पारंपरिक खानपान में मोटे अनाजों यानी श्री अन्न को दोबारा लोकप्रिय बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक खास पहल सामने आई है। गाजीपुर के शेरपुर गांव की रहने वाली गीतांजलि राय ने ज्वार के आटे का इस्तेमाल करके एक बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट हलवा तैयार किया है। राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पेश की गई यह अनूठी रेसिपी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। आधुनिक जीवनशैली में जहां लोग बाजरा, ज्वार और कोदो जैसे पौष्टिक अनाजों को अपनी थाली से दूर कर चुके हैं, वहीं इस नई मिठाई ने मोटे अनाज को एक स्वादिष्ट विकल्प बनाकर पेश किया है।
गृह विज्ञान प्रोफेसर के सुझाव से मिली नई दिशा
गीतांजलि राय के अनुसार मोटे अनाज से हलवा तैयार करने का विचार उन्हें गृह विज्ञान की प्रोफेसर नेहा मैम से मिला था। उनका प्राथमिक उद्देश्य यह साबित करना था कि पौष्टिक आहार केवल सादा या बेस्वाद नहीं होता, बल्कि उसे पारंपरिक भारतीय मिठाइयों की तरह बेहद लजीज भी बनाया जा सकता है। लोग अक्सर मोटे अनाज की केवल रोटियां या दलिया ही बनाते हैं, जिसकी वजह से नई पीढ़ी इनसे दूरी बना लेती है। इसी मानसिकता को बदलने और खानपान में पोषण का स्तर सुधारने के लिए इस हलवे का नवाचार किया गया।
स्वादिष्ट ज्वार का हलवा तैयार करने की पूरी विधि
इस हलवे को तैयार करने का तरीका बेहद सीधा और घरेलू है। सबसे पहले बाजार से लाए गए ज्वार के आटे को अच्छी तरह छानकर साफ कर लिया जाता है। इसके बाद एक कढ़ाई में शुद्ध देसी घी डालकर मध्यम आंच पर आटे को सुनहरा होने तक अच्छी तरह भूना जाता है। दूसरी तरफ काजू और किशमिश जैसे सूखे मेवों को भी अलग से देसी घी में हल्का भून लिया जाता है।
इस रेसिपी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सामान्य रिफाइंड चीनी का रत्ती भर भी उपयोग नहीं किया जाता। मिठास लाने के लिए शुद्ध गुड़ को पानी में अच्छी तरह घोलकर छान लिया जाता है ताकि उसकी अशुद्धियां अलग हो जाएं। जब ज्वार का आटा भूनकर पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब उसमें यह गुड़ का छना हुआ पानी मिलाया जाता है। अंत में ऊपर से थोड़ा अतिरिक्त देसी घी और पहले से भुने हुए काजू और किशमिश डालकर मिश्रण को तब तक पकाया जाता है जब तक कि वह हलवे के गाढ़े रूप में न आ जाए। इस व्यंजन का सही अनुपात रखने के लिए यदि 1 किलोग्राम ज्वार का आटा लिया गया है, तो उसमें आधा किलोग्राम गुड़ और 50-50 ग्राम काजू व किशमिश मिलाई जाती है।
पोषक तत्वों का खजाना और स्वास्थ्य लाभ
गीतांजलि की सहयोगी वंदना यादव के अनुसार पोषण की दृष्टि से यह व्यंजन बेहद संतुलित है। इस हलवे की प्रति सर्विंग से शरीर को लगभग 380 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा इसमें 8 ग्राम प्रोटीन, 9 ग्राम वसा यानी फैट और 4 से 5 ग्राम तक फाइबर मौजूद होता है।
ज्वार में प्राकृतिक रूप से फाइबर और मैग्नीशियम की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है, जिससे इसका सेवन करने के बाद काफी लंबे समय तक भूख नहीं लगती और पेट भरा हुआ महसूस होता है। चूंकि इसमें सफेद चीनी के बजाय गुड़ का इस्तेमाल होता है और ज्वार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य गेहूं या मैदे से बेहतर माना जाता है, इसलिए डायबिटीज के मरीज भी अपने चिकित्सक के परामर्श के साथ इसका सीमित आनंद ले सकते हैं।
मोटे अनाज के प्रति लोगों की सोच बदलने का संकल्प
गीतांजलि बताती हैं कि पिछले कुछ दशकों में लोगों की भोजन की थाली से मोटे अनाज लगातार गायब होते चले गए हैं। उनकी कोशिश है कि ऐसी पारंपरिक लेकिन स्वादिष्ट रेसिपीज के जरिए श्री अन्न को दोबारा हर घर के भोजन का हिस्सा बनाया जाए। उनका मानना है कि यदि मोटे अनाज को ऐसे नए और रुचिकर रूपों में परोसा जाए, तो स्वाद और सेहत दोनों की जरूरतें एक साथ पूरी हो सकती हैं। जिन लोगों ने भी इस हलवे को पहली बार चखा, वे इसके स्वाद के मुरीद हो गए और लगातार इसकी दोबारा मांग कर रहे हैं।


















