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बुरहानपुर के बाजारों में पहुंचा शेरनी फल, चोली के दानों संग तैयार करें पारंपरिक खट्टी-मीठी सब्जीखानपान
3 अक्तू॰ 2026, 9:25 am (26 दिन पहले)· 1

बुरहानपुर के बाजारों में पहुंचा शेरनी फल, चोली के दानों संग तैयार करें पारंपरिक खट्टी-मीठी सब्जी

बरसात शुरू होते ही निमाड़ के बुरहानपुर में मौसमी शेरनी फल की मांग बढ़ गई है, जिसे चोली के दानों के साथ पकाकर पारंपरिक और टिकाऊ सब्जी बनाई जाती है।

बरसात की शुरुआत होते ही निमाड़ अंचल के बुरहानपुर जिले में दैनिक खान-पान की रंगत पूरी तरह बदल जाती है। मानसूनी फुहारों के बीच स्थानीय मंडियों और हाट-बाजारों में कई दुर्लभ मौसमी खाद्य सामग्रियां दस्तक देने लगती हैं। इन्हीं खास चीजों में शेरनी फल शामिल है, जो इस इलाके की अनूठी पहचान माना जाता है। स्थानीय नागरिक इसे केवल ताजे मौसमी फल की तरह काटकर ही नहीं खाते, बल्कि घरों में इसकी विशेष पारंपरिक सब्जी भी तैयार की जाती है। अपने तीखे, खट्टे और हल्के मीठे जायके के लिए मशहूर यह व्यंजन निमाड़ी पाक शैली का एक प्रमुख हिस्सा है।

चोली के दानों के साथ बेजोड़ मेल

शेरनी फल की सब्जी की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष संयोजन है। इसे पकाने के लिए चोली के दानों का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है। फुला बाई के अनुसार, फल का प्राकृतिक खट्टा-मीठा स्वाद जब चोली के दानों के साथ घुलता है, तो यह व्यंजन को एक अलग ही गहराई और समृद्ध स्वाद देता है। इसी लजीज स्वाद की वजह से बारिश के दिनों में यह फल मंडियों में आते ही तुरंत बिक जाता है। घर के बड़े-बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक इस व्यंजन को चाव से खाते हैं। इसके अलावा, इस सब्जी का एक व्यावहारिक गुण यह भी है कि तैयार होने के बाद इसे लगभग दो दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे इसका स्वाद खराब नहीं होता।

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सब्जी के लिए जरूरी बुनियादी सामग्री

इस देहाती और पारंपरिक व्यंजन को बनाने के लिए किसी जटिल मसाले की आवश्यकता नहीं पड़ती। रसोई में रोजाना काम आने वाली साधारण चीजों से ही इसे झटपट तैयार किया जा सकता है। इस विधि के लिए प्रमुख रूप से ताजे शेरनी फल, चोली के दाने, राई, जीरा, प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट, स्वादानुसार नमक और खाना पकाने का तेल चाहिए होता है।

बनाने की आसान और पारंपरिक विधि

सब्जी पकाने की शुरुआत शेरनी फल को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ करने और टुकड़ों में काटने से होती है। इसके बाद एक कड़ाही में तेल डालकर गर्म किया जाता है। गर्म तेल में राई और जीरे का छौंक लगाया जाता है। जब मसाले चटकने लगें, तब इसमें बारीक कटा प्याज शामिल किया जाता है। प्याज को हल्का भूनने के बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर मसाले को अच्छी खुशबू आने तक पकाया जाता है।

मसाला भुन जाने के बाद कड़ाही में चोली के दाने और कटे हुए शेरनी फल के टुकड़े डाले जाते हैं। इसके साथ ही आवश्यकतानुसार नमक मिलाकर सभी सामग्रियों को करछी से अच्छी तरह मिला दिया जाता है। धीमी आंच पर ढककर इसे तब तक पकने दिया जाता है जब तक कि फल के टुकड़े और चोली के दाने पूरी तरह नरम न हो जाएं। अच्छी तरह पकने के बाद तैयार सब्जी को गर्मागर्म परोसा जा सकता है।

सवाल-जवाब

शेरनी फल मुख्य रूप से किस मौसम में बाजार में आता है?
शेरनी फल बारिश के मौसम में निमाड़ के बुरहानपुर की मंडियों में बिक्री के लिए उपलब्ध होता है।
शेरनी फल की सब्जी में मुख्य रूप से क्या मिलाया जाता है?
इस सब्जी को खास तौर पर चोली के दानों और साधारण खड़े मसालों के साथ मिलाकर पकाया जाता है।
इस पारंपरिक सब्जी का स्वाद कैसा होता है?
फल और चोली के दानों के मिश्रण की वजह से इस सब्जी का स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है।
पकाने के बाद यह सब्जी कितने दिनों तक सुरक्षित रह सकती है?
तैयार होने के बाद यह पारंपरिक सब्जी करीब दो दिन तक बिना खराब हुए रखी जा सकती है।
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टिप्पणियाँ 2

Priya Sharma@priya-sharma·26 दिन पहले

बरसात के मौसम में ऐसी पारंपरिक चीजें खाने का असली मजा ही अलग है। बुरहानपुर की यह शेरनी फल और चोली के दानों वाली खट्टी-मीठी सब्जी देखकर ही बचपन के दिनों की याद आ गई, जब मानसून में घर पर ऐसी ही स्थानीय चीजें बनती थीं। सबसे अच्छी बात यह है कि बिना किसी झंझट के यह दो दिन तक टिक भी जाती है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·26 दिन पहले

प्रिया जी, बात तो सही है आपकी, पर दो दिन तक बिना फ्रिज के ऐसी सब्जी रखना थोड़ा मुश्किल लगता है मुझे।

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