भारतीय व्यंजनों में अचार का विशेष स्थान
भारतीय भोजन में अचार का महत्व सदियों पुराना है। यह खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है और थाली में एक अलग ही रंगत जोड़ता है। आम, नींबू और मिर्च के अचार तो लगभग हर घर में बनते हैं, लेकिन करेले का अचार भी अपनी अनूठी पौष्टिकता और स्वाद के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसकी प्राकृतिक कड़वाहट के कारण बहुत से लोग इसे पसंद नहीं करते। लेकिन, अगर इसे सही तरीके से बनाया जाए, तो करेले का अचार न केवल बेहद स्वादिष्ट हो सकता है, बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। Gonda की रहने वाली Sanju Mishra ने ऐसे ही एक स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले करेले के अचार की विधि साझा की है, जिसे कोई भी आसानी से अपने घर पर बना सकता है।
Sanju Mishra की कड़वाहट रहित अचार बनाने की विधि
TrendKia से बातचीत में Sanju Mishra ने बताया कि अचार बनाने की शुरुआत सही करेले चुनने से होती है। सबसे पहले आपको ताजे, गहरे हरे और अच्छी गुणवत्ता वाले करेले चुनने होंगे। इन करेलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए, ताकि उन पर लगी धूल-मिट्टी पूरी तरह से हट जाए। धुले हुए करेलों को अपनी पसंद के अनुसार गोल टुकड़ों में या लंबाई में काटा जा सकता है।
करेले की कड़वाहट कम करने का विशेष तरीका
करेले के अचार में कड़वाहट कम करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। Sanju Mishra के अनुसार, कटे हुए करेलों को भाप में पकाना (स्टीम करना) बेहद जरूरी है। उन्हें तब तक भाप में पकाएं जब तक कि वे हाथ से दबाने पर आसानी से टूटने न लगें। इस प्रक्रिया से करेलों की अधिकांश कड़वाहट खत्म हो जाती है और अचार का स्वाद बहुत बेहतर हो जाता है। भाप में पकाने के बाद, करेलों को कुछ समय के लिए खुली धूप में सूखने के लिए रखना चाहिए। धूप में सुखाने से उनमें मौजूद अतिरिक्त नमी बाहर निकल जाती है, जिससे अचार को लंबे समय तक खराब होने से बचाया जा सकता है। जब करेले हल्के सूख जाएं, तो अचार के लिए मसाला तैयार करना शुरू कर सकते हैं।
अचार के लिए खास मसाले का मिश्रण
Sanju Mishra ने बताया कि यह मसाला लगभग 5 किलो करेले के अचार के लिए पर्याप्त है। इस मसाले को तैयार करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
- धनिया: लगभग 50 ग्राम
- सौंफ: 200 ग्राम
- जीरा: 100 ग्राम
- मेथी: 25 ग्राम
- मंगरेल (कलौंजी): 10 ग्राम
- अजवाइन: 10 ग्राम
- काली सरसों: 100 ग्राम
- पीली सरसों: 100 ग्राम
- काली मिर्च: 200 ग्राम
- नमक: 400 ग्राम
मसाला तैयार करने के लिए, सभी खड़े मसालों में से एक-एक चम्मच अलग निकाल लें। बाकी बचे हुए मसालों को बारीक पाउडर बना लें। बाद में, जो खड़े मसाले अलग रखे गए थे, उन्हें भी इस पिसे हुए मसाले में मिला दें। Sanju Mishra के अनुसार, ऐसा करने से अचार का स्वाद और उसकी खुशबू दोनों में वृद्धि होती है।
अचार को तैयार करने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया
अचार का स्वाद बढ़ाने और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सरसों का तेल बहुत महत्वपूर्ण है। सरसों के तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करना चाहिए और फिर उसे पूरी तरह ठंडा होने देना चाहिए। ठंडा होने के बाद, इस तेल को मसाले लगे करेलों में डालकर अच्छी तरह से मिलाना चाहिए, ताकि मसाला और तेल करेलों के हर टुकड़े पर समान रूप से चढ़ जाए। तैयार अचार को साफ और सूखे कांच के जार में भरें। जार भरने के बाद, इसे 4 से 5 दिनों तक धूप में रखें। इस दौरान, दिन में एक बार साफ चम्मच से अचार को हिलाते रहें, जिससे मसाले और तेल अच्छी तरह से मिलते रहें और अचार पकता रहे।
घर के बने करेले के अचार के फायदे
Sanju Mishra का कहना है कि घर पर बना करेले का अचार न केवल बहुत स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम रंग या प्रिजर्वेटिव का उपयोग नहीं किया जाता है। यही कारण है कि यह बाजार में मिलने वाले अचार की तुलना में कहीं अधिक शुद्ध, स्वास्थ्यवर्धक और भरोसेमंद माना जाता है। यह खाने के साथ एक बेहतरीन संगत प्रदान करता है और इसे आसानी से साल भर तक सुरक्षित रखा जा सकता है।













