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सरायपाली में समोसा बेचकर रमेश बेहरा ने खड़ा किया कामयाब कारोबार, रोज बिकते हैं 700 समोसेमनी
4 अक्तू॰ 2026, 10:33 pm (50 मिनट पहले)· 0

सरायपाली में समोसा बेचकर रमेश बेहरा ने खड़ा किया कामयाब कारोबार, रोज बिकते हैं 700 समोसे

महासमुंद के कुटेला चौक पर ठेला लगाने वाले रमेश बेहरा पिछले 10 वर्षों से समोसे बेच रहे हैं और अपनी खास तकनीक के दम पर रोजाना कुछ ही घंटों में 700 समोसे बेच लेते हैं।

सड़क किनारे लगने वाला एक सामान्य ठेला भी अगर स्वाद और अनुशासन के साथ संचालित किया जाए, तो वह बड़े मुनाफे वाले व्यापार में तब्दील हो सकता है। खानपान से जुड़े छोटे उद्यमों में कम लागत और सरल कार्यप्रणाली के बावजूद ग्राहकों का भरोसा जीतना सबसे अहम माना जाता है। गुणवत्ता, सही तकनीक और लगातार की गई मेहनत से सीमित संसाधनों में भी किस तरह बड़ा ग्राहक वर्ग तैयार किया जा सकता है, इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में देखने को मिलता है।

कुटेला चौक पर रोज उमड़ती है ग्राहकों की भीड़

महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले सरायपाली क्षेत्र के कुटेला चौक पर रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से अपना ठेला संचालित कर रहे हैं। इलाके में उनकी पहचान समोसा किंग के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके ठेले पर सुबह से लेकर शाम तक लोगों का आना-जाना बना रहता है। स्थिति यह है कि रोजाना करीब 700 समोसे महज कुछ ही घंटों के भीतर बिक जाते हैं। नाश्ते की तलाश में आने वाले स्थानीय निवासियों के लिए यह ठेला एक भरोसेमंद ठिकाना बन चुका है।

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धीमी आंच पर 20 मिनट तक तलने का अनोखा तरीका

रमेश बेहरा के अनुसार, उनके समोसों की लोकप्रियता किसी गोपनीय फार्मूले की बजाय पकाने की सही पद्धति पर टिकी है। उनका मानना है कि समोसा तैयार करना सरल दिख सकता है, लेकिन सही बनावट हासिल करना एक हुनर है। अत्यधिक गर्म तेल में डालने पर समोसा ऊपर से जल जाता है और भीतर से कच्चा रह जाता है। इस समस्या से बचने के लिए वे हर समोसे को मध्यम आंच पर लगभग 20 मिनट तक तलते हैं।

लंबे समय तक धीमी आंच पर पकने के कारण समोसे बाहर से बेहद खस्ता और अंदर से पूरी तरह पककर तैयार होते हैं। भरावन के लिए आलू के मिश्रण में अमचूर, हल्का गरम मसाला और धनिया पाउडर का संतुलित तड़का लगाया जाता है। यही स्वाद और निरंतरता ग्राहकों को बार-बार उनके पास खींच लाती है।

20 रुपए की प्लेट और पारिवारिक हुनर की विरासत

रमेश अपने ग्राहकों को 20 रुपए की प्लेट में तीन बड़े समोसे परोसते हैं। इस थाली में समोसों के साथ छोले, तीखी और मीठी चटनी के अलावा मिर्च और लहसुन से बनी विशेष झटपट चटनी भी शामिल होती है। ग्राहकों का मानना है कि इस स्वाद के पीछे मसालों के सही अनुपात के साथ-साथ ईमानदारी और अपनापन भी शामिल है।

समोसा बनाने का यह हुनर रमेश को अपने पिता से विरासत में मिला, जो पहले इसी जगह पर ठेला लगाते थे। पिता द्वारा शुरू किए गए इस काम को रमेश ने आधुनिक व्यावसायिक समझ और स्वच्छता के साथ आगे बढ़ाया है। एक दशक की निरंतरता के बाद आज उनका ठेला सिर्फ एक नाश्ते की दुकान न रहकर सरायपाली का एक लोकप्रिय स्थानीय ब्रांड बन चुका है।

सवाल-जवाब

रमेश बेहरा का समोसा ठेला कहां स्थित है?
रमेश बेहरा का समोसा ठेला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरायपाली के कुटेला चौक पर स्थित है।
रमेश बेहरा को स्थानीय लोग किस नाम से जानते हैं?
सरायपाली के स्थानीय लोग रमेश बेहरा को 'समोसा किंग' के नाम से जानते हैं।
रमेश बेहरा के ठेले पर रोजाना कितने समोसे बिकते हैं?
उनके ठेले से रोजाना कुछ ही घंटों के भीतर करीब 700 समोसे बिक जाते हैं।
समोसे को खस्ता बनाने के लिए रमेश कौन सी तकनीक अपनाते हैं?
वे समोसों को तेज आंच पर तलने के बजाय मध्यम आंच पर करीब 20 मिनट तक धीमी गति से तलते हैं।
रमेश बेहरा के यहां समोसे की एक प्लेट की क्या कीमत है?
एक प्लेट की कीमत 20 रुपए है, जिसमें तीन बड़े समोसे, छोले, तीखी-मीठी चटनी और मिर्च-लहसुन की चटनी दी जाती है।
रमेश बेहरा यह समोसा व्यवसाय कितने समय से चला रहे हैं?
रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से कुटेला चौक पर यह समोसा ठेला संचालित कर रहे हैं।
रमेश ने समोसा बनाने का हुनर किससे सीखा?
रमेश ने समोसा बनाने का हुनर अपने पिता से सीखा, जो पहले इसी स्थान पर ठेला लगाते थे।
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