पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के घरों में सदियों से बनने वाली कढ़ी आज भी हर किसी की पसंदीदा डिश बनी हुई है, लेकिन ढाबों पर मिलने वाली गाढ़ी, चटपटी और हल्की खट्टी कढ़ी जैसा स्वाद घर में ला पाना सबके बस की बात नहीं होती. रसोइया गुड़िया कुमारी के मुताबिक अगर बेसन, दही और मसालों का सही अनुपात और सही तरीका अपनाया जाए, तो घर बैठे भी बिल्कुल वही जायका पाया जा सकता है.
गांव की रसोई से निकली एक पुरानी परंपरा
कढ़ी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की पारंपरिक रसोई का हिस्सा है और गांवों में आज भी इसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. समय बीतने के साथ इसका स्वाद और बनाने का तरीका बदलता गया, लेकिन इसकी लोकप्रियता जरा भी कम नहीं हुई. यही वजह है कि आज भी लोग शहरों में ढाबों पर जाकर खासतौर पर इसी गाढ़ी और मसालेदार कढ़ी को ढूंढते हैं.
बेसन और दही की जोड़ी ही असली नींव है
गुड़िया कुमारी बताती हैं कि स्वादिष्ट कढ़ी बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बेसन की होती है. अच्छी गुणवत्ता का बेसन, ताजा दही और सही मसालों का संतुलन इस व्यंजन का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है. नमक, हल्दी, लाल मिर्च और लहसुन के साथ अंत में डाली गई हरी धनिया कढ़ी का स्वाद और सुगंध दोनों बेहतरीन बना देती है.
गाढ़ा और गांठ रहित मिश्रण कैसे तैयार करें
ढाबा-स्टाइल कढ़ी की सबसे बड़ी खासियत उसका गाढ़ापन, मसालों की खुशबू और लहसुन वाला तड़का ही होता है. इसके लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दही और बेसन डालकर अच्छी तरह फेंटना जरूरी है, ताकि मिश्रण में कहीं भी गांठ न रह जाए. इसके बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है और जरूरत के हिसाब से पानी डालकर इस घोल को मनचाही गाढ़ाई तक पतला किया जाता है.
मसालेदार तड़का जो असली ढाबा टच देता है
अब एक कढ़ाही में तेल या घी गरम करके सबसे पहले राई, जीरा और थोड़ी-सी मेथी डाली जाती है. इसके बाद करी पत्ता, साबुत सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा लहसुन डालकर अच्छी तरह भूना जाता है. जिन्हें प्याज पसंद है, वे इसे भी हल्का सुनहरा होने तक भून सकते हैं. यही मसालेदार तड़का ढाबा-स्टाइल कढ़ी को उसका खास और पहचाना जाने वाला स्वाद देता है.
धीमी आंच पर पकाना ही असली राज़ है
तड़का तैयार होते ही दही और बेसन का मिश्रण कढ़ाही में डाल दिया जाता है. इस पूरे समय लगातार चलाते रहना जरूरी है, ताकि मिश्रण न तो नीचे से चिपके और न ही फटे. जब इसमें उबाल आने लगे, तो आंच धीमी कर दी जाती है और इसे करीब 15 से 20 मिनट तक पकने दिया जाता है. धीमी आंच पर पकाने से कढ़ी जहां गाढ़ी होती है, वहीं मसालों का स्वाद भी उसमें अच्छी तरह घुल जाता है.
पकौड़ी वाली कढ़ी बनाना चाहते हैं तो यह तरीका अपनाएं
जो लोग पकौड़ी वाली कढ़ी बनाना चाहते हैं, उन्हें अलग से बेसन का थोड़ा गाढ़ा घोल तैयार करना होगा. चाहें तो इसमें बारीक कटा प्याज भी मिलाया जा सकता है, इसके बाद गरम तेल में छोटे-छोटे पकौड़े तल लिए जाते हैं. कढ़ी तैयार होने से करीब 10 मिनट पहले इन पकौड़ों को कढ़ी में डाल देना चाहिए, ताकि वे अच्छी तरह नरम होकर उसके स्वाद को और बढ़ा दें.
आखिरी तड़का जो स्वाद को दोगुना कर देता है
कढ़ी तैयार होने के बाद अंत में एक छोटा-सा तड़का और लगाया जाता है. इसके लिए थोड़ा घी गरम कर उसमें लाल मिर्च पाउडर डाला जाता है और उसे तुरंत तैयार कढ़ी के ऊपर डाल दिया जाता है. यह आखिरी तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद दोनों को दोगुना कर देता है. गुड़िया कुमारी के मुताबिक ढाबा-स्टाइल कढ़ी का असली राज गाढ़े दही-बेसन के मिश्रण, भरपूर लहसुन वाले तड़के और धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाने में ही छिपा है.
अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो घर पर भी बिल्कुल ढाबे जैसा स्वाद पाया जा सकता है. इस बार कुछ पारंपरिक और स्वादिष्ट बनाने का मन हो, तो यह आसान रेसिपी जरूर आजमाई जा सकती है. इसका स्वाद हर किसी को पसंद आएगा और खाने वाले खुद कह उठेंगे, बिल्कुल ढाबे जैसी कढ़ी.











