उपवास के दिनों में खानपान को लेकर अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं, खासकर जब कई दिनों तक एक ही प्रकार के फलाहार का सेवन करना पड़े। अगर आप भी उपवास में हर रोज वही पारंपरिक व्यंजन खाकर ऊब महसूस कर रहे हैं, तो साबूदाना खिचड़ी एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और बेहद त्वरित विकल्प साबित हो सकती है। उबले हुए आलू, साबूदाना, कुटी हुई मूंगफली और चुनिंदा उपवास-अनुकूल मसालों के मेल से यह व्यंजन रसोई में बहुत कम समय में तैयार हो जाता है। दिल्ली की रहने वाली सुषमा ने इस खिचड़ी को खास अंदाज में पकाने की विधि साझा की है। इस व्यंजन की खासियत यह है कि इसमें व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्वाद और उपवास के नियमों के आधार पर मूंगफली के साथ-साथ सूखे मेवे भी शामिल कर सकता है।
उपवास के नियमों के अनुसार सामग्री का चयन
इस खास रेसिपी में मुख्य रूप से टमाटर और काली मिर्च का प्रयोग किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर कई लोग उपवास के दौरान टमाटर या काली मिर्च का सेवन करने से परहेज करते हैं। यदि आपके परिवार में भी इस तरह के सख्त नियम माने जाते हैं, तो आप इन दोनों सामग्रियों को पूरी तरह छोड़कर भी यह खिचड़ी बना सकते हैं। ऐसे में केवल तेल में कटी हरी मिर्च और उबले आलू को हल्का भूनकर, उसमें साबूदाना और भुनी-कुटी मूंगफली मिलाकर भी एक बेहद उम्दा और स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार की जा सकती है।
आवश्यक सामग्री की सूची
इस पौष्टिक फलाहार को तैयार करने के लिए रसोई में निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी
- साबूदाना, जिसे पकाने से पहले सही तरीके से भिगोया गया हो
- उबले हुए आलू, छोटे टुकड़ों में कटे हुए
- टमाटर, बारीक कटे हुए
- हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
- पिसी हुई काली मिर्च
- स्वादानुसार सेंधा नमक
- भुनी और दरदरी कुटी हुई मूंगफली
- बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया
- पकाने के लिए थोड़ा सा खाद्य तेल या घी
- इच्छानुसार काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे
साबूदाना भिगोने और छौंक लगाने की शुरुआती तैयारी
खिचड़ी को खिला-खिला और स्वादिष्ट बनाने का सबसे पहला और बुनियादी कदम साबूदाने को सही ढंग से भिगोना है। साबूदाने को रात में पर्याप्त पानी में धोकर भिगोकर छोड़ देना सबसे बेहतर माना जाता है, जिससे अगली सुबह तक उसके दाने भीतर तक अच्छी तरह फूल जाते हैं। हालांकि, भिगोने का समय साबूदाने के दानों के आकार और उसकी किस्म पर भी निर्भर करता है। जब दाने पूरी तरह फूल जाएं और दबाने पर आसानी से मैश होने लगें, तब आगे की प्रक्रिया शुरू करें। सबसे पहले एक कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। तेल के गर्म होते ही उसमें बारीक कटी हरी मिर्च और थोड़ी सी काली मिर्च डालें। इसके तुरंत बाद कटे हुए टमाटर कड़ाही में डाल दें और उन्हें लगभग 2 से 4 मिनट तक मध्यम आंच पर पकने दें।
मसालों का मेल और आलू का मिश्रण
यदि टमाटर को तेजी से गलाना हो, तो कड़ाही में बिल्कुल हल्का सा पानी का छींटा दिया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएं और टमाटर के पूरी तरह नरम होने तक चमचे से चलाते हुए पकने दें। जब टमाटर अच्छी तरह गलकर तेल छोड़ने लगें, तब उसमें पहले से उबले हुए आलू के टुकड़े मिला दें। आलू की मात्रा आप अपने परिवार के सदस्यों की संख्या और निजी पसंद के अनुसार घटा या बढ़ा सकते हैं। आलू को मसालों के साथ कुछ सेकंड भूनने के बाद, पानी निथारा हुआ भीगा साबूदाना कड़ाही में पलट दें और सभी सामग्रियों को आपस में एकसार मिला लें।
धीमी आंच पर पकाने और गार्निश करने का तरीका
साबूदाना डालने के बाद आंच को धीमा कर दें और कड़ाही को लगातार या बीच-बीच में हल्के हाथों से चलाते रहें। जब साबूदाना अच्छी तरह सिकने लगे और उसके दाने पूरी तरह नरम होकर हल्के पारदर्शी दिखाई देने लगें, तब समझें कि वह पक चुका है। इस अवस्था में कड़ाही में दरदरी कुटी मूंगफली डालकर अच्छी तरह मिला दें। यदि आप समृद्ध स्वाद चाहते हैं, तो इसी समय भुने हुए काजू और बादाम के टुकड़े भी डाल सकते हैं। अंत में गैस बंद करने के बाद ऊपर से ताजा कटा हुआ हरा धनिया डालकर व्यंजन को सजाएं और गरमा-गरम परोसें।
खिली-खिली खिचड़ी के लिए ध्यान रखने योग्य सावधानियां
साबूदाना खिचड़ी बनाते वक्त सबसे बड़ी चुनौती उसके दानों को आपस में चिपकने से बचाना होती है। इसके लिए सबसे आवश्यक यह है कि भिगोने के बाद साबूदाने में अतिरिक्त पानी बिल्कुल न बचे। यदि दानों में नमी ज्यादा रह जाएगी, तो पकाते समय खिचड़ी लसलसी और चिपचिपी बन जाएगी। इसी प्रकार, साबूदाने को बहुत तेज आंच पर या बहुत लंबे समय तक पकाने से भी दाने आपस में जुड़कर गांठ बन सकते हैं। इसलिए साबूदाना मिलाने के बाद उसे केवल जरूरत भर ही धीमी आंच पर भूनें। इस पूरी विधि में हरी मिर्च और काली मिर्च तीखापन प्रदान करती हैं, जबकि मूंगफली हर कौर में मनभावन कुरकुरापन जोड़ती है।



















