साल 2026 में कब है गणेश चतुर्थी, जानिए महाराष्ट्र के अलावा देश के 8 राज्यों में कैसे मनाई जाती है बप्पा की आराधनाअजमेर के खोड़ा गणेश मंदिर का है अनोखा इतिहास, तालाब के पास ऐसे प्रकट हुई थी प्रतिमाग्लोबल साउथ क्या है और ब्रिक्स देशों के लिए इसकी मांगें क्यों हैं इतनी अहम?मेष, मीन और कुंभ पर शनि की साढ़ेसाती 2026: जानिए किसे मिलेगी राहत और किसकी बढ़ेंगी मुश्किलेंबरसात के मौसम में कूलर से आ रही है बदबू, इन आसान घरेलू उपायों से घर को करें महकाने वालामूलांक 4 राशिफल 13 सितंबर 2026: छोटी अड़चनों को न करें नजरअंदाज, समझदारी और संयम से सुलझाएं दिनभर के कामकर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी सीजीएल 2026 के लिए शेड्यूल जारी किया, परीक्षा नियमों में बड़े बदलावरांची में आज 12 घंटे नहीं मिलेगा पानी, हटिया पाइपलाइन की मरम्मत के कारण इन इलाकों में सप्लाई ठपलाइव: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में परमाणु संकट और संघर्ष की बढ़ती आशंकाओं पर वैश्विक नेताओं की चिंतादार्जिलिंग की रितु चौधरी कैसे बनीं 'परदेस गर्ल' महिमा चौधरी, जानें एक हादसे ने कैसे बदली उनकी किस्मत
काठमांडू को क्यों कहते हैं मोमो का गढ़ और हर दिन इसे खाने के क्या हैं सेहत संबंधी खतरेखानपान
30 जुल॰ 2026, 2:06 am (45 दिन पहले)· 2

काठमांडू को क्यों कहते हैं मोमो का गढ़ और हर दिन इसे खाने के क्या हैं सेहत संबंधी खतरे

नेपाल की राजधानी काठमांडू को पूरी दुनिया में मोमो का गढ़ माना जाता है, लेकिन आहार में मैदे और अधिक तेल वाले मोमो का हर दिन सेवन पाचन तंत्र और पोषण संतुलन को नुकसान पहुंचा सकता है।

दक्षिण एशिया में स्ट्रीट फूड के दीवानों के बीच मोमो ने एक खास जगह बना ली है। भारत, नेपाल और तिब्बत जैसे विभिन्न देशों में यह व्यंजन बेहद लोकप्रिय हो चुका है। चाहे भाप में पके हुए स्टीम्ड मोमो हों, कुरकुरे फ्राइड मोमो हों, तीखे चिली मोमो हों या तंदूरी मोमो, हर प्रकार का स्वाद लोगों को लुभाता है। दुनिया के तमाम शहरों के बीच नेपाल की राजधानी काठमांडू को सर्वसम्मति से मोमो का गढ़ यानी मोमो कैपिटल माना जाता है। लेकिन इस स्वाद के बीच यह जानना जरूरी है कि हर दिन इसका सेवन शरीर पर क्या प्रभाव डालता है।

काठमांडू की सांस्कृतिक पहचान और मोमो के अनूठे स्वाद

नेपाल की राजधानी काठमांडू को दुनिया भर में मोमो की राजधानी के रूप में जाना जाता है। इस शहर की गलियों में स्थित छोटे-बड़े स्टॉल से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक, हर जगह मोमो की विविधता देखने को मिलती है। काठमांडू में मोमो की इस अनूठी पहचान के पीछे तिब्बती और नेवारी खान-पान की ऐतिहासिक परंपराएं शामिल हैं। इन दोनों संस्कृतियों के संगम ने यहां के मोमो को एक विशिष्ट स्वाद प्रदान किया है।

ये भी पढ़ें

काठमांडू आने वाले भोजन प्रेमियों को यहां कई प्रकार के मोमो का आनंद लेने का अवसर मिलता है। इनमें पारंपरिक स्टीम्ड मोमो के अलावा मसालेदार झोल में परोसे जाने वाले झोल मोमो, एक तरफ से सिके हुए कोथे मोमो, मसालेदार चिली मोमो और गहरे तले हुए फ्राइड मोमो प्रमुख हैं। यही कारण है कि दुनिया भर से पर्यटक और स्वाद के शौकीन विशेष रूप से इन व्यंजनों का अनुभव करने के लिए काठमांडू की यात्रा करते हैं।

रोजाना मोमो खाने से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान

स्वाद में बेहतरीन होने के बावजूद, रोजाना मोमो का सेवन स्वास्थ्य के लिए समस्याएं खड़ी कर सकता है। मोमो की बाहरी परत को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से मैदे का उपयोग किया जाता है। नियमित रूप से मैदे का सेवन करने से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है और यह पाचन क्रिया पर नकारात्मक असर डालता है। इसके अलावा, फ्राइड और चिली मोमो को बनाने में अत्यधिक तेल का प्रयोग होता है, जिससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और वसा का संचय होता है।

इसके साथ ही, मोमो के साथ परोसी जाने वाली तीखी चटनी और सॉस में नमक की मात्रा काफी अधिक होती है। बहुत अधिक नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि मोमो की फिलिंग में पर्याप्त मात्रा में हरी सब्जियां, दालें या गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन शामिल न हो, तो इसे एक संतुलित और पौष्टिक आहार नहीं माना जा सकता है।

सेहतमंद तरीके से मोमो खाने के जरूरी सुझाव

यदि आप मोमो के शौकीन हैं और सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना इसका स्वाद लेना चाहते हैं, तो कुछ व्यावहारिक बदलाव किए जा सकते हैं

  • तले हुए मोमो से बचें: फ्राइड या चिली मोमो की तुलना में हमेशा भाप में पके स्टीम्ड मोमो का चयन करें ताकि तेल की मात्रा कम रहे।
  • पौष्टिक फिलिंग चुनें: मोमो के अंदर ताजी सब्जियों, पनीर अथवा दालों से तैयार प्रोटीन युक्त सामग्री का उपयोग करें।
  • घरेलू तैयारी: घर पर मोमो बनाते समय मैदे की परत, तेल और चटनी में नमक की मात्रा को नियंत्रित रखें।
  • सुलझा हुआ संतुलन: मोमो को रोजमर्रा के मुख्य भोजन के रूप में खाने के बजाय संतुलित खान-पान के साथ कभी-कभार ही खाएं।

सवाल-जवाब

दुनिया की मोमो कैपिटल किस शहर को कहा जाता है?
नेपाल की राजधानी काठमांडू को दुनिया की मोमो कैपिटल कहा जाता है।
काठमांडू में मोमो की कौन-कौन सी किस्में प्रसिद्ध हैं?
काठमांडू में स्टीम्ड, झोल, कोथे, चिली और फ्राइड मोमो की विविध किस्में मिलती हैं।
रोजाना मोमो खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
रोजाना मैदा खाने से पाचन खराब हो सकता है, जबकि तले हुए मोमो और नमकीन चटनी से कैलोरी, फैट और सोडियम की मात्रा बढ़ती है।
मोमो को सेहतमंद कैसे बनाया जा सकता है?
फ्राइड की बजाय स्टीम्ड मोमो चुनें, फिलिंग में ताजी सब्जियां या पनीर डालें और इसे कभी-कभार ही खाएं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR