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बिना लहसुन-प्याज के ऐसे बनाएं कुरकुरा साबूदाना वड़ा, जानें कोडरमा की राधिका प्रजापति से सही तरीकाखानपान
18 अक्तू॰ 2026, 11:08 pm (11 दिन पहले)· 1

बिना लहसुन-प्याज के ऐसे बनाएं कुरकुरा साबूदाना वड़ा, जानें कोडरमा की राधिका प्रजापति से सही तरीका

उपवास और सात्विक खानपान के लिए साबूदाना वड़ा एक पसंदीदा विकल्प है। कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति ने बताया कि सही विधि अपनाकर इसे बाहर से कुरकुरा और अंदर से बेहद नरम कैसे बनाया जा सकता है।

उपवास अथवा त्योहारों के मौकों पर जब कुछ चटपटा, जायकेदार और झटपट तैयार होने वाला व्यंजन बनाने की बात आती है, तब साबूदाना वड़ा लोगों की पहली पसंद बन जाता है। साबूदाना और उबले आलू के मेल से बनने वाला यह पारंपरिक पकवान बाहर से करारा और भीतर से अत्यंत कोमल होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लहसुन और प्याज का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता, जिसके चलते व्रत रखने वाले श्रद्धालु और सात्विक आहार पसंद करने वाले परिवार इसे बड़े चाव से खाते हैं।

कम सामग्री में तैयार होता है लजीज नाश्ता

घरेलू स्तर पर इस लजीज व्यंजन को तैयार करने की बारीकियाँ साझा करते हुए कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति ने बताया कि इसे बनाने के लिए किसी दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं पड़ती। रसोई में सामान्य रूप से उपलब्ध साबूदाना, आलू और चुनिंदा पारंपरिक मसालों की मदद से इसे बेहद कम समय में पकाया जा सकता है। ताजी हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसे जाने पर इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है, और इसे चखने वाला हर व्यक्ति इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहता।

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साबूदाना भिगोने और आलू तैयार करने का नियम

राधिका प्रजापति के अनुसार, बेहतरीन वड़े बनाने की शुरुआत साबूदाने की सही तैयारी से होती है। सबसे पहले एक कप साबूदाना लें और उसे पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे तीन से चार घंटे के लिए पानी में फूलने के लिए छोड़ दें। जब साबूदाना पूरी तरह फूल जाए, तब उसे एक छलनी में डालकर उसका सारा अतिरिक्त पानी छानकर निकाल लें।

इस प्रक्रिया में यह विशेष सावधानी बरतनी चाहिए कि साबूदाने में नमी या पानी की अधिकता न रहे। यदि साबूदाने में ज्यादा पानी छूट जाता है, तो पूरा मिश्रण ढीला पड़ जाता है, जिससे तलते समय वड़ों के फटने या तेल में बिखरने का खतरा रहता है। इसके साथ ही चार से पांच मध्यम आकार के आलू उबाल लें। जब आलू उबल जाएं, तो उनका छिलका उतारकर उन्हें बहुत अच्छी तरह मैश कर लें। आलू को मसलते समय यह ध्यान रखें कि उसमें कोई बड़ी गांठ या गुठली न बचे, ताकि आलू और साबूदाने का एकसार मिश्रण सरलता से तैयार हो सके और वड़ों को मनचाहा आकार देने में कोई परेशानी न आए।

सब्जियों और मसालों का संतुलन

वड़े के जायके को और अधिक चटपटा बनाने के लिए कुछ अन्य सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए आधी शिमला मिर्च, अदरक का एक टुकड़ा, पांच से छह लाल मिर्च और थोड़ा हरा धनिया पत्ता लें। इन सभी सामग्रियों को चाकू से बारीक काटकर अलग रख लें। जो लोग तीखा कम या ज्यादा खाना पसंद करते हैं, वे लाल मिर्च की मात्रा अपनी रुचि के अनुसार तय कर सकते हैं।

अब एक बड़े फैले हुए बर्तन में भीगा हुआ साबूदाना और मैश किया हुआ आलू डालें। इसी बर्तन में एक चम्मच भुना हुआ जीरा, कटी हुई लाल मिर्च, कुटा हुआ अदरक तथा बारीक कटा हरा धनिया पत्ता मिलाएं। इसके बाद स्वादानुसार नमक, हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और पिसी हुई काली मिर्च का पाउडर इसमें शामिल करें।

इन सभी सामग्रियों को हाथों से अच्छी तरह मिलाते हुए एकसार मिश्रण बना लें। यदि मिश्रण में नमी कुछ अधिक महसूस हो, तो उसे थोड़ी देर के लिए खुला छोड़ दें ताकि अतिरिक्त गीलापन कम हो जाए। जब मिश्रण पूरी तरह संतुलित हो जाए, तब दोनों हथेलियों पर थोड़ा सा तेल लगाएं और मिश्रण से छोटे-छोटे गोल अथवा चपटे वड़े तैयार कर लें।

तलने का सही तरीका और परोसने का अंदाज

वड़ों को आकार देने के बाद तलने का चरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। एक कड़ाही में पर्याप्त तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म करें। जब तेल सही तापमान पर पहुंच जाए, तब एक-एक करके वड़ों को सावधानीपूर्वक कड़ाही में डालें। वड़ों को हमेशा मध्यम आंच पर ही तलना चाहिए। मध्यम आंच पर पकाने से वड़े बाहर से सुनहरे और कुरकुरे बनते हैं, जबकि उनका अंदरूनी हिस्सा भी पूरी तरह पक जाता है।

तलते समय वड़ों को बीच-बीच में उलटते-पलटते रहें, जिससे वे चारों तरफ से एक समान रूप से सिक सकें। जब उनका रंग आकर्षक सुनहरा भूरा हो जाए, तब उन्हें कड़ाही से निकालकर प्लेट में रख लें। प्लेट में पहले से टिश्यू पेपर बिछाया जा सकता है, जिससे वड़ों का अतिरिक्त तेल सोख लिया जाए। इस आसान विधि से बिना किसी झंझट के घर पर ही कुरकुरे साबूदाना वड़े तैयार हो जाते हैं। इन्हें ताजी हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें। यदि चटनी में अधिक तीखापन पसंद हो, तो अपनी पसंद के मुताबिक हरी मिर्च और धनिए की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

सवाल-जवाब

साबूदाना को कितनी देर भिगोना चाहिए?
साबूदाना को अच्छी तरह धोकर तीन से चार घंटे के लिए पानी में फूलने के लिए छोड़ना चाहिए।
वड़ा तलते समय टूटे नहीं, इसके लिए क्या सावधानी रखें?
साबूदाने का अतिरिक्त पानी छलनी से पूरी तरह निकाल लें और आलू को बिना गांठ के मैश करें ताकि मिश्रण गीला न रहे।
इस रेसिपी में किन मसालों और सब्जियों का प्रयोग हुआ है?
इसमें आलू और साबूदाने के अलावा शिमला मिर्च, अदरक, लाल मिर्च, धनिया पत्ता, भुना जीरा, नमक, हल्दी, धनिया, जीरा और काली मिर्च पाउडर का उपयोग किया गया है।
साबूदाना वड़ा को किस आंच पर तलना चाहिए?
वड़ों को हमेशा मध्यम आंच पर तलना चाहिए ताकि वे बाहर से सुनहरे और अंदर तक अच्छी तरह पक जाएं।
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टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·10 दिन पहले

बिना प्याज-लहसुन के तो ठीक है, पर शिमला मिर्च और लाल मिर्च सात्विक व्रत में कौन खाता है भई?

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·10 दिन पहले

बिना लहसुन-प्याज के व्रत में ये साबूदाना वड़े बहुत अच्छे लगते हैं। राधिका जी की यह विधि वाकई बहुत आसान है।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·10 दिन पहले

स्नेहा जी, बिल्कुल सही कहा आपने! पिछले नवरात्र में मैंने भी बिना प्याज-लहसुन के ऐसे ही वड़े बनाए थे, घर में सबको बहुत पसंद आए थे।

Neha Verma@neha-verma·10 दिन पहले

पिछले नवरात्र में जब मैंने साबूदाना वड़े बनाए थे, तो पानी ज़्यादा होने की वजह से वे कड़ाही में ही बिखर गए थे। राधिका जी की यह टिप बहुत काम की है कि साबूदाने को छानकर सारा पानी निकाल लेना चाहिए, अबकी बार मेरे वड़े भी एकदम परफेक्ट और कुरकुरे बनेंगे।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·10 दिन पहले

नेहा जी, आपकी बात सही है! वैसे राधिका जी ने शिमला मिर्च और लाल मिर्च डाली है, क्या इसमें व्रत वाली हरी मिर्च नहीं डाल सकते?

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