भारतीय रसोई में दोपहर के भोजन के समय अक्सर दाल, चावल, रोटी और किसी एक साधारण सब्जी की ही जुगलबंदी देखने को मिलती है। यह भोजन पौष्टिक तो होता है, लेकिन एक ही तरह का स्वाद रोज खाने से परिवार के सदस्य और खासकर बच्चे कई बार ऊब जाते हैं। ऐसे में लंच टेबल पर कुछ नया, स्वादिष्ट और पौष्टिक परोसना एक चुनौती बन जाता है। इस स्थिति में हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक और बेहद प्रसिद्ध डिश हिमाचली सेपू वड़ी एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है। उड़द दाल से तैयार होने वाली मुलायम स्पंजी वड़ियां और पालक व दही के मेल से बनी मसालेदार ग्रेवी इस व्यंजन को बेहद अनोखा स्वाद प्रदान करती है।
हिमाचली सेपू वड़ी का सांस्कृतिक महत्त्व और स्वाद का संतुलन
हिमाचल प्रदेश की पाक कला में सेपू वड़ी का एक बहुत ही खास स्थान है। इसे राज्य में किसी भी विशेष त्यौहार, मांगलिक अवसरों और खास मेहमानों के स्वागत के दौरान पारंपरिक धाम में मुख्य व्यंजन के रूप में परोसा जाता है। इस डिश की सबसे बड़ी खूबी इसका संतुलित स्वाद है। इसमें न तो बहुत तेज मिर्च का इस्तेमाल होता है और न ही बहुत ज्यादा तेल-मसाले होते हैं, जिससे इसका हल्का मसालेदार और मलाईदार स्वाद छोटे बच्चों से लेकर घर के बुजुर्गों तक सभी को खूब भाता है। प्रसिद्ध शेफ रणवीर बराड़ ने भी इस पारंपरिक पहाड़ी रेसिपी को घरेलू रसोई के लिए आसान और सुलभ तरीके से प्रस्तुत किया है, जिसे कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।
नरम और स्पंजी वड़ियां तैयार करने की आसान विधि
स्वादिष्ट सेपू वड़ी बनाने का पूरा राज इसकी वड़ियों की बनावट में छिपा होता है। सबसे पहले भीगी हुई उड़द दाल को स्वादानुसार नमक मिलाकर थोड़ा गाढ़ा और बारीक पीस लिया जाता है। इसके बाद इस पिसी हुई दाल में बारीक कटी हरी मिर्च, कसा हुआ अदरक, ताजा हरा धनिया, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ी सी हींग और जीरा मिलाया जाता है। इस पूरे मिश्रण को हाथ या चम्मच की मदद से तब तक लगातार फेंटा जाता है जब तक कि दाल हल्की और हवादार न हो जाए। मिश्रण जितना ज्यादा फूला हुआ होगा, उबलने के बाद वड़ियां उतनी ही ज्यादा मुलायम और स्पंजी बनेंगी।
इसके बाद हाथों पर हल्का सा तेल लगाकर दाल के छोटे-छोटे गोल या चपटे आकार की वड़ियां बना ली जाती हैं। एक गहरे बर्तन में पानी उबलने के लिए रखें और उसमें थोड़ा सा नमक तथा तेल की कुछ बूंदें डालें। जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तो तैयार वड़ियों को उसमें डाल दें। इन्हें लगभग 7 से 8 मिनट तक तेज आंच पर उबलने दें। जैसे ही वड़ियां पककर पानी की सतह पर तैरने लगें, समझ जाएं कि वे अंदर से पूरी तरह पक चुकी हैं। इन्हें बर्तन से निकालकर एक तरफ रख लें।
पालक प्यूरी और दही की चटपटी ग्रेवी बनाने का तरीका
ग्रेवी तैयार करने के लिए सबसे पहले उबली हुई वड़ियों को थोड़े से तेल में हल्का सुनहरा होने तक तल लें। तलने से वड़ियों के ऊपरी हिस्से में हल्का कुरकुरापन आ जाता है, जो ग्रेवी में जाने के बाद भी वड़ी का आकार बनाए रखता है। इसके बाद, जिस गर्म पानी में वड़ियों को उबाला गया था, उसी में ताजी पालक को केवल 30 सेकंड के लिए ब्लांच करें और तुरंत निकाल कर ठंडे पानी में डाल दें। ऐसा करने से पालक का प्राकृतिक हरा रंग बरकरार रहता है। इसके बाद पालक को मिक्सी में पीसकर एक स्मूद प्यूरी तैयार कर लें।
अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। तेल में सूखी लाल मिर्च, दालचीनी का टुकड़ा, बड़ी इलायची, थोड़ी हींग और सौंफ का छौंक लगाएं। जब मसालों से भीनी खुशबू आने लगे, तो आंच धीमी करके अच्छी तरह फेंटा हुआ दही कड़ाही में डालें। दही डालते ही चम्मच को लगातार चलाते रहना आवश्यक है, ताकि तेज गर्मी से दही फटने न पाए। इसके बाद इसमें तैयार पालक की प्यूरी, हल्दी, देगी लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, नमक और स्वाद को संतुलित करने के लिए चुटकी भर चीनी मिलाएं। इस मिश्रण को लगभग 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। जब ग्रेवी पक जाए, तो आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी मिलाएं और तली हुई वड़ियों को ग्रेवी में डाल दें। कड़ाही को ढककर 3 से 4 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं ताकि वड़ियां ग्रेवी के तमाम रसों और मसालों को अपने अंदर अच्छी तरह सोख लें। जब सतह पर तेल दिखाई देने लगे, तो गैस बंद कर दें।
परोसने के तरीके और पोषण से भरपूर गुण
गरमा-गरम हिमाचली सेपू वड़ी का असली मजा सादे उबले हुए बासमती चावल या जीरा राइस के साथ आता है। इसके अलावा इसे गरमा-गरम फुल्के या तंदूरी रोटी के साथ भी परोसा जा सकता है। परोसते समय ऊपर से बारीक कटा ताजा हरा धनिया छिड़कने से इसका स्वाद और रंगत दोनों दोगुनी हो जाती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो उड़द दाल से भरपूर प्रोटीन, पालक से आयरन और फाइबर तथा दही से पाचन को दुरुस्त रखने वाले प्रोबायोटिक्स मिलते हैं। यह पारंपरिक डिश स्वाद और सेहत का एक अनूठा संगम है, जो आपके रोज के साधारण खाने को एक शाही स्वाद में बदल सकती है।



















