राजस्थान का ऐतिहासिक शहर पाली अपने शानदार इतिहास, सांस्कृतिक परंपराओं और स्वादिष्ट पकवानों के लिए काफी मशहूर है। इन दिनों पाली के स्थानीय बाजार की एक 50 साल पुरानी दुकान अपनी खास देशी डलगोना कॉफी की वजह से काफी सुर्खियां बटोर रही है। वैसे तो डलगोना कॉफी का चलन आधुनिक कैफे संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नरेश भाई के हाथों से तैयार होने वाला यह देशी अंदाज पिछले 50 वर्षों से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इस खास कॉफी का स्वाद इतना अद्भुत है कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पाली आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भी इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं।
'बादशाहों का झंडा' इलाके की अनूठी पहचान
इस प्रसिद्ध दुकान का सबसे बड़ा आकर्षण इसका अनोखा ठिकाना और नाम है, जिसे 'बादशाहों का झंडा' कहा जाता है। यह नाम सुनते ही यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन में उत्सुकता पैदा हो जाती है। दशकों से यह स्थान लोगों के मिलने-जुलने और पसंदीदा स्वाद का आनंद लेने का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शहर में घूमने आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक इस जगह पर पहुंचे बिना अपनी यात्रा पूरी नहीं मानते। यहां आने वाले ग्राहक कॉफी की चुस्की लेते हुए अक्सर यही कहते हैं कि इसका शाही जायका वाकई इस जगह के नाम के मुताबिक है।
हाथ से फेंटने की पारंपरिक तकनीक और रेसिपी
आधुनिक कैफे की तरह इलेक्ट्रॉनिक मशीनों या ब्लेंडर का इस्तेमाल करने के बजाय नरेश भाई इसे पूरी तरह से पारंपरिक और देशी तरीके से बनाते हैं। इसे तैयार करने के लिए एक बड़े कटोरे में तीन चीजें बराबर मात्रा में मिलाई जाती हैं। इसमें 2 बड़े चम्मच बढ़िया इंस्टेंट कॉफी पाउडर लेते हैं, फिर उसमें 2 बड़े चम्मच शक्कर और 2 बड़े चम्मच उबलता हुआ गर्म पानी मिलाया जाता है।
सामग्री मिलाने के बाद असली हुनर का काम शुरू होता है। इसके बाद मिश्रण को बिना रुके एक ही तरफ घुमाते हुए 8 से 10 मिनट तक हाथ से मथा जाता है। जैसे-जैसे इसे मथा जाता है, इसका गहरा रंग हल्का भूरा होने लगता है। कुछ ही देर में यह गाढ़े मलाईदार क्रीम का रूप ले लेता है, जिससे एक घना और मनमोहक झाग तैयार होता है।
परोसने का अंदाज और ग्राहकों का उत्साह
कॉफी का क्रीमी झाग तैयार होने के बाद इसे ग्राहकों के सामने बड़े गिलास में परोसा जाता है। ग्राहक की चाहत के अनुसार एक लंबे गिलास में गरम या फिर चिल्ड दूध भरा जाता है, और यदि ग्राहक ठंडा पसंद करे तो बर्फ के टुकड़े भी डाल दिए जाते हैं। अंत में तैयार गाढ़े मलाईदार कॉफी के झाग को दूध के ऊपर सजाकर परोसते हैं। कड़क कॉफी और क्रीमी दूध का यह तालमेल ग्राहकों को बेहद पसंद आता है, जिसकी वजह से 50 साल पुरानी इस दुकान पर हर दिन लोगों का तांता लगा रहता है।



















