दैनिक भोजन में हर दिन दाल, रोटी और सब्जी के नियमित चक्र से जब कुछ अलग खाने का मन हो, तो पारंपरिक गुजराती पालक दाल ढोकली एक संतुलित और आसान विकल्प साबित होती है। इस पारंपरिक व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दाल के प्रोटीन, पालक के पोषण और गेहूं-बेसन की ढोकली के कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन मेल एक ही बर्तन में तैयार हो जाता है। अलग से कई तरह के पकवान बनाने की झंझट के बिना यह संपूर्ण आहार की आवश्यकता पूरी करता है। घर में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले साधारण मसालों के साथ बनने वाला यह व्यंजन अपने विशेष खट्टे-मीठे जायके के लिए पहचाना जाता है।
सब्जियों से दूरी बनाने वाले बच्चों को पालक खिलाने का यह एक कारगर घरेलू उपाय भी है, क्योंकि पकने के दौरान पालक दाल और मसालों के साथ पूरी तरह घुलमिल जाता है। इसके अलावा ढोकली के आटे में बेसन मिलाने से न केवल उसका स्वाद निखरता है बल्कि उसकी बनावट भी अधिक नरम और बेहतर बनती है।
पालक दाल ढोकली के लिए आवश्यक सामग्री
इस पौष्टिक डिश को बनाने के लिए सामग्री को दो हिस्सों में तैयार रखा जाता है, जिसमें दाल की ग्रेवी और ढोकली का आटा शामिल है।
दाल और तड़के के लिए आवश्यक चीजें
- 1 कप तुअर दाल (अरहर की दाल)
- 1 से 1.5 कप बारीक कटा हुआ ताज़ा पालक
- 1 मध्यम आकार का टमाटर
- 2 बड़े चम्मच कच्ची मूंगफली के दाने
- 1 छोटा चम्मच गुड़
- 1 छोटा चम्मच इमली का पल्प
- आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
- 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1 छोटा चम्मच धनिया-जीरा पाउडर
- तड़के के लिए राई, जीरा, हींग, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च और अदरक-लहसुन का पेस्ट
- पकाने के लिए घी या तेल और स्वादानुसार नमक
ढोकली तैयार करने के लिए सामग्री
- 1 कप गेहूं का आटा
- 2 बड़े चम्मच बेसन
- आधा छोटा चम्मच अजवाइन
- थोड़ी सी हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और हींग
- 1 छोटा चम्मच तेल या शुद्ध घी मोयन के लिए
- स्वादानुसार नमक और आटा गूंथने के लिए पानी
ढोकली का आटा गूंथने और काटने का तरीका
ढोकली तैयार करने की शुरुआत एक चौड़े बर्तन में आटा लगाने से होती है। बर्तन में गेहूं का आटा, बेसन, अजवाइन, हल्दी, लाल मिर्च, हींग और नमक एक साथ निकाल लें। इसके बाद इसमें एक छोटा चम्मच तेल या घी डालकर अच्छी तरह मिला लें ताकि मोयन पूरे मिश्रण में एकसमान फैल जाए।
अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए मध्यम सख्त आटा गूंथ लें। ध्यान रखें कि आटा न तो बहुत ज्यादा कड़ा हो और न ही बहुत ज्यादा गीला। गूंथने के बाद आटे को ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। तय समय के बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और चकले पर रखकर पतली रोटी के आकार में बेलें। चाकू की मदद से इन रोटियों को छोटे चौकोर या डायमंड आकार में काट लें। कटी हुई सभी ढोकली को एक प्लेट में अलग रख लें ताकि वे आपस में न चिपकें।
खट्टी-मीठी पालक दाल पकाने की प्रक्रिया
पहले से उबाली गई तुअर दाल को किसी मथनी या विस्कर की मदद से अच्छी तरह फेंट लें ताकि उसका गाढ़ापन एकसार हो जाए। अब इसमें बारीक कटा हुआ पालक, हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर मध्यम आंच पर उबलने दें।
दूसरी तरफ एक भारी तले वाली कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। तेल गर्म होते ही उसमें राई, जीरा और हींग का छौंक लगाएं। जब तड़का चटकने लगे, तब इसमें करी पत्ता, साबुत सूखी लाल मिर्च और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद बारीक कटे हुए टमाटर डालें और उनके नरम होने तक पकाएं। फिर इसमें लाल मिर्च पाउडर और धनिया-जीरा पाउडर डालकर मसालों को अच्छी तरह मिला लें।
मसाला भुन जाने पर पालक वाली उबली दाल को कड़ाही में पलट दें और ग्रेवी की स्थिरता ठीक रखने के लिए जरूरत के अनुसार गर्म पानी मिलाएं। जब दाल में उबाल आ जाए, तब इसमें गुड़, इमली का पल्प और मूंगफली के दाने डालें। इमली और गुड़ का यह संयोजन दाल को पारंपरिक गुजराती शैली का खट्टा-मीठा स्वाद प्रदान करता है।
ढोकली पकाने और परोसने की विधि
जब दाल अच्छी तरह खदकने लगे, तब तैयार की गई ढोकली के टुकड़ों को एक-एक करके उबलती दाल में डालते जाएं। सभी टुकड़े एक साथ डालने से वे आपस में चिपक सकते हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग डालना जरूरी है। ढोकली डालने के बाद गैस की आंच धीमी कर दें और बर्तन को ढक्कन से ढककर लगभग 10 से 12 मिनट तक पकने दें।
पकने के दौरान बीच-बीच में कलछी को हल्के हाथ से चलाते रहें ताकि ढोकली बर्तन के तले में न बैठे। जैसे-जैसे ढोकली पकती जाएगी, आटे और बेसन के कारण दाल का सूप अपने आप गाढ़ा और मखमली होने लगेगा। पक जाने के बाद गैस बंद कर दें और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें। परोसते समय स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से थोड़ा गर्म देसी घी डाला जा सकता है। इस संपूर्ण एक-पॉट मील को पापड़, तीखे अचार या ताज़ा हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।



















