पहाड़ों की सैर पर निकले हों या देहरादून की सड़कों पर घूम रहे हों, पेट की भूख और जेब का बजट — दोनों का ख्याल रखने वाले ढाबे यहां कम नहीं हैं। शहर और उसके आस-पास कुछ ऐसे ठिकाने हैं जहां पंजाबी खाने का असली स्वाद बिना ज़्यादा खर्च किए चखा जा सकता है। किसी की पहचान सालों पुरानी रेहड़ी से बनी है, तो किसी ने किसी मशहूर अभिनेता या किसी दूसरे शहर के नाम को अपनी थाली से जोड़ लिया है। आइए, ऐसे ही पांच ढाबों की सैर करते हैं।
तुहाड़ा ढाबा: 35 रुपये से शुरू होती है थाली
अगर मिस्री रोटी, साग, खीर और लस्सी का स्वाद चखना हो तो 'तुहाड़ा ढाबा' एक बढ़िया विकल्प है। मालिक त्रिलोक सिंह बताते हैं कि उनके छोटे भाई कुलविंदर सिंह ने आज से 15 साल पहले देहरादून मंडी में इस ढाबे की नींव रखी थी। यहां का खाना लोगों को इतना भाया कि बाद में करणपुर में 'नानक दरबार ढाबा' के नाम से एक और ठिकाना खोल दिया गया। खास बात यह है कि यहां 20 तरह की थालियां मिलती हैं, जिनमें 4 खास तौर पर स्टूडेंट्स के लिए तैयार की गई हैं। इन स्टूडेंट थालियों की कीमत महज 35 रुपये से शुरू होकर 70 रुपये तक जाती है, जबकि सबसे महंगी थाली का रेट 135 रुपये है। त्रिलोक सिंह के मुताबिक थाली का दाम इस बात पर तय होता है कि उसमें क्या-क्या परोसा गया है। राजमा, छोले, कढ़ी, नान, मिस्री रोटी, साग, खीर और लस्सी जैसी पंजाबी पकवानों की लंबी फेहरिस्त यहां मौजूद है।
मुखिया ढाबा: घंटों पकी दाल मखनी और लच्छा परांठे का मेल
मसूरी की वादियों की तरफ जा रहे हों या देहरादून की सड़कें नाप रहे हों, 'मुखिया ढाबा' का दाल मखनी और कड़ाही पनीर के साथ तंदूरी लच्छा परांठे का कॉम्बिनेशन सफर को यादगार बना देता है। यहां दाल मखनी को धीमी आंच पर घंटों चढ़ाए रखा जाता है, जिससे उसका गाढ़ापन और मखमली स्वाद हर निवाले में महसूस होता है। ताज़ा पनीर और मसालों के सही संतुलन से बनी कड़ाही पनीर भूख को और बढ़ा देती है। इन ग्रेवी वाली सब्ज़ियों का असली आनंद तब है जब इन्हें गरमा-गरम, खस्ता और परतदार तंदूरी लच्छा परांठे के साथ खाया जाए, जिस पर पिघलता मक्खन हर कौर का मज़ा दोगुना कर देता है। माहौल, सर्विस और पॉकेट फ्रेंडली बजट इस ढाबे को और भी खास बनाते हैं।
उस दा ढाबा: धर्मेंद्र के नाम वाली थाली और 1966 की विरासत
कचहरी रोड पर बसा 'उस दा ढाबा' पंजाब का ऑथेंटिक स्वाद साल 1966 से परोस रहा है। मिस्सी रोटी, बटर नान, छोले और राजमा-चावल जैसी कई थालियां यहां मिलती हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा 'धर्मेंद्र थाली' की होती है। बॉलीवुड के इस दिग्गज अभिनेता के पंजाब से होने के नाते यह थाली उन्हीं को समर्पित की गई है। इस एक थाली में कढ़ी, पालक कोफ्ता, राजमा, छोले, मशरूम करी और दाल मखनी — कुल 6 तरह की सब्ज़ियां होती हैं, साथ में पनीर नान, आलू नान, मिस्सी रोटी और लच्छा परांठा भी शामिल रहता है। आकार में यह थाली खासी बड़ी होती है। मालिक कवलजीत सिंह के मुताबिक देहरादून में यही इकलौता ढाबा है जहां सरसों का साग और मक्की की रोटी परोसी जाती है। वे बताते हैं कि उनके पिता इंदर सिंह साल 1966 में राजमा-चावल की रेहड़ी लगाते थे, जिसका स्वाद खूब पसंद किया जाता था। इसी पहचान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने साल 1999 में 'उस दा ढाबा' की शुरुआत की और सभी पंजाबी पकवान परोसने लगे। यहां का गाढ़ा रायता, पनीर टिक्का और बटर नान भी लोगों की पसंदीदा सूची में हैं।
मुरथल ढाबा: अब देहरादून में ही दिल्ली-एनसीआर वाला ज़ायका
दिल्ली-एनसीआर के मशहूर 'मुरथल ढाबे' के परांठों के दीवानों के लिए अच्छी खबर यह है कि वही पारंपरिक स्वाद अब देहरादून के डोईवाला माजरी ग्रांट में भी मौजूद है। उत्तराखंड की राजधानी आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग अब मुरथल का स्पेशल ज़ायका यहीं चख सकते हैं।
इस आउटलेट की सबसे बड़ी खासियत हैं इसके तंदूरी परांठे। कोयले के तंदूर में सिके एकदम खस्ता आलू, प्याज, पनीर और मिक्स वेज परांठों पर जब घर का बना शुद्ध सफेद मक्खन पिघलता है, तो स्वाद लाजवाब हो जाता है। तीखे-चटपटे परांठों के बाद मुंह मीठा करने के लिए यहां की गाढ़ी मटका कुल्फी इनकी स्पेशिलिटी है, और साथ में रबड़ी का स्वाद भी लिया जा सकता है। ठंडी हवाओं और खूबसूरत वादियों के बीच सफेद मक्खन से लथपथ तंदूरी परांठे और कुल्हड़ की गरम चाय का यह मेल हर मुसाफिर के सफर को और मज़ेदार बना देता है।
छिद्रवाला का ढाबा: मक्खन से लथपथ अमृतसरी कुल्चा
देहरादून के छिद्रवाला में बसे इस ढाबे पर वैसे तो कई पंजाबी पकवान मिलते हैं, लेकिन यहां की असली पहचान है 'अमृतसरी कुल्चा'। आलू और मसालों की स्टफिंग वाला यह कुल्चा जब मक्खन के साथ गरमा-गरम परोसा जाता है, तो हर किसी का दिल जीत लेता है। आम तौर पर कुल्चे को छोलों के साथ खाया जाता है, मगर बारिश के दिनों में यहां इसे गाढ़ी, मखमली और तीखी-चटपटी पनीर ग्रेवी के साथ परोसा जाता है। क्रिस्पी कुल्चे का हर निवाला जब इस ग्रेवी में डूबता है, तो मुंह में स्वाद का मानो विस्फोट हो जाता है।













