दीपावली के पावन पर्व की आहट के साथ ही घरों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवानों को पकाने की रूपरेखा बनने लगी है। त्योहारों के मौसम में अक्सर बाजारों में मिलने वाली मिठाइयों में मिलावट का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिसके चलते अधिकांश परिवार घर में ही शुद्ध और पौष्टिक व्यंजन तैयार करना पसंद करते हैं। ऐसे माहौल में अगर आप अपनी रसोई में एक अनूठा और पारंपरिक जायका शामिल करना चाहते हैं, तो राजस्थान के धौलपुर का विख्यात छाछ और बूरे वाला पुआ एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में यह पारंपरिक पकवान पीढ़ियों से अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। छाछ के हल्के खट्टेपन और बूरे की मिठास का यह अद्भुत तालमेल हर उम्र के लोगों को, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, बेहद पसंद आता है। सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में न तो बहुत अधिक वक्त लगता है और न ही किसी जटिल सामग्री की दरकार होती है।
घर में रखी सीधी-सादी सामग्री से तैयार होगा व्यंजन
इस अनूठे पकवान को तैयार करने के लिए बाजार से कोई भी असामान्य या महंगी वस्तु खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली घरेलू चीजों से ही यह स्वादिष्ट व्यंजन बनकर तैयार हो जाता है। इस पारंपरिक रेसिपी के लिए मुख्य रूप से लगभग एक लीटर ताजी अथवा हल्की खट्टी छाछ की जरूरत होती है। इसके साथ ही उचित मात्रा में गेहूं का आटा, पुओं को तलने के लिए शुद्ध देसी घी और मिठास के आवरण के लिए बारीक पिसा हुआ बूरा यानी तगार होना जरूरी है। यदि आप इसके स्वाद और भीनी-भीनी महक को और अधिक समृद्ध बनाना चाहते हैं, तो इसमें बारीक कटे बादाम, काजू और पिसी हुई हरी इलायची भी मिलाई जा सकती है।
घोल तैयार करने का सही तरीका
धौलपुर की गृहणी प्रभा शर्मा के अनुसार इस व्यंजन को बनाने का तरीका बेहद सीधा और पारंपरिक है। शुरुआत में एक बड़ा और गहरा बर्तन लेकर उसमें लगभग एक लीटर छाछ डाल लें। इसके बाद छाछ में थोड़ा-थोड़ा करके आवश्यकतानुसार गेहूं का आटा मिलाना शुरू करें। आटा डालते समय चम्मच या विस्क से घोल को लगातार हिलाते रहना जरूरी है, ताकि उसमें किसी भी प्रकार की गांठें या गुठलियां न बनने पाएं। इस मिश्रण का गाढ़ापन बहुत संतुलित होना चाहिए, यानी घोल न तो अत्यधिक गाढ़ा हो और न ही बहुत ज्यादा पतला बहने वाला। जब मिश्रण एकदम एकसार तैयार हो जाए, तब इसमें दरदरे कूटे हुए काजू, बादाम और हरी इलायची को अच्छी तरह मिला दें। सूखे मेवे और इलायची का यह मिश्रण पुओं के भीतर एक मनमोहक सुगंध और कुरकुरा स्वाद भर देता है।
देसी घी में तलने और बूरे में लपेटने की विधि
मिश्रण तैयार होने के पश्चात चूल्हे पर एक भारी पेंदे वाली कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में शुद्ध देसी घी डालकर गर्म करें। घी जब अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब एक बड़े चम्मच में घोल लेकर उसे गोल आकार देते हुए कढ़ाई में सावधानीपूर्वक डालें। इस दौरान गैस की आंच को मध्यम स्तर पर ही रखें ताकि पुए भीतर तक पूरी तरह पक सकें। पुओं को दोनों किनारों से पलटते हुए तब तक तलें जब तक कि वे आकर्षक सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं। अच्छी तरह सिक जाने के बाद उन्हें घी से निकालकर एक प्लेट में रख लें। इसके साथ ही एक चौड़ी थाली में पहले से पिसा हुआ बूरा फैलाकर रखें। कढ़ाई से निकले इन गर्मागर्म पुओं को तुरंत बूरे वाली थाली में रखें और दोनों तरफ से हल्के हाथों से दबाएं। गरम होने के कारण बूरा पुओं की बाहरी परत पर बड़ी सहजता से चिपक जाता है। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए शेष बचे घोल से भी सारे पुए तैयार कर लें।
त्योहार की थाली में परोसें पारंपरिक ग्रामीण मिठास
अल्प समय और कम मेहनत में यह लाजवाब, खट्टा-मीठा और कुरकुरा पकवान पूरी तरह सजकर तैयार हो जाता है। प्रभा शर्मा के अनुसार गेहूं के साधारण आटे, छाछ, शुद्ध घी और मेवों के योग से बने इन पुओं का स्वाद बेजोड़ होता है। छाछ का प्राकृतिक खट्टापन और ऊपर से लिपटे बूरे की मिठास मिलकर ऐसा स्वाद रचते हैं जो बाजार की किसी भी महंगी मिठाई को पीछे छोड़ सकता है। इस बार दिवाली पर जब आपके घर इष्ट-मित्र और सगे-संबंधी आएं, तो उन्हें बाजार की मिलावटी मिठाइयों की जगह धौलपुर की यह देसी सौगात परोसें। यह पकवान न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध ग्रामीण खानपान परंपरा की एक जीवंत मिसाल भी पेश करता है।



















