बिहार के मधुबनी जिले में स्थित सकरी जंक्शन पर जब भी कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर ठहरती है, तो डिब्बों की खिड़कियों और दरवाजों पर एक अलग ही हलचल दिखने लगती है। सफर कर रहे मुसाफिर अपनी सीटों से उठकर सीधे स्टेशन पर लगे ठेलों की तरफ हाथ बढ़ाने लगते हैं। यहां बिकने वाली पारंपरिक कचरी का स्वाद ऐसा है कि इस रूट से गुजरने वाला शायद ही कोई नियमित यात्री होगा जिसने इसका जायका न चखा हो। दशकों से बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की यह पसंदीदा खानपान सूची में शुमार रही है।
दाल और प्याज की कचरी के साथ मुरही की जोड़ी
सकरी रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले इस नाश्ते की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका पारंपरिक स्वाद और सादगी है। यहां मुख्य रूप से दो तरह की कचरी तैयार की जाती है, जिसमें दाल की कचरी और प्याज की कचरी दोनों ही समान रूप से लोकप्रिय हैं। गरमागरम तली हुई इन कचरियों को कुरकुरी मुरही यानी मुरमुरे के साथ परोसा जाता है। पुराने और तजुर्बेकार मुसाफिर अक्सर पहली बार सफर करने वालों को सलाह देते हैं कि अगर गाड़ी सकरी जंक्शन पर रुके, तो यहां की कचरी चखना बिल्कुल न भूलें। इसे एक बेहतरीन शाम के स्नैक्स के तौर पर खाया जाता है।
दो मिनट के ठहराव में तेजी से खाली होते हैं ठेले
रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव अक्सर महज दो से पांच मिनट का होता है, इसलिए यहां के ठेले वाले पहले से पूरी तैयारी करके रखते हैं। दर्जनों विक्रेता अखबार और कागज के दोनों में पहले से ही मुरही और पांच कचरी सजाकर तैयार रखते हैं। गाड़ी रुकते ही यात्री खिड़कियों से पैसे बढ़ाते हैं और विक्रेता बिजली की तेजी से उन्हें दोना थमा देते हैं। चंद मिनटों के भीतर कई ठेलों की पूरी सामग्री बिककर खत्म हो जाती है। यह पूरी व्यवस्था इतनी फुर्तीली होती है कि ट्रेन चलने से पहले सैकड़ों लोग अपना पसंदीदा नाश्ता हासिल कर लेते हैं।
महज 20 रुपये में मिलता है भरपेट नाश्ता
इस स्ट्रीट फूड की सबसे बड़ी खासियत इसकी किफायती कीमत है। मात्र 20 रुपये में पांच कचरी और भरपूर मुरही मिल जाती है, जिससे किसी भी व्यक्ति का पेट आसानी से भर जाता है। जिस तरह हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर रुकने वाली गाड़ियों में यात्रियों के बीच वहां के मशहूर केले खरीदने की होड़ मचती है, ठीक वैसा ही नजारा सकरी स्टेशन पर कचरी के लिए दिखता है। कई बार मुसाफिर सफर में खाने के अलावा अपने घर के सदस्यों के लिए भी इसे पैक करवाकर ले जाते हैं।
मिथिलांचल की रोजमर्रा की खानपान परंपरा का हिस्सा
मिथिलांचल के इलाके में कचरी और मुरही केवल सफर का नाश्ता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की संस्कृति से जुड़ा हुआ व्यंजन है। स्थानीय लोग मेलों में, शाम की चाय के वक्त या घर पर फुर्सत के पलों में भी मुरही-कचरी का नाश्ता बड़े चाव से करते हैं। ऐसे में जब सकरी स्टेशन पर गरमागरम और ताजी कचरी उसी पारंपरिक मिजाज में मिल जाती है, तो सफर का आनंद दोगुना हो जाता है। अगली बार जब भी इस रेलखंड से यात्रा का मौका मिले, तो सकरी की इस मशहूर कचरी का स्वाद जरूर आजमाया जा सकता है।



















