घंटों कतार में खड़े रहे लोग, लंदन के हल्दीराम आउटलेट पर मची होड़ की असली वजह क्या हैखानपान
2 घंटे पहले· 2

घंटों कतार में खड़े रहे लोग, लंदन के हल्दीराम आउटलेट पर मची होड़ की असली वजह क्या है

लंदन के महंगे इलाके लीसेस्टर स्क्वायर में हल्दीराम का पहला आउटलेट खुलते ही भारतीयों की लंबी कतारें लग गईं और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इस भीड़ के पीछे सिर्फ देसी स्वाद नहीं, बल्कि कई और वजहें छिपी हैं।

लंदन के पॉश इलाके लीसेस्टर स्क्वायर में जैसे ही देसी ब्रांड हल्दीराम का आउटलेट खुला, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग घंटों कतार में खड़े रहे, कुछ तो देर रात तक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। इन नजारों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी जब लंदन, दुबई या अमेरिका में रामेश्वरम कैफे, सरवण भवन या कोई मशहूर देसी चाट भंडार खुला है, तो ठीक ऐसी ही मारामारी देखने को मिली है। सवाल यही है कि आखिर हल्दीराम के छोले भटूरे और राज कचौरी में ऐसा क्या जादू है, जो लोग खिंचे चले आ रहे हैं।

विदेश में रहने वाले किसी भी भारतीय से पूछिए कि उसे सबसे ज्यादा किस चीज की याद सताती है, तो जवाब लगभग तय है, घर का खाना और गली नुक्कड़ की चाट। यही चीज जब उसे लंदन में अपने घर के पास मिलने लगे, तो उसका वहां पहुंचना स्वाभाविक है। हल्दीराम के साथ भी बिल्कुल यही हुआ। लीसेस्टर स्क्वायर और उसके आसपास हजारों की संख्या में भारतीय रहते हैं। लिहाजा जब उन्हें अपने देश का असली स्वाद चखने का मौका मिला, तो वे बड़ी तादाद में उमड़ पड़े।

वहां का खाना क्यों नहीं भाता

लंदन में भारतीय रेस्टोरेंट की कोई कमी नहीं है, वहां हजारों करी हाउस मौजूद हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि इनमें से ज्यादातर को अंग्रेजों की पसंद के हिसाब से ढाल दिया गया है। वहां चिकन टिक्का मसाला बनता तो है, पर उसका स्वाद मीठा होता है और मसालों के नाम पर सिर्फ रंग नजर आता है। ऐसे में जिन्हें खाने में असली देसी स्वाद चाहिए, वे इन जगहों की तरफ नहीं भागेंगे। हल्दीराम और दूसरे देसी ब्रांड बिना किसी मिलावट के वही ठेठ भारतीय स्वाद परोसते हैं। एक वजह भावनात्मक भी है, लोगों को लगता है कि यह भारत का है, यानी अपना है। यही देसी गर्व यानी अपनेपन का एहसास भी लोगों को खींच लाता है।

कीमत का सीधा हिसाब

लीसेस्टर स्क्वायर लंदन की सबसे महंगी जगहों में गिना जाता है। यहां किसी विदेशी रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाने का मतलब है सैकड़ों पाउंड खर्च कर आना। इसके उलट हल्दीराम जैसे भारतीय आउटलेट का खाना वैल्यू फॉर मनी है। यानी अच्छा और देसी स्वाद वाला खाना भी मिल जाता है और जेब पर उतना बोझ भी नहीं पड़ता। इस इलाके में बड़ी संख्या में स्टूडेंट और बैचलर्स रहते हैं, उनके लिए तो यह और भी शानदार मौका बन जाता है।

सोशल मीडिया का असर

दिल्ली हो या लंदन, आज हर कोई किसी नई चीज को सबसे पहले आजमाना और उसकी रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करना चाहता है। यहां भी यही हुआ। आउटलेट खुलते ही वहां पहुंचे कुछ लोगों ने लंबी कतारों और खाने के वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर डाल दिए। इन वीडियो ने घर बैठे लोगों को भी उकसाया और बाद में वे भी भागे भागे रेस्टोरेंट पहुंच गए। इस तरह भीड़ खुद ही और भीड़ को बुलाती चली गई।

शाकाहार की बढ़ती मांग

सिर्फ भारत ही नहीं, अब विदेशों में भी लोग नॉनवेज छोड़कर शाकाहार यानी वेजेटेरियन और वीगन कल्चर की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन लंदन के आम खाने में यह मिलना मुश्किल है। वहां अगर आप वेजेटेरियन खाना मांगेंगे, तो सामने सलाद और उबली हुई सब्जियां लाकर रख दी जाएंगी। इसके मुकाबले भारतीय रेस्टोरेंट शुद्ध और स्वादिष्ट शाकाहारी खाना परोस रहे हैं, और यही वजह है कि ऐसे आउटलेट खुलते ही उन पर टूट पड़ने वाले लोगों की गिनती लगातार बढ़ रही है।

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सवाल-जवाब

लंदन में हल्दीराम का आउटलेट कहां खुला है?
यह आउटलेट लंदन के पॉश और महंगे इलाके लीसेस्टर स्क्वायर में खुला है।
आउटलेट के बाहर इतनी भीड़ क्यों लगी?
देसी असली स्वाद, वैल्यू फॉर मनी कीमत, देसी गर्व और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, इन सब वजहों से लोग बड़ी संख्या में उमड़ पड़े।
लोग कितनी देर तक कतार में खड़े रहे?
लोग घंटों कतार में खड़े रहे और कुछ तो देर रात तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
लंदन के आम भारतीय रेस्टोरेंट का खाना लोगों को क्यों पसंद नहीं आता?
वहां के ज्यादातर करी हाउस अंग्रेजों की पसंद के हिसाब से ढल गए हैं, जैसे चिकन टिक्का मसाला मीठा होता है और मसालों के नाम पर सिर्फ रंग रहता है।
क्या ऐसी भीड़ पहले भी देखी गई है?
हां, इससे पहले लंदन, दुबई और अमेरिका में रामेश्वरम कैफे और सरवण भवन जैसे देसी आउटलेट खुलने पर भी ऐसी ही मारामारी हुई थी।
शाकाहार का इससे क्या संबंध है?
विदेशों में शाकाहार और वीगन कल्चर बढ़ रहा है, लेकिन लंदन में शुद्ध और स्वादिष्ट वेजेटेरियन खाना मुश्किल से मिलता है, जो भारतीय रेस्टोरेंट परोस रहे हैं।

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