हैदराबाद अपनी शाही विरासत और लजीज खान-पान के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इन दिनों शहर के पुराने हिस्से में एक नया और अनूठा पारंपरिक पकवान लोगों का खास ध्यान खींच रहा है। चारमीनार के आसपास के बाजारों में मिलने वाले इस ताकतवर और सेहतमंद पकवान को खाने के शौकीन खूब पसंद कर रहे हैं। अपनी तासीर और औषधीय खूबियों की वजह से स्थानीय लोग इसे जवानी जानेमन हलवा के नाम से भी पुकारते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूती और फुर्ती देता है।
इस शाही मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में किसी भी तरह की चीनी या गुड़ की चाशनी का उपयोग नहीं होता है। इसमें मिठास लाने के लिए केवल बेहतरीन गुणवत्ता वाले अंजीर और बिना बीज वाले खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। अंजीर, खजूर, चिलगोज़ा और अन्य मेवों में आयरन, कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह पकवान शरीर की कमजोरी, थकान, तनाव और जोड़ों के दर्द को मिटाकर तुरंत ऊर्जा का संचार करता है।
हलवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इस ऊर्जावान और जायकेदार मिठाई को तैयार करने में कई पौष्टिक चीजों का उपयोग किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से बढ़िया किस्म के अंजीर, बिना बीज के खजूर, चिलगोज़ा यानी पाइन नट्स, बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट, खसखस, शुद्ध देसी घी, इलायची पाउडर और जायफल पाउडर शामिल हैं। ये सभी सामग्रियां मिलकर इसे न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट बनाती हैं बल्कि सेहत के लिए भी अचूक औषधि का काम करती हैं।
बनाने की पारंपरिक और सरल प्रक्रिया
इस स्वास्थ्यवर्धक मिठाई को बनाने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प है। सबसे पहले अंजीर और खजूर को तीन से चार घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर मुलायम किया जाता है, जिसके बाद इन्हें पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करते हैं। इसके बाद एक भारी तले की कढ़ाई में शुद्ध देसी घी गर्म करके बादाम, काजू, पिस्ता और अखरोट को हल्का सुनहरा होने तक भूनकर अलग रख लिया जाता है और इसी तरह खसखस को भी भून लेते हैं।
इसके बाद कढ़ाई में थोड़ा और देसी घी डालकर अंजीर और खजूर के उस पेस्ट को मध्यम आंच पर पकाया जाता है। इसे लगातार चलाते हुए तब तक भूना जाता है जब तक इसका सारा पानी सूख न जाए, रंग गहरा लाल और भूरा न हो जाए और मिश्रण किनारों से घी न छोड़ने लगे। जब यह मिश्रण अच्छी तरह भुन जाता है, तब इसमें भुने हुए मेवे, खसखस, इलायची पाउडर, थोड़ा सा जायफल पाउडर और सबसे आखिर में चिलगोज़े मिलाए जाते हैं। इन सबको धीमी आंच पर पांच मिनट और पकाया जाता है। हैदराबाद के प्रसिद्ध बाजारों में यह सेहतमंद हलवा बारह सौ रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।

















