फोर्ट हुड गोलीबारी मामले में निदाल हसन को फायरिंग स्क्वाड से सजा-ए-मौत की मंजूरी, 81 साल बाद अमेरिकी सेना में लागू होगा दुर्लभ फैसला40 घंटे से अधिक चलने वाली रेलगाड़ियों में स्वच्छता पर कड़ा पहरा, हर दो घंटे में होगा कचरा प्रबंधनशाहरुख खान को बड़ा भाई मानते हैं अभिषेक बच्चन, करियर में मिले साथ और अहम सीख का किया खुलासारांची के अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहीं रूपी सोरेन, संघर्ष के दिनों में महाजन से लेकर पुलिस तक से अकेले भिड़ गई थींहंगेरियन फ़ोरिंट में मजबूती और यूरो अपनाने की रूपरेखा के बीच वैश्विक बाज़ारों में बढ़ा तनावबैंक ऑफ जापान की दरों में बढ़ोतरी से येन पर दबाव, वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर मजबूतसैंडबॉक्स लांघकर असली इंटरनेट और सरकारी वेबसाइटों तक पहुंचे गूगल और ओपनएआई के एआई एजेंटछतरपुर के रेस्टोरेंट में ईजाद हुई पालक और अमरूद की अनोखी चटनी, समोसे से लेकर रोटी तक के साथ स्वाद ले रहे लोगजयपुर में सर्विस रोड पर अवैध बजरी ट्रेलरों पर शिकंजा, हरमाड़ा पुलिस ने 10 से अधिक वाहन किए जब्तअल्बर्टा जनमत संग्रह के सियासी दबाव के बीच कैनेडियन डॉलर संभला, वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़त बरकरार
छतरपुर के लवकुश नगर में लकड़ी की आंच पर तैयार हो रहा खास मथुरा पेड़ा, 400 रुपये किलो बिक रही पारंपरिक मिठाईखानपान
7 अक्तू॰ 2026, 7:50 pm (11 मिनट पहले)· 0

छतरपुर के लवकुश नगर में लकड़ी की आंच पर तैयार हो रहा खास मथुरा पेड़ा, 400 रुपये किलो बिक रही पारंपरिक मिठाई

छतरपुर के लवकुश नगर स्थित बब्बी रेस्टोरेंट में पारंपरिक विधि और लकड़ी की धीमी आंच पर शुद्ध मथुरा पेड़ा तैयार किया जा रहा है, जिसकी कीमत 400 रुपये प्रति किलो रखी गई है।

पारंपरिक मिष्ठान्न कला में धीमी आंच और धैर्य का बड़ा महत्व होता है, और इसी हुनर के दम पर छतरपुर के लवकुश नगर में खास मथुरा पेड़ा तैयार किया जा रहा है। यहां स्थित बब्बी रेस्टोरेंट में काम करने वाले हलवाई जगपाल इस पारंपरिक पेड़े को बनाने के लिए घंटों तक पसीना बहाते हैं। उनका कहना है कि इस स्वाद को हासिल करने के लिए सबसे पहले ताजे दूध को लोहे की एक बड़ी कढ़ाही में डाला जाता है। इसके बाद मिट्टी से बने चूल्हे पर लकड़ी की हल्की और धीमी आंच जलाकर दूध को काफी देर तक पकाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दूध को कढ़ाही में लगातार चलाना बेहद जरूरी होता है, जिससे वह तले में चिपके या जले नहीं और आहिस्ता-आहिस्ता गाढ़ा होता चला जाए। जब दूध पूरी तरह पककर मावा यानी खोवा का रूप ले लेता है, तब इस मिठाई का असल और अहम काम शुरू होता है।

