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भाप में पककर तैयार होने वाली बघेलखंड की ये रेसिपी सेहत और स्वाद दोनों में मोमोज को टक्कर देती हैखानपान
17 जुल॰ 2026, 9:52 pm (14 दिन पहले)· 2

भाप में पककर तैयार होने वाली बघेलखंड की ये रेसिपी सेहत और स्वाद दोनों में मोमोज को टक्कर देती है

मध्य प्रदेश के बघेलखंड इलाके की पारंपरिक डिश फरा तेल में तली नहीं, बल्कि भाप में पकाई जाती है, इसलिए चावल के आटे और चना दाल से बनने वाली यह डिश हल्की और सेहतमंद मानी जाती है।

भाप में पककर तैयार होने वाला बघेलखंड का फरा इन दिनों एक बार फिर लोगों की रसोई में वापसी कर रहा है, क्योंकि आजकल लोग खाने में स्वाद के साथ-साथ सेहत को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं। मध्य प्रदेश के बघेलखंड इलाके की यह पारंपरिक डिश देखने में भले ही सादी लगे, लेकिन इसका चटपटा स्वाद इसे बाकी नाश्तों से अलग खड़ा करता है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे तेल में तला नहीं जाता, बल्कि भाप की मदद से पकाया जाता है, इसलिए तला-भुना खाने से बचना चाहने वालों के लिए यह एक शानदार विकल्प बन जाता है।

क्यों कहा जाता है इसे मोमोज का बड़ा भाई

बनावट और बनाने के तरीके में फरा की मोमोज से काफी समानता दिखती है, यही वजह है कि स्थानीय बोलचाल में इसे कई बार बड़े आकार का मोमोज भी कह दिया जाता है। सीधी की रसोइया प्रियंका सिंह के मुताबिक, यह डिश चावल के आटे में चना दाल की भरावन भरकर तैयार की जाती है और इसमें तेल की मात्रा बेहद कम रखी जाती है, इसलिए यह पेट पर भी हल्की रहती है। यही कारण है कि बघेलखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इसे भी सुबह के जलपान या रात के हल्के भोजन के तौर पर लोग बड़े चाव से खाते हैं।

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आटा गूंथने से लेकर भरावन तैयार करने तक

फरा बनाने की शुरुआत चावल के आटे से होती है। इसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर गुनगुने पानी की सहायता से थोड़ा सख्त आटा गूंथा जाता है, जिसे करीब 15 मिनट तक ढककर अलग रख दिया जाता है ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। इसी दौरान भरावन तैयार करने के लिए पहले से भिगोई गई चना दाल को दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, जीरा और नमक डालकर बारीक कटा हरा धनिया मिक्स किया जाता है, जिससे एक खुशबूदार भरावन तैयार हो जाती है। तैयार आटे से छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्के हाथों से बेला जाता है और बीच में यही दाल की भरावन भरकर किनारों को अच्छी तरह बंद कर दिया जाता है, ताकि पकाते वक्त भरावन बाहर न निकल पाए।

भाप में पकने के बाद तड़के का कमाल

लोइयों में भरावन भरने के बाद इन्हें 15 से 20 मिनट तक भाप में पकने के लिए रखा जाता है, जिससे वे नरम हो जाते हैं और उनका स्वाद पूरी तरह खुल उठता है। असली मजा हालांकि इसके ऊपर लगने वाले हल्के तड़के में छिपा है। भाप में पकने के बाद फरा को तवे पर हल्के सरसों तेल और जीरे के छौंक में हल्का सेंक दिया जाता है, जिससे यह बाहर से थोड़ा कुरकुरा और अंदर से एकदम मुलायम बना रहता है और इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।

किसके साथ परोसें और क्यों बन रहा है यह हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा

स्वाद बढ़ाने के लिए फरा को अक्सर हरी धनिया-पुदीने की चटनी के साथ परोसा जाता है, तो कहीं इसे टमाटर की हल्की खट्टी-मीठी चटनी संग भी बड़े चाव से खाया जाता है। कम तेल का इस्तेमाल, पौष्टिक सामग्री और बनाने की आसान विधि, इन्हीं वजहों से फरा अब सिर्फ एक पुराना पारंपरिक व्यंजन भर नहीं रह गया, बल्कि सेहत के प्रति जागरूक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।

सवाल-जवाब

फरा क्या है?
फरा मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र की एक पारंपरिक भाप में पकने वाली डिश है, जो चावल के आटे और चना दाल की भरावन से बनाई जाती है।
क्या फरा को तेल में तला जाता है?
नहीं, फरा को तेल में तला नहीं जाता, बल्कि इसे पूरी तरह भाप में पकाया जाता है, जिससे यह हेल्दी माना जाता है।
फरा की भरावन में क्या-क्या डाला जाता है?
भरावन में भिगोई और दरदरी पिसी चना दाल के साथ अदरक-लहसुन, हरी मिर्च, जीरा, नमक और बारीक कटा हरा धनिया मिलाया जाता है।
फरा को भाप में पकने में कितना समय लगता है?
तैयार फरों को करीब 15 से 20 मिनट तक भाप में पकाया जाता है।
फरा को किसके साथ खाया जाता है?
फरा को आमतौर पर हरी धनिया-पुदीने की चटनी या टमाटर की हल्की खट्टी-मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है।
फरा और मोमोज में क्या फर्क है?
दोनों भाप में पकते हैं, लेकिन फरा चावल के आटे और चना दाल की भरावन से बनता है और आकार में बड़ा होता है, इसलिए इसे मोमोज का बड़ा भाई भी कहा जाता है।
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