दक्कन की समृद्ध पाक कला में जहां बिरयानी, मटन करी और हलीम का दबदबा रहा है, वहीं अब खानपान के शौकीनों की थाली में सेहतमंद बदलाव देखने को मिल रहा है। सेहत को प्राथमिकता देने वाले लोग अब अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए पारंपरिक व्यंजनों को अपना रहे हैं। इसी क्रम में दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन रागी मुद्दई हैदराबाद के घरों से लेकर बड़े भोजनालयों तक में बेहद लोकप्रिय हो चुका है। स्थानीय लोग इसे तीखे मटन शेरवा, बघारे बैंगन, चिकन सालन अथवा खट्टी दाल के साथ चाव से खाते हैं।
पोषण का भंडार है यह पारंपरिक आहार
रागी को आहार विशेषज्ञ एक बेहतरीन सुपरफूड मानते हैं। इस मोटे अनाज में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और पाचक फाइबर पाया जाता है। यह न सिर्फ शारीरिक दुर्बलता को दूर कर ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी पूरी तरह सुचारू बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से इसका सेवन हड्डियों को मजबूती देने के साथ-साथ वजन नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध होता है।
तैयारी के लिए आवश्यक सामग्री का माप
इस पौष्टिक व्यंजन को बनाने के लिए 1 कप शुद्ध रागी का आटा चाहिए। इसके अतिरिक्त कुल 2 कप पानी की आवश्यकता होगी, जिसे दो हिस्सों में इस्तेमाल किया जाता है। आधा कप पानी घोल तैयार करने के काम आता है, जबकि बाकी का डेढ़ कप पानी पकाने के लिए रखा जाता है। स्वाद के अनुसार नमक और लगभग 2 चम्मच शुद्ध देसी घी की दरकार होती है।
पकाने का सरल और सटीक तरीका
सबसे पहले 1 कप रागी के आटे से 2 से 3 चम्मच आटा एक अलग बर्तन में निकाल लीजिए। इसमें आधा कप पानी डालकर अच्छी तरह फेंटें ताकि एक चिकना और पतला मिश्रण तैयार हो जाए और उसमें एक भी गांठ बाकी न रहे। इसके बाद किसी भारी तले वाली कड़ाही या गहरे बर्तन में डेढ़ कप पानी डालें। उसी पानी में तैयार घोल, स्वादानुसार नमक और 1 छोटा चम्मच देसी घी डालकर मध्यम आंच पर चढ़ाइए और पानी को खौलने दीजिए।
जब पानी में तेज उबाल आने लगे, तब शेष बचा हुआ सूखा रागी का आटा धीरे-धीरे बर्तन में डालिए। आटा डालते ही उसे तुरंत न चलाएं, बल्कि आंच धीमी करके बर्तन पर ढक्कन रख दें और 1 मिनट तक भाप में पकने दें। भाप की गर्मी से आटा अच्छी तरह नरम होने लगता है।
घोटने की तकनीक और गोल मुद्दई तैयार करना
निर्धारित समय के बाद ढक्कन अलग करें और किसी लकड़ी की मथानी अथवा मजबूत कलछी की मदद से मिश्रण को तेजी से चारों तरफ घुमाते हुए मिलाएं। लगातार चलाने से आटे में गुठलियां नहीं पड़तीं। इसे तब तक पकाना चाहिए जब तक यह गाढ़ा हलवे जैसा होकर बर्तन की सतह छोड़ना न शुरू कर दे। अंत में 1 चम्मच देसी घी ऊपर से डालें और धीमी आंच पर दोबारा ढक्कन लगाकर 1 मिनट का दम दें। इसके उपरांत पके हुए गरम आटे को थाली में निकालें। अपनी हथेलियों पर ठंडा पानी लगाकर गरम मिश्रण के मध्यम आकार के चिकने गोले बना लें।
थाली सजाने और परोसने की परंपरा
तैयार रागी मुद्दई के ठीक मध्य भाग में उंगली अथवा चम्मच के पिछले हिस्से से हल्का सा गड्ढा बनाएं। उस खाली जगह में खौलता हुआ शुद्ध देसी घी भरें। इसे पारंपरिक हैदराबादी मटन करी, सांभर या खट्टी दाल के साथ गरमा-गरम परोसिए।



















