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गाजीपुर के महुआ बाग चौराहे पर ₹25 में सनी पाल परोसते हैं खास इमरती, जानें जलेबी से क्यों है इसका स्वाद बिल्कुल अलगखानपान
21 अग॰ 2026, 7:36 am (70 दिन पहले)· 2

गाजीपुर के महुआ बाग चौराहे पर ₹25 में सनी पाल परोसते हैं खास इमरती, जानें जलेबी से क्यों है इसका स्वाद बिल्कुल अलग

गाजीपुर के महुआ बाग चौराहे पर तीन पीढ़ियों से सनी पाल की दुकान शुद्ध उड़द दाल की गरमागरम इमरती परोस रही है। रोजाना 150 से 200 पीस बिकने वाली यह ₹25 की मिठाई अपनी पारंपरिक बनावट और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित महुआ बाग चौराहे पर सुबह के 9 बजते ही खौलते शुद्ध घी और तेल से उठती भीनी सुगंध पूरे इलाके में फैलने लगती है। यह वह खास समय होता है जब कड़ाही में उड़द की दाल का बैटर उतरता है और कारीगर के सधे हाथों से बारीक धारें बहकर इमरती का रूप लेने लगती हैं। तीन पीढ़ियों से चले आ रहे इस चूल्हे को आज सनी पाल पूरी निष्ठा के साथ संभाल रहे हैं। गाजीपुर के लोगों के लिए सुबह और शाम का चटोरापन इसी ताज़ा मिठास के साथ शुरू होता है।

दिन में दो बार ताज़ा बैटर बनाने की पक्की परंपरा

सनी पाल की इस पुरानी दुकान पर समय भले बदल गया हो, लेकिन गुणवत्ता और ताजगी के नियम आज भी वही हैं। सुबह 9 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक चलने वाली इस दुकान पर रोजाना दो बार कड़ाही के लिए नया और ताज़ा बैटर तैयार किया जाता है। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी ग्राहक को बासी या ठंडी मिठाई न मिले, बल्कि हर किसी को कड़ाही से निकली बिल्कुल गरमागरम इमरती परोसी जा सके। दशकों से चला आ रहा यह अनुशासन ही इस दुकान की असली ताकत है।

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सालों के अभ्यास और कलाई के संतुलन से सजती है जालीदार बुनावट

कड़ाही के ऊपर हाथ टिकाकर बैटर से बारीक जालीदार चक्र बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए कलाई का बेहतरीन संतुलन और सालों की अनवरत साधना चाहिए होती है। जब खौलते घी-तेल में उड़द दाल की धारें आपस में जुड़कर फूल जैसा आकार लेती हैं, तब जाकर एक सटीक इमरती तैयार होती है। सिकने के बाद कारीगर एक पतली सींक की मदद से इन इमरतियों के गुच्छे को बाहर निकालता है और फिर इन्हें मीठी चाशनी में डुबोया जाता है। चाशनी में नहाने के बाद जब यह सुनहरी-भूरी इमरतियां टोकरी में सजाकर रखी जाती हैं, तो यह नजारा किसी कलाकृति से कम नहीं लगता। यहाँ रोजाना 150 से 200 पीस मिनटों में बिक जाते हैं।

जलेबी और इमरती के बीच का असली अंतर

अक्सर लोग जलेबी और इमरती को एक ही मान लेते हैं, लेकिन दोनों को बनाने की सामग्री और तरीका पूरी तरह अलग है। जलेबी को मुख्य रूप से मैदे के खमीर से तैयार किया जाता है और उसे साधारण गोल चक्रीय आकार दिया जाता है। दूसरी ओर, इमरती पूरी तरह शुद्ध उड़द की दाल के बारीक पेस्ट से बनती है, जिसके केंद्र में एक खूबसूरत फूलनुमा जालीदार चक्र पिरोया जाता है। ₹25 प्रति पीस की दर से मिलने वाली यह इमरती अपने खास टेक्सचर और लाजवाब स्वाद के मामले में किसी भी अन्य मिठाई को पीछे छोड़ देती है।

फास्ट फूड के दौर में भी कायम है पारंपरिक स्वाद की पहचान

आज के दौर में जहां खानपान की ज्यादातर चीजें मशीनों और फास्ट फूड संस्कृति में तब्दील हो चुकी हैं, वहीं महुआ बाग चौराहे के किनारे लगी सनी पाल की यह छोटी सी दुकान पारंपरिक हाथ के हुनर की गवाही देती है। दादा के जमाने से शुरू हुआ यह सफर आज पोते तक पहुँच चुका है। गाजीपुर के कोने-कोने से लोग केवल इस इमरती के अनोखे स्वाद और इसे बनते देखने के लिए खिंचे चले आते हैं। ₹25 में मिलने वाली यह मिठाई शहर के लोगों के लिए सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि उनके बचपन और परंपरा की एक मीठी याद बन चुकी है।

सवाल-जवाब

गाजीपुर में यह प्रसिद्ध इमरती दुकान कहाँ स्थित है?
यह दुकान उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित महुआ बाग चौराहे पर सड़क किनारे स्थित है।
इमरती और जलेबी बनाने की सामग्री में क्या अंतर है?
जलेबी मैदे के खमीर से बनती है, जबकि इमरती पूरी तरह शुद्ध उड़द दाल के बारीक बैटर से तैयार की जाती है।
सनी पाल की दुकान पर इमरती की कीमत कितनी है?
यहाँ ताज़ा और शुद्ध इमरती ₹25 प्रति पीस की दर से मिलती है।
दुकान पर रोजाना कितनी इमरती बिक जाती हैं?
दुकान पर रोजाना लगभग 150 से 200 पीस इमरती मिनटों में बिक जाते हैं।
दुकान के खुलने और बैटर तैयार करने का समय क्या है?
दुकान सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुलती है और रोजाना दो बार ताज़ा बैटर तैयार किया जाता है।
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