मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र की पारंपरिक रसोई में कई ऐसे सादे लेकिन बेहद स्वादिष्ट व्यंजन बनते हैं, जो रोजमर्रा के भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय व्यंजन है वहां की पारंपरिक सूखी चटनी। अपने तीखे और तीखे-चटपटे स्वाद की वजह से यह चटनी हर उम्र के लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में न तो बहुत ज्यादा समय लगता है और न ही किसी विशेष या महंगी सामग्री की जरूरत पड़ती है। घर की सामान्य रसोई में हमेशा उपलब्ध रहने वाली बुनियादी चीजों से ही इसे मिनटों में तैयार किया जा सकता है। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई इसे थाली में बड़े चाव से शामिल करता है।
चटनी बनाने की जरूरी सामग्री
इस पारंपरिक सूखी चटनी को तैयार करने के लिए बहुत सीमित और साधारण सामग्री की आवश्यकता होती है। इसके लिए मुख्य रूप से लहसुन की कलियां और प्याज लिया जाता है। इसके अलावा तीखेपन के लिए सूखी लाल मिर्च, स्वादानुसार सादा नमक और जरूरत के मुताबिक तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी सामग्रियों का सही तालमेल ही इस चटनी को इसका खास ग्रामीण स्वाद प्रदान करता है।
बनाने की आसान पारंपरिक विधि
चटनी तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल और सीधी है। सबसे पहले लहसुन की कलियों को छीलकर साफ कर लिया जाता है और प्याज को भी काटकर तैयार रखा जाता है। इसके बाद साफ किए गए लहसुन और प्याज को सूखी लाल मिर्च के साथ मिलाकर पारंपारिक तरीके से कूट लिया जाता है या फिर सिलबट्टे या मिक्सी में दरदरा पीस लिया जाता है। जब यह मिश्रण अच्छी तरह एकसार हो जाए, तब इसमें स्वादानुसार नमक और आवश्यकतानुसार थोड़ा तेल मिलाया जाता है। तेल मिलाने के बाद पूरे मिश्रण को अच्छी तरह फेंटकर मिला लिया जाता है, जिससे तेल और मसाले आपस में पूरी तरह रच-बस जाएं।
गाढ़ापन और परोसने का खास तरीका
इस चटनी की सबसे प्रमुख पहचान इसका सूखापन है। इसे अन्य चटनियों की तरह बिल्कुल भी पतला या गीला नहीं रखा जाता, बल्कि इसे सूखा और गाढ़ा ही बनाया जाता है। यही गाढ़ापन और दरदरापन इसकी असली खासियत माना जाता है। पूरी तरह तैयार होने के बाद इसे गरमागरम ताजी रोटी, ज्वार या बाजरे की भाकरी, तिकोने पराठे अथवा रोज के सादे भोजन के साथ थाली में परोसा जाता है। खासकर बरसात के मौसम में जब मौसम सुहावना होता है, तब गरमागरम खाने के साथ इस तीखी चटनी की जुगलबंदी खाने वालों को बेहद पसंद आती है।
सफर के लिए अनुकूल और सांस्कृतिक पहचान
निमाड़ की इस सूखी चटनी की एक व्यावहारिक खूबी यह भी है कि इसे कहीं भी आसानी से साथ ले जाया जा सकता है। चूंकि इसमें पानी की मात्रा न के बराबर होती है और यह सूखी रहती है, इसलिए यह जल्दी खराब नहीं होती और लोग लंबी यात्राओं के दौरान भी इसे अपने भोजन के डिब्बे में साथ रखते हैं। बुरहानपुर सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र के गांवों और कस्बों में आज भी कई परिवार आधुनिक तरीकों के बजाय इसी पारंपरिक विधि से यह चटनी तैयार करते हैं। बुरहानपुर की यह चटपटी चटनी सिर्फ स्वाद का जरिया नहीं है, बल्कि यह निमाड़ की समृद्ध पारंपरिक खानपान संस्कृति और सादगी भरे जीवन की जीवंत झलक भी पेश करती है।


















