न्यूजीलैंड दौरे पर देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, साई सुदर्शन सिर्फ 8 रन से चुकेनेपाल प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी क्रिकेटरों की राह में अड़चन, NOC को लेकर खड़ी हुई बड़ी मुश्किलशादाब खान के ऐतिहासिक शतक से इंग्लैंड चित, पाकिस्तान ने दर्ज की रोमांचक जीतउड़ता तीर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 3: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ने पहले वीकेंड पर कमाए इतने करोड़अशोक सेन: नोबेल से तीन गुना बड़े इनाम वाले भारतीय वैज्ञानिक, जिनकी सादगी आज भी साइकिल पर टिकी हैमुंबई में कृष्णा दास के कीर्तन में भक्तिमय हुए अनुष्का शर्मा और विराट कोहलीभारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 मुकाबले की तारीख, समय और वेन्यू की पूरी जानकारीन्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट स्क्वाड में देवदत्त पडिक्कल ने मजबूत की अपनी दावेदारी, 199 रनों की खेली शानदार पारीरजनीकांत की 'धर्मन' में हुई नयनतारा की एंट्री, पांच साल बाद दोनों कलाकार आएंगे साथ नजरआरआरआर की छोटी मल्ली का बदल गया है पूरा अंदाज, 160 लड़कियों को पीछे छोड़कर मिला था रोल
बरसात में सिर्फ कुछ हफ्तों का मेहमान है यह जंगली देसी सब्जी, कड़वाहट में करेले को भी पीछे छोड़ देता है मुरेलाखानपान
16 जून 2026, 6:05 pm (135 दिन पहले)· 4

बरसात में सिर्फ कुछ हफ्तों का मेहमान है यह जंगली देसी सब्जी, कड़वाहट में करेले को भी पीछे छोड़ देता है मुरेला

बारिश के मौसम में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उगने वाला मुरेला साल में सिर्फ एक बार और बमुश्किल महीनेभर के लिए बाजार में आता है, और इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बना देते हैं।

जैसे ही मानसून दस्तक देता है, सब्जी मंडियों की रंगत बदल जाती है। साल के बाकी महीनों में जो सब्जियां कहीं नजर नहीं आतीं, वे अचानक ठेलों पर सजने लगती हैं। ऐसी ही एक देसी और मौसमी सब्जी है मुरेला, जिसे आम बोलचाल में लोग करेले का छोटा भाई कह देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आकार में छोटा होने के बावजूद कड़वाहट के मामले में यह करेले को भी पीछे छोड़ देता है।

साल में सिर्फ एक मौसम, वह भी चंद दिनों के लिए

मुरेला कोई ऐसी सब्जी नहीं जो आपको सालभर मिल जाए। यह सिर्फ बरसात के दौरान बाजार में उतरता है और इसकी मौजूदगी इतनी कम होती है कि कई लोग तो इसका नाम तक नहीं जानते। सब्जी व्यापारियों के मुताबिक यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से, बिना किसी खेती के, बारिश के मौसम में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उग आता है। यही वजह है कि इसकी उपलब्धता बेहद सीमित रहती है।

ये भी पढ़ें

व्यापारी बताते हैं कि मुरेला का सीजन ककोड़ा सब्जी के आसपास ही शुरू होता है, लेकिन यह उससे भी कम समय तक टिकता है। साल में यह बस एक ही बार आता है और बमुश्किल महीनेभर बाजार में रहता है। यही कमी इसकी मांग को और बढ़ा देती है। कीमत की बात करें तो यह आमतौर पर 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है।

बनाने का तरीका करेले जैसा, स्वाद उससे भी तीखा

मुरेला को पकाने का तरीका लगभग करेले जैसा ही होता है, लेकिन स्वाद में यह करेले से भी ज्यादा कड़वा निकलता है। आकार भले छोटा हो, इसके गुण इसे बाकी सब्जियों से अलग खड़ा कर देते हैं। स्थानीय लोग इसे शुरुआती बरसात की सबसे उपयोगी देसी सब्जियों में गिनते हैं।

एक सब्जी, औषधि जैसे फायदे

ग्रामीण इलाकों में मुरेला को महज सब्जी नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर भोजन माना जाता है। असल में यह एक तरह की वनस्पति जड़ी-बूटी की तरह काम करता है। इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।

माना जाता है कि यह देसी सब्जी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और मौसमी संक्रमणों से बचाव में सहायक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुरेला का नियमित और संतुलित सेवन ताप-ज्वर जैसे मौसमी बुखारों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके साथ ही इसे आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

यही कारण है कि गांव-देहात में लोग आज भी इसे औषधीय भोजन के तौर पर अहमियत देते हैं। भले ही यह सब्जी जुबान पर कड़वी लगे, लेकिन इसके सेहत से जुड़े फायदे इसे बरसात के मौसम की सबसे खास देसी सब्जियों की कतार में ला खड़ा करते हैं।

सवाल-जवाब

मुरेला सब्जी क्या है?
यह बरसात में जंगलों और झाड़ियों में अपने आप उगने वाली एक देसी सब्जी है, जिसे लोग करेले का छोटा भाई कहते हैं और जो करेले से भी ज्यादा कड़वी होती है।
मुरेला कब और कितने दिनों तक बाजार में मिलता है?
यह साल में सिर्फ एक बार बरसात के मौसम में आता है और बमुश्किल महीनेभर तक बाजार में उपलब्ध रहता है।
मुरेला की कीमत कितनी होती है?
यह आमतौर पर 50 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच बिकता है।
मुरेला खाने के क्या फायदे हैं?
इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन मजबूत करने, मौसमी बुखारों से बचाव और आंखों की सेहत में मददगार माने जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp