चिकन को फिटनेस के शौकीनों, बॉडीबिल्डर्स और हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले लोगों के लिए प्रोटीन का एक बेहतरीन जरिया माना जाता है. हालांकि, चिकन पकाने का तरीका उसकी कुल कैलोरी, फैट और न्यूट्रिशन प्रोफाइल को काफी हद तक बदल सकता है. इसी वजह से सेहत को लेकर सतर्क रहने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि तंदूरी चिकन सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है या फिर कड़ाही चिकन. दोनों ही पकवानों में मुख्य सामग्री चिकन ही होती है, इसलिए इनमें मिलने वाले बेसिक प्रोटीन की मात्रा में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता. असली फर्क पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल, मक्खन, क्रीम, ग्रेवी और चिकन के हिस्से से पड़ता है.
तंदूरी चिकन में प्रोटीन और कैलोरी का गणित
अगर तंदूरी चिकन को बिना ज्यादा मक्खन या तेल लगाए पकाया जाए, तो यह मांसपेशियों की रिकवरी और वजन घटाने की डाइट के लिए एक शानदार विकल्प साबित होता है. पारंपरिक तरीके में चिकन को दही और पिसे हुए मसालों के मिश्रण में मैरिनेट किया जाता है और फिर मिट्टी के तंदूर में तेज आंच पर भुना जाता है. इस कुकिंग मेथड में अलग से गाढ़ी ग्रेवी या बहुत ज्यादा तेल डालने की जरूरत नहीं पड़ती. चिकन के मांस से कंप्लीट प्रोटीन मिलता है, जिसमें शरीर के लिए जरूरी सभी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं. ये अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत, निर्माण और शरीर की अन्य जरूरी कार्यप्रणालियों में अहम भूमिका निभाते हैं.
हालांकि तंदूरी चिकन को हर स्थिति में पूरी तरह लो-कैलोरी मान लेना भी सही नहीं होगा. रेस्टोरेंट और ढाबों में तंदूरी चिकन को ज्यादा स्वादिष्ट और चमकदार बनाने के लिए उस पर ऊपर से काफी मात्रा में बटर या तेल लगाया जाता है. ऐसा करने से इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा अचानक बढ़ जाती है.
कड़ाही चिकन की ग्रेवी और तेल से कैसे बदलता है न्यूट्रिशन
कड़ाही चिकन बनाते समय चिकन को प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और खड़े मसालों के साथ तेल में पकाया जाता है. यही कारण है कि कड़ाही चिकन की पौष्टिकता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस तरह तैयार किया गया है. अगर घर पर कम तेल में स्किनलेस चिकन ब्रेस्ट, टमाटर और शिमला मिर्च के साथ कड़ाही चिकन बनाया जाए, तो यह भी एक संतुलित और प्रोटीन से भरपूर आहार बन सकता है. इसके विपरीत, रेस्टोरेंट में बनने वाले कड़ाही चिकन में तेल और गाढ़ी ग्रेवी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे उसमें कैलोरी की मात्रा काफी बढ़ जाती है.
वजन कम करने या नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों को सिर्फ डिश का नाम देखकर चुनाव नहीं करना चाहिए. कम तेल में बना तंदूरी चिकन आमतौर पर कम कैलोरी वाला होता है. वहीं, बहुत ज्यादा तेल और भारी ग्रेवी वाला कड़ाही चिकन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है.
वेट लॉस और मसल्स बिल्डिंग के लिए कौन सी डिश है बेहतर
मसल्स बनाने के लिए केवल एक डिश पर निर्भर रहने के बजाय दिनभर की कुल कैलोरी और प्रोटीन का संतुलन बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. सिर्फ तंदूरी चिकन खाने से मांसपेशियां नहीं बनेंगी जब तक कि आपकी पूरी डाइट और वर्कआउट सही न हो. अगर दोनों डिश में चिकन की मात्रा बराबर है, तो उनसे मिलने वाले प्रोटीन में कोई खास अंतर नहीं होता.
इसके अलावा चिकन का हिस्सा चुनना भी मायने रखता है. स्किनलेस चिकन ब्रेस्ट में फैटी हिस्सों जैसे जांघ या विंग्स की तुलना में कम फैट और ज्यादा प्रोटीन होता है. इसलिए कम तेल में तैयार तंदूरी चिकन एक आसान और सेहतमंद हाई-प्रोटीन विकल्प है, जबकि कम तेल वाला कड़ाही चिकन भी उतना ही फायदेमंद साबित हो सकता है.



