मावे की लाल भुनाई और सटीक मिठास का गणित

हलवाई जगपाल के अनुसार खोवा तैयार हो जाने के बाद पेड़े को उसका असली रंग और सौंधापन देने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है। तैयार मावे को अलग से एक कढ़ाही में लेकर दोबारा भूना जाता है। इस भुनाई को तब तक जारी रखा जाता है जब तक कि मावा गहरा लाल न दिखने लगे। मावे के पूरी तरह लाल हो जाने के बाद ही उसमें चीनी मिलाई जाती है। मिठास के संतुलन का पैमाना बताते हुए जगपाल कहते हैं कि 1 किलो भुने हुए मावे में 200 से 250 ग्राम तक शक्कर मिलाई जा सकती है। उनका मानना है कि पेड़े में चीनी की मात्रा हमेशा सीमित रखनी चाहिए, जिससे पेड़ा खाते वक्त जरूरत से ज्यादा मीठा न लगे और खोवे का असली स्वाद बना रहे। यही संतुलित मिठास इस पारंपरिक मथुरा पेड़े का मुख्य फॉर्मूला मानी जाती है।

ये भी पढ़ें

घोटाई की तकनीक और इलायची की खुशबू

मावे में चीनी मिलाने के बाद उसमें खुशबू और स्वाद बढ़ाने के लिए छोटी इलायची का पाउडर मिलाया जाता है। इसके तुरंत बाद मिश्रण को अच्छी तरह एकसार करने के लिए स्टील के लोटे से लगातार घोटा जाता है। जब घोटाई के बाद यह मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब उससे गोल आकार के छोटे-छोटे पेड़े गढ़े जाते हैं। जगपाल बताते हैं कि इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसके मावे को लकड़ी की धीमी आंच पर घंटों तक भूना जाता है, जो इसे बाजार की अन्य मिठाइयों से अलग एक खास सौंधा स्वाद देता है। छोटी इलायची का पाउडर इस स्वाद को और ज्यादा निखार देता है, जिसके चलते लोग इसे बेहद पसंद करते हैं।

शुद्धता की गारंटी और 400 रुपये प्रति किलो की कीमत

इस मिठाई की गुणवत्ता पर बात करते हुए हलवाई जगपाल स्पष्ट करते हैं कि यह मथुरा पेड़ा पूरी तरह शुद्ध और देसी तरीके से बनाया जाता है, जिसमें किसी भी किस्म की मिलावट नहीं की जाती। बब्बी रेस्टोरेंट में इस शुद्ध देसी पेड़े की बिक्री 400 रुपये प्रति किलो के भाव पर की जाती है। आम ग्राहकों के अलावा विशेष मौकों के लिए यह पेड़ा ऑर्डर पर भी तैयार किया जाता है। मिठाई के शौकीनों का मानना है कि एक बार इसका स्वाद चखने के बाद इसे भूलना आसान नहीं होता, यही वजह है कि लोग इसकी कीमत चुकाकर भी इसे खुशी-खुशी खरीदते हैं।

सवाल-जवाब

छतरपुर में यह खास मथुरा पेड़ा कहां तैयार किया जा रहा है?
यह पेड़ा छतरपुर के लवकुश नगर स्थित बब्बी रेस्टोरेंट में हलवाई जगपाल द्वारा तैयार किया जा रहा है।
बब्बी रेस्टोरेंट में इस मथुरा पेड़े की कीमत क्या है?
रेस्टोरेंट में यह शुद्ध पेड़ा 400 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जाता है।
पेड़ा बनाते समय 1 किलो मावे में कितनी चीनी मिलाई जाती है?
1 किलो भुने हुए मावे में 200 से 250 ग्राम चीनी मिलाई जाती है ताकि पेड़ा ज्यादा मीठा न लगे।
मिश्रण को एकसार करने के लिए किस बर्तन का उपयोग किया जाता है?
मावे में शक्कर और इलायची मिलाने के बाद मिश्रण को स्टील के लोटे से घोटा जाता है।
क्या इस पेड़े को अग्रिम ऑर्डर पर भी बनवाया जा सकता है?
हां, हलवाई जगपाल के अनुसार यह पेड़ा ग्राहकों की मांग पर ऑर्डर देकर भी बनवाया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp