रेस्टोरेंट और घर के मटन में इतना फर्क क्यों आता है?
घर में मटन बनाते समय ज्यादातर लोगों की एक ही शिकायत होती है कि घंटों मेहनत के बाद भी गोश्त उतना मुलायम नहीं बनता जितना किसी अच्छे ढाबे या होटल में मिलता है. कुछ लोग मसाले बढ़ा देते हैं, कुछ आंच तेज कर लेते हैं, लेकिन नतीजा फिर भी निराश करता है. सच यह है कि मटन की नरमी सिर्फ मसालों पर नहीं, बल्कि मैरिनेशन की विधि, पकाने के तापमान और कुछ खास किचन ट्रिक्स पर निर्भर करती है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपके हाथ का बना मटन खाकर मेहमान रेसिपी पूछने पर मजबूर हो जाएं, तो ये 5 टिप्स आपके काम आएंगी.
कच्चे पपीते का पेस्ट: रेशों को तोड़ने का सबसे असरदार नुस्खा
मटन मैरिनेट करते समय कच्चे पपीते का पेस्ट मिलाना सबसे कारगर तरीकों में से एक है. पपीते में पाया जाने वाला एंजाइम गोश्त के सख्त रेशों को तोड़ता है जिससे मटन जल्दी और अच्छी तरह नरम हो जाता है. यहां एक जरूरी बात का ध्यान रखें कि इसके लिए सिर्फ गहरे हरे रंग का कच्चा पपीता ही काम करेगा. पीला या पका हुआ पपीता इस काम के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है. पपीते के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर मिक्सर जार में डालें और जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी मिलाकर एक गाढ़ा, स्मूद पेस्ट तैयार करें. करीब 1 किलो मटन के लिए 1 से 2 बड़े चम्मच पेस्ट पर्याप्त होता है. पेस्ट लगाकर मटन को कम से कम 1 से 2 घंटे के लिए मैरिनेट होने दें. बेहतर नतीजे के लिए मैरिनेट किए हुए मटन को रात भर फ्रिज में रख दें, इससे गोश्त और भी ज्यादा मुलायम और जायकेदार बनता है.
गर्म पानी डालें: एक आसान आदत जो मटन को रबर होने से बचाती है
पकाते समय ठंडा पानी डालना एक ऐसी गलती है जिसे बहुत से लोग बिना सोचे करते रहते हैं. ठंडा पानी डालने से गोश्त रबर जैसा सख्त हो जाता है. जब भी मटन पकाते समय पानी की जरूरत हो, हमेशा गर्म पानी ही इस्तेमाल करें. गर्म पानी डालने से पकाने की प्रक्रिया बाधित नहीं होती, मटन एकसमान तापमान पर पकता रहता है और जल्दी भी गल जाता है. गर्म पानी डालने के बाद प्रेशर कुकर का ढक्कन बंद करें और मीडियम आंच पर तीन से चार सीटी आने तक पकाएं.
धीमी आंच पर दम देना: रेस्टोरेंट की असली तकनीक
रेस्टोरेंट का मटन मुंह में इसलिए घुलता है क्योंकि वहां इसे तेज आंच पर जल्दी नहीं पकाया जाता, बल्कि धीमी आंच पर लंबे समय तक दम दिया जाता है. इस तकनीक को सिमरिंग या दम कहते हैं और यह मटन को नरम बनाने का सबसे बड़ा राज है. घर में भी यही तरीका अपनाएं. प्रेशर कुकर में 10 सीटी लेने की जगह मात्र 3 से 4 सीटी धीमी आंच पर लें ताकि गोश्त का रस और स्वाद दोनों बरकरार रहें. पकाने से पहले मटन को मसालों के साथ कम से कम 15 से 20 मिनट तक धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें ताकि सभी मसाले गोश्त के अंदर तक रच-बस जाएं और हर निवाले में पूरा स्वाद आए.
नारियल का छिलका और दही-नींबू का जादू
ग्रेवी में नारियल के छिलके का एक छोटा टुकड़ा डालने से भी मटन नरम होता है, यह एक पुराना लेकिन कारगर नुस्खा है. इसके अलावा दही और नींबू का रस भी मटन को मुलायम बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. पकाने से पहले मटन को दही या नींबू के रस के साथ मैरिनेट करें और कुछ समय के लिए रखा रहने दें. फिर इसे धीमी आंच पर पकाने के लिए रख दें. ये एसिडिक चीजें गोश्त के रेशों को नरम करती हैं और मटन को रसदार बनाती हैं.
आंच बंद होने के बाद 4 से 6 मिनट का जरूरी इंतजार
यह आखिरी टिप सबसे ज्यादा अनदेखी जाती है लेकिन उतनी ही जरूरी भी है. मटन पक जाने और आंच बंद करने के बाद कुकर का ढक्कन तुरंत मत खोलें. कम से कम 4 से 6 मिनट तक कुकर को बंद ही रहने दें. इस दौरान कुकर के अंदर मौजूद भाप मटन को और भी नरम और रसदार बनाती रहती है. यह छोटा सा इंतजार मटन के टेक्सचर में रेस्टोरेंट जैसा फर्क लाता है और उसे सच में मुंह में घुल जाने वाला बना देता है.













