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छत्तीसगढ़ की देसी मखना भाजी-दाल: सिर्फ चंद मसालों में बनकर तैयार, सेहत और स्वाद का संतुलित जोड़खानपान
15 जून 2026, 6:18 am (46 दिन पहले)· 1

छत्तीसगढ़ की देसी मखना भाजी-दाल: सिर्फ चंद मसालों में बनकर तैयार, सेहत और स्वाद का संतुलित जोड़

जांजगीर-चांपा के जर्वे गांव से निकलकर शहरों की थाली तक पहुंची मखना भाजी और दाल की यह पारंपरिक रेसिपी कम समय में बनती है और प्रोटीन, फाइबर व विटामिन से भरपूर होती है।

छत्तीसगढ़ के गांवों की रसोई आज भी हरी देशी भाजियों के बिना अधूरी मानी जाती है। यहां की खानपान परंपरा में मौसमी और स्थानीय भाजियों को खास दर्जा हासिल है, और इन्हीं में एक नाम है मखना भाजी का। जब इसे दाल के साथ मिलाकर पकाया जाता है, तो एक ऐसा व्यंजन तैयार होता है जो जितना सादा है, उतना ही पौष्टिक भी। ग्रामीण अंचलों में यह डिश पीढ़ियों से बड़े चाव से बनाई जाती रही है और अब धीरे-धीरे शहरी घरों में भी अपनी जगह बना रही है।

क्यों खास है यह व्यंजन

इस रेसिपी की सबसे बड़ी खूबी इसका सादापन है। इसे बनाने के लिए ढेर सारे मसालों की जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी इसका देसी स्वाद ऐसा होता है कि लोग बार-बार खाना चाहते हैं। मखना भाजी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व और दाल से मिलने वाला प्रोटीन मिलकर इसे एक संतुलित आहार बना देते हैं। कम वक्त में तैयार होने वाली यह डिश व्यस्त दिनचर्या वाले लोगों के लिए भी बेहद मुफीद है। जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव की महिलाएं इसे वर्षों से बनाती आ रही हैं, और बिलासपुर जिले के अन्नू सूर्यकांत ने इसे बनाने का आसान तरीका साझा किया है।

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भाजी और दाल की तैयारी

शुरुआत ताजी भाजी से होती है। सबसे पहले भाजी को कई बार पानी में अच्छी तरह धोकर साफ कर लिया जाता है, ताकि उसमें मिट्टी या धूल न रह जाए। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अलग रख दिया जाता है, जिससे पकाते समय आसानी रहे।

दाल की बारी इसके बाद आती है। इस रेसिपी में अरहर, मूंग या मसूर — तीनों में से कोई भी दाल इस्तेमाल की जा सकती है। दाल को साफ पानी से धोकर हल्का नरम होने तक उबाला जाता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि दाल पूरी तरह गलने से पहले ही उसे आंच से उतार लिया जाता है, क्योंकि बाद में जब यह भाजी के साथ पकती है तो उसका स्वाद और निखर जाता है।

देसी तड़का और आखिरी पकाव

अब असली स्वाद का राज आता है — तड़का। एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें सूखी लाल मिर्च तथा कुटा हुआ लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें। यही पारंपरिक तड़का भाजी को उसकी खास सुगंध और गांव जैसा देसी स्वाद देता है।

तड़का तैयार होते ही उसमें मखना भाजी डाल दें और कुछ मिनट तक अच्छी तरह चलाते रहें। फिर इसमें पहले से उबली हुई दाल और स्वादानुसार नमक मिला दें। इस मिश्रण को करीब 10 मिनट तक पकने दें। जैसे ही भाजी और दाल आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाएं, गैस बंद कर दें। आपकी मखना भाजी-दाल परोसने के लिए तैयार है।

पोषण का खजाना एक ही थाली में

स्वाद के साथ-साथ यह व्यंजन सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद है। मखना भाजी और दाल के इस मेल में फाइबर, विटामिन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं, जो इसे एक भरपूर और पौष्टिक भोजन बना देते हैं।

गांव की रसोई से शहर की थाली तक

जर्वे गांव में यह रेसिपी वर्षों से घर-घर की पहचान रही है। लेकिन समय बदलने के साथ अब यह पारंपरिक व्यंजन ग्रामीण इलाकों की सीमा लांघकर शहरों के लोगों की पसंद भी बनता जा रहा है। कम समय में तैयार होने वाली, देसी तड़के की महक से भरपूर और पोषण से लबरेज मखना भाजी-दाल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई की एक बेहतरीन मिसाल है — एक ऐसी डिश जिसमें स्वाद और सेहत दोनों साथ-साथ चलते हैं।

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