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जापानी माचा टी अब देश में ही बनेगी, असम की एक चाय बगान से शुरू हुआ यह अनोखा प्रयोगखानपान
4 जुल॰ 2026, 12:45 am (45 दिन पहले)· 2

जापानी माचा टी अब देश में ही बनेगी, असम की एक चाय बगान से शुरू हुआ यह अनोखा प्रयोग

असम के तिनसुकिया जिले में छोटा तिंगराई टी एस्टेट में जापान की मशहूर माचा टी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे भारत में इसकी कीमत 3 हजार रुपए किलो तय की गई है।

चाय पीने के शौकीनों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जापान की मशहूर ग्रीन टी माचा अब भारत में ही व्यावसायिक स्तर पर तैयार होने लगी है और इस कामयाबी के साथ असम देश का पहला राज्य बन गया है जहां माचा टी का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हुआ है। हालांकि इस खास चाय का स्वाद चखने के लिए जेब थोड़ी ढीली करनी पड़ेगी, क्योंकि फिलहाल भारत में इसकी कीमत 3 हजार रुपए प्रति किलो रखी गई है।

तिनसुकिया के बगान में शुरू हुआ उत्पादन

माचा टी का यह उत्पादन पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले में स्थित छोटा तिंगराई टी एस्टेट में शुरू किया गया है। इससे पहले भारत में माचा टी सीमित मात्रा में ही तैयार होती थी, लेकिन पहली बार इसे बड़े पैमाने पर बनाकर बाजार में उतारा गया है। यानी अब देश के भीतर ही इस लोकप्रिय जापानी पेय को औद्योगिक स्तर पर तैयार किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया चाय विरासत का नया अध्याय

असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा ने इस उपलब्धि को राज्य की चाय विरासत में एक नया अध्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि अब लोगों की पसंदीदा माचा टी असम में ही तैयार होगी। उनके मुताबिक इससे राज्य के चाय उद्योग को एक नई पहचान मिलेगी और दुनिया के प्रीमियम टी मार्केट में असम की मौजूदगी और मजबूत होगी। हेमंता विश्व शर्मा ने यह भी कहा कि यह सफलता भारत और जापान के बीच करीब 10 साल से चल रहे सहयोग का नतीजा है। उन्होंने बताया कि जापान की आधुनिक मशीनों, नई तकनीक और वहां के विशेषज्ञों के अनुभव को असम के चाय उद्योग तक पहुंचाया गया, जिसकी वजह से अब यहां विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाली माचा टी का प्रोडक्शन संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी इस उपलब्धि की जानकारी साझा की और इसे असम की चाय की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया।

क्या होती है माचा टी

माचा एक खास किस्म की ग्रीन टी होती है, जो छाया में उगाई गई चाय की पत्तियों से तैयार की जाती है। इन पत्तियों को पहले सुखाया जाता है और फिर बारीक पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इसका रंग चमकीला हरा होता है और स्वाद सामान्य ग्रीन टी से कहीं ज्यादा गाढ़ा और अलग होता है। इसे पीने का तरीका भी खास है, इस पाउडर को गर्म पानी में घोलकर पिया जाता है। माचा टी की शुरुआत सदियों पहले चीन और जापान के बीच हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दौरान हुई थी। बाद में जापान के बौद्ध भिक्षुओं ने इसे लोकप्रिय बनाया और धीरे-धीरे यह वहां की संस्कृति का हिस्सा बन गई। आज दुनियाभर में इसे एक हेल्दी ड्रिंक के तौर पर पसंद किया जाता है और सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं।

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सवाल-जवाब

असम में माचा टी का उत्पादन कहां शुरू हुआ है?
पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले में स्थित छोटा तिंगराई टी एस्टेट में इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया गया है।
भारत में माचा टी की कीमत क्या रखी गई है?
फिलहाल इसकी कीमत 3 हजार रुपए प्रति किलो रखी गई है।
असम को यह उपलब्धि क्यों मिली है?
यह भारत और जापान के बीच करीब 10 साल से चल रहे सहयोग, जापानी मशीनों और तकनीक की वजह से मुमकिन हो पाया है।
माचा टी आखिर होती क्या है?
यह छाया में उगाई गई चाय की पत्तियों से बनी एक खास ग्रीन टी है, जिन्हें सुखाकर बारीक पाउडर बनाया जाता है और गर्म पानी में घोलकर पिया जाता है।
माचा टी की शुरुआत कहां से हुई थी?
इसकी शुरुआत सदियों पहले चीन और जापान के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दौरान हुई थी, और बाद में जापानी बौद्ध भिक्षुओं ने इसे लोकप्रिय बनाया।
इस कामयाबी पर किसने प्रतिक्रिया दी है?
असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्व शर्मा ने इसे राज्य की चाय विरासत का नया अध्याय बताते हुए इसकी जानकारी साझा की है।
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