धार्मिक आयोजनों, पूजा पाठ और सामूहिक भोज में परोसी जाने वाली कद्दू की सब्जी का अपना एक खास स्वाद होता है। सौंफ, हींग और खड़े मसालों की खुशबू के साथ इसका हल्का खट्टा और मीठा मेल हर किसी को पसंद आता है। सात्विक परंपरा के अनुरूप इस सब्जी में प्याज या लहसुन की एक कली भी इस्तेमाल नहीं होती, जिससे इसे किसी भी उपवास, अनुष्ठान या त्योहार पर बेझिझक बनाया जा सकता है। गर्मागर्म फूली हुई पूरियों के साथ इसका संयोजन भोजन के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। घर पर पारंपरिक तरीके से यह सब्जी तैयार करना बेहद सरल है और इसे कम समय में आसानी से पकाया जा सकता है।
आवश्यक सामग्री का सही नाप
इस पारंपरिक सब्जी को तैयार करने के लिए सबसे पहले सभी सामग्रियों को सही अनुपात में जुटाना जरूरी है। इसके लिए 500 ग्राम ताजा कद्दू, 2 मध्यम टमाटर, 2 हरी मिर्च, 1 इंच अदरक का टुकड़ा और 2 बड़े चम्मच देसी घी या खाना पकाने का तेल चाहिए। मसालों में 1 चम्मच जीरा, 1 चुटकी हींग, आधा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच सौंफ पाउडर और आधा चम्मच गरम मसाला लगेगा। स्वाद को संतुलित करने के लिए स्वादानुसार नमक, 1 चम्मच गुड़ या चीनी और अंत में सजावट के लिए थोड़ा सा ताजा बारीक कटा हरा धनिया इस्तेमाल किया जाता है।
कद्दू और सब्जियों की तैयारी
सब्जी पकाने की शुरुआत कद्दू को साफ करने से होती है। 500 ग्राम कद्दू को पानी से अच्छी तरह धो लें, फिर उसका छिलका छीलकर अलग कर दें। इसके बाद कद्दू को मध्यम से छोटे चौकोर टुकड़ों में काटें। टुकड़ों का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि छोटे टुकड़े भाप में जल्दी और समान रूप से गल जाते हैं। कद्दू काटने के बाद दोनों टमाटरों को बारीक काट लें। हरी मिर्च को बारीक कतरें और अदरक के 1 इंच टुकड़े को बारीक काट कर अलग रख लें। सारी तैयारी पहले से पूरी रहने पर पकाने का काम काफी तेजी से निपटता है।
धीमी आंच पर छौंक और मसाले पकाना
गैस चूल्हे पर एक भारी तले वाली कड़ाही चढ़ाएं और उसमें 2 बड़े चम्मच देसी घी अथवा तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। घी पिघलते ही उसमें 1 चम्मच जीरा और 1 चुटकी हींग डालें। जैसे ही जीरा तड़कने लगे, उसमें बारीक कटी अदरक और कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड के लिए हल्का भूनें ताकि उनकी खुशबू तेल में समा जाए। इसके तुरंत बाद कटे हुए टमाटर डालें और मध्यम आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए पकाएं। जब टमाटर गलकर मुलायम हो जाएं, तब आंच को धीमा करें और उसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच सौंफ पाउडर और स्वादानुसार नमक मिला दें। सौंफ का पाउडर इस सब्जी को उसका विशिष्ट पारंपरिक स्वाद देता है।
कद्दू को पकाने और मैश करने का तरीका
मसाला भुन जाने के बाद कड़ाही में कद्दू के कटे हुए टुकड़े डालें। कलछी की मदद से कद्दू को मसाले के साथ अच्छी तरह उलट-पुलट करें ताकि हर टुकड़े पर मसालों की परत चढ़ जाए। इसके बाद कड़ाही को ढक्कन से ढक दें और धीमी आंच पर करीब 10 से 12 मिनट तक पकने दें। बीच-बीच में ढक्कन हटाकर सब्जी को चलाते रहें, ताकि कद्दू कड़ाही के तले में चिपककर जले नहीं। जब कद्दू पूरी तरह गल जाए, तो कलछी के पिछले हिस्से से कुछ टुकड़ों को हल्का सा दबाकर मैश कर दें। ऐसा करने से ग्रेवी गाढ़ी और लटपटी बन जाती है।
खट्टा मीठा स्वाद और अंतिम तड़का
कद्दू के मुलायम होने के बाद उसमें 1 चम्मच गुड़ या चीनी डालें और अच्छी तरह मिला लें। टमाटर के खट्टेपन और गुड़ की मिठास का मेल ही इस सब्जी की असली पहचान है। इसके बाद आधा चम्मच गरम मसाला छिड़कें और धीमी आंच पर लगभग 2 मिनट तक और पकने दें ताकि मसालों का अर्क सब्जी में पूरी तरह घुल जाए। अंत में बारीक कटा हुआ हरा धनिया ऊपर से डालें और गैस बंद कर दें। यह सात्विक सब्जी गर्मागर्म पूरियों और सूखे काले चनों के साथ परोसने के लिए पूरी तरह तैयार है।



















