बिना झंझट मिनटों में तैयार करें स्वादिष्ट बेसन कढ़ी, चावल के साथ परोसने की सरल विधिचक्रवात अर्नब का कहर: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी तबाही पर राहुल गांधी ने जताई गहरी चिंतासूरत में मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाला पकड़ा गया, पुलिस ने इलाके में कराया सीन रीक्रिएशनमणिपुर में चुनावी हलचल: ज़ेडआरओ प्रमुख के बेटे डॉ. थांखनखुप गुइते लड़ेंगे 2027 का विधानसभा चुनावहॉर्नबिल महोत्सव से पहले नगालैंड ने केंद्र से प्रोटेक्टेड एरिया परमिट पूरी तरह हटाने की उठाई मांगमातृभाषा में शुरुआती पढ़ाई से आदिवासी बच्चों की सीखने की क्षमता में हुआ बड़ा सुधारकरनाल के सिंगड़ा गांव में जोहड़ से मिला दो साल के लापता एकांश का शवमेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में नेशनल हाईवे-62 के निर्माण में देरी से आक्रोश, प्रशासन ने लगाया प्रदर्शन पर प्रतिबंधपश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को होल्डिंग स्टेशन में रखकर वापस भेजा जाएगा, शुभेंदु अधिकारी का कड़ा रुखबेंगलुरु में अपहरण केस में नाटकीय मोड़, मुक्त कराए गए दोनों टेक कर्मी और साजिशकर्ता महिला समेत 13 लोग हिरासत में
मधुबनी के अरेर चौक पर शाम ढलते ही क्यों जुटती है भारी भीड़? जानिए 100 साल पुराने बैजू बम का ज़ायकाखानपान
17 अग॰ 2026, 7:27 pm (73 दिन पहले)· 1

मधुबनी के अरेर चौक पर शाम ढलते ही क्यों जुटती है भारी भीड़? जानिए 100 साल पुराने बैजू बम का ज़ायका

बिहार के मधुबनी में 100 साल पुरानी बैजू साह की दुकान का 'बैजू बम' आज भी बेहद लोकप्रिय है, जिसे खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

बिहार के मधुबनी जिले में शाम होते ही खाद्य प्रेमियों का रुख एक खास चौराहे की तरफ हो जाता है। अरेर बीचला छला चौक पर बनी एक छोटी सी दुकान में मिलने वाला 'बैजू बम' या 'आलू बम' अपने तीखे स्वाद और अनोखी रेसिपी के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। आम आलू चोप या पकोड़ों से अलग, इस खास पकवान को बनाने का तरीका काफी पारंपरिक है। इसे चखने के लिए लोग घंटों इंतजार करने को तैयार रहते हैं और दूर-दूर से इस दुकान का पता पूछते हुए पहुंचते हैं।

सैकड़ों साल पुरानी परंपरा और बैजू साह की विरासत

इस ऐतिहासिक दुकान की शुरुआत लगभग 100 साल पहले बैजू साह ने की थी। उनके बनाए आलू बम के अनोखे स्वाद की वजह से स्थानीय लोगों ने प्यार से इस दुकान का नाम ही 'बैजू बम' रख दिया। समय के साथ यह दुकान तीन पीढ़ियों से सफलता के साथ चलाई जा रही है। बैजू साह के बाद उनके बेटे ने इसे संभाला और अब उनके पोते उसी पुरानी जगह पर आगे से झोपड़ीनुमा दुकान में इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। इस पकवान का नाम मिथिला की संस्कृति में इतना रच-बस चुका है कि मैथिली भाषा के कई लोकगीतों में भी इसका जिक्र देखने को मिलता है। लगभग 70 से 80 किलोमीटर दूर से लोग विशेष रूप से इसे खाने और अपने साथ पैक करवा कर ले जाने आते हैं।

ये भी पढ़ें

चना दाल और लहसुन के मसाले का खास ज़ायका

आम तौर पर आलू के नमकीन पकवानों में आलू के अंदर साधारण मसाले मिलाए जाते हैं और फिर बेसन में लपेटकर तला जाता है। हालांकि, बैजू बम की असल पहचान इसके आलू के अंदर भरी जाने वाली गुप्त मसालेदार सामग्री है। इस सीक्रेट मसाले को तैयार करने के लिए सबसे पहले चना दाल को भिगोया जाता है। फिर इसमें प्रचुर मात्रा में लहसुन, नमक, मिर्च, हल्दी, धनिया और गरम मसाला मिलाकर अच्छी तरह फ्राई किया जाता है। जब यह चटपटा मसाला तैयार हो जाता है, तब इसे उबले आलू के बीच में भरा जाता है। इसके बाद बेसन का घोल चढ़ाकर इसे पकाया जाता है, जो इसे बेजोड़ स्वाद देता है।

मिट्टी का चूल्हा और हर शाम 10 हजार पीस की बिक्री

आज के आधुनिक युग में भी इस दुकान पर बनाने की तकनीक पूरी तरह पारंपरिक है। बैजू बम को मिट्टी के चूल्हे पर कोयले की आग जलाकर लोहे की भारी कढ़ाई में तेल डालकर डीप फ्राई किया जाता है। चूल्हे की आंच और लोहे की कढ़ाई का यह संयोजन इसे एक खास देसी फ्लेवर प्रदान करता है। यह दुकान शाम 4:00 बजे खुलती है और रात 8:00 बजे तक यानी केवल 4 घंटे ही संचालित होती है। इन 4 घंटों के भीतर ही 10,000 पीस से अधिक बैजू बम बिक जाते हैं। त्यौहारों और खास मौकों पर तो बिक्री का यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है, जहाँ लोग पहले से ऑर्डर देकर इसे मंगवाते हैं।

सस्ता, स्वादिष्ट और पेट भरने वाला नाश्ता

एक बैजू बम की कीमत केवल ₹20 रखी गई है। इसके साथ प्लेट में थोड़ा सा कुरकुरा मुढ़ी (मुरमुरा या भुना हुआ चावल) परोसा जाता है। केवल एक पीस खाने से ही शाम का नाश्ता पूरा हो जाता है और पेट भर जाता है। इसका तीखा और चटपटा स्वाद ऐसा है कि एक बार चखने के बाद लोग बार-बार यहाँ खींचे चले आते हैं। यही कारण है कि यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि मधुबनी के खान-पान का एक ऐतिहासिक हिस्सा बन चुका है।

सवाल-जवाब

बैजू बम क्या है और यह कहाँ मिलता है?
बैजू बम बिहार के मधुबनी जिले में अरेर बीचला छला चौक पर स्थित एक प्रसिद्ध 100 साल पुरानी दुकान का खास आलू पकवान है।
बैजू बम के अंदर कौन सा सीक्रेट मसाला भरा जाता है?
इसके अंदर भिगोई हुई चना दाल, बहुत सारा लहसुन, नमक, मिर्च, हल्दी, धनिया और गरम मसाला फ्राई करके आलू के बीच में भरा जाता है।
बैजू बम दुकान की टाइमिंग क्या है और एक दिन में कितने पीस बिकते हैं?
यह दुकान शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक सिर्फ 4 घंटे खुलती है, जिसमें 10,000 से अधिक पीस बिक जाते हैं।
एक बैजू बम की कीमत कितनी है और इसके साथ क्या मिलता है?
एक बैजू बम की कीमत ₹20 है और इसके साथ थोड़ा सा मुरही (मुढ़ी) खाने को मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp