंगवाते हैं. दिव्यांशु गुप्ता के अनुसार, कचहरी रोड पर स्थित होने के कारण विशेष रूप से जजों, वकीलों और पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस रसमलाई की काफी मांग रहती है.
कम चीनी और फलाहार के रूप में उपयोग
दुकान संचालक का कहना है कि उनकी रसमलाई में चीनी का अनुपात काफी कम रखा जाता है. कम मिठास की वजह से लोग इसे उपवास या व्रत के दौरान फलाहार के रूप में भी पसंद करते हैं. इसके अलावा दुकान पर कलाकंद भी बनाया जाता है, जिसमें चीनी की मात्रा नियंत्रित रखी जाती है. दुकानदार का कहना है कि कम चीनी होने की वजह से मधुमेह से पीड़ित लोग भी इसे खा सकते हैं, हालांकि डायबिटीज के मरीजों को कोई भी मीठी चीज लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए.
कीमत और ग्राहकों का अनुभव
इस पारंपरिक रसमलाई की कीमत 40 रुपये प्रति पीस रखी गई है. दुकान पर मिठाई का स्वाद लेने पहुंचे बुजुर्ग ग्राहक सूर्य नारायण ओझा ने बताया कि उन्हें रसमलाई का जायका बेहद पसंद आया. उन्होंने कहा कि इसमें मिठास संतुलित है और 40 रुपये के हिसाब से यह रसमलाई काफी स्वादिष्ट और संतोषजनक है.


















