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मैदे के बिना भी बाजार जैसे कुरकुरे भटूरे बनाने का यह तरीका सेहत और स्वाद दोनों बचाएगाखानपान
5 जुल॰ 2026, 11:26 am (116 दिन पहले)· 2

मैदे के बिना भी बाजार जैसे कुरकुरे भटूरे बनाने का यह तरीका सेहत और स्वाद दोनों बचाएगा

मैदे की जगह गेहूं का आटा, कम तेल और सही साइड डिश जोड़कर छोले-भटूरे को हल्का और पौष्टिक बनाया जा सकता है, बिना स्वाद खोए.

छोले-भटूरे की खुशबू आते ही जुबान पर पानी आना लाजमी है, लेकिन ज्यादातर लोग यह सोचकर इसे प्लेट में लेने से बचते हैं कि मैदे और तेल से भरी यह डिश सेहत के लिए ठीक नहीं है. असल में जरा सी समझदारी से रेसिपी में बदलाव करके इसी पसंदीदा डिश को हल्का, पौष्टिक और उतना ही स्वादिष्ट बनाया जा सकता है, जितना बाजार में मिलने वाला क्रिस्पी भटूरा होता है. न तो स्वाद से समझौता करना पड़ता है, न ही बार-बार गिल्ट महसूस करने की नौबत आती है.

भटूरे के आटे में करें यह बदलाव

ज्यादातर घरों और दुकानों में भटूरे पूरी तरह मैदे से बनते हैं. मैदे में फाइबर लगभग नहीं के बराबर होता है, जबकि कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. इसकी जगह अगर गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाए या गेहूं के आटे में थोड़ी सूजी मिलाकर आटा गूंधा जाए, तो भटूरे का स्वाद और उसकी कुरकुरी बनावट लगभग वैसी ही बनी रहती है, बस फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है. फाइबर बढ़ने से भटूरा पचने में भी आसान हो जाता है और पेट देर तक भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या भी कम होती है. यानी सिर्फ आटे का चुनाव बदलकर ही डिश की पूरी सेहत प्रोफाइल बदली जा सकती है.

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तलने का तरीका बदलें, तेल की मात्रा घटाएं

अगर भटूरे को पूरी तरह छोड़ना मुश्किल लगता है, तो उन्हें बनाने के तरीके में बदलाव करना समझदारी है. एयर फ्रायर में या कम तेल वाले विकल्पों में भटूरे बनाने पर तेल की खपत काफी घट जाती है, जिससे डिश पहले से कहीं ज्यादा हल्की हो जाती है. यही नियम छोले बनाते वक्त भी लागू होता है. जरूरत से ज्यादा तेल डालने के बजाय, प्याज, टमाटर और मसालों को कम तेल में अच्छी तरह भूनकर पकाया जाए तो स्वाद पर कोई फर्क नहीं पड़ता. इस छोटे से बदलाव से भोजन में अतिरिक्त फैट और कैलोरी दोनों कम हो जाती हैं, और छोले-भटूरे पहले की तुलना में कहीं ज्यादा संतुलित विकल्प बन जाते हैं.

छोले को हल्का लेकिन पौष्टिक बनाए रखें

छोले खुद प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं. दिक्कत तब होती है जब इन्हें जरूरत से ज्यादा मक्खन, क्रीम या तेल डालकर भारी बना दिया जाता है. सामान्य मसालों के साथ पकाए गए छोले न सिर्फ अपना पोषण बरकरार रखते हैं, बल्कि इनमें अतिरिक्त कैलोरी भी नहीं जुड़ती. यानी छोले की ग्रेवी को गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के लिए मलाई या घी की मोटी परत डालने की जरूरत नहीं, मसालों का सही संतुलन ही काफी होता है.

सलाद और दही को थाली से गायब न होने दें

भोजन को और संतुलित बनाने के लिए छोले-भटूरे के साथ प्याज, खीरा, गाजर और नींबू से बना सलाद जरूर परोसा जाना चाहिए. इसके अलावा एक कटोरी दही भी थाली में शामिल करनी चाहिए. दही पाचन में मदद करती है, स्वाद बढ़ाती है और लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराती है, जिससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा कम होती है.

मात्रा पर ध्यान दें, स्वाद से समझौता नहीं

छोले-भटूरे को हेल्दी बनाने का सबसे सीधा तरीका यही है कि इन्हें सीमित मात्रा में खाया जाए. एक बार में एक या दो भटूरे के साथ भरपूर छोले, सलाद और दही लेना बेहतर रहता है, इससे स्वाद भी बना रहता है और शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी भी नहीं जाती. संक्षेप में कहें तो भटूरे बनाने के लिए मैदे की जगह गेहूं का आटा या गेहूं के आटे में थोड़ी सूजी मिलाकर इस्तेमाल करें, डीप फ्राई के बजाय कम तेल या एयर फ्रायर चुनें, छोले बनाते समय जरूरत से ज्यादा तेल, घी या मक्खन डालने से बचें, और भोजन के साथ प्याज, खीरा, गाजर, नींबू का सलाद तथा एक कटोरी दही जरूर शामिल करें. इन छोटे-छोटे बदलावों से छोले-भटूरे स्वाद में बाजार जैसे ही रहेंगे, लेकिन सेहत के लिहाज से कहीं ज्यादा संतुलित और पौष्टिक बन जाएंगे.

सवाल-जवाब

भटूरे के लिए मैदे की जगह क्या इस्तेमाल करें?
गेहूं का आटा या गेहूं के आटे में थोड़ी सूजी मिलाकर आटा गूंधा जा सकता है.
भटूरे में तेल कैसे कम किया जा सकता है?
एयर फ्रायर या किसी भी कम तेल वाले विकल्प से भटूरे बनाए जा सकते हैं.
छोले बनाते समय किस बात का ध्यान रखें?
जरूरत से ज्यादा तेल, घी या मक्खन डालने से बचें और सामान्य मसालों में ही पकाएं.
छोले-भटूरे के साथ क्या परोसना चाहिए?
प्याज, खीरा, गाजर और नींबू का सलाद तथा एक कटोरी दही जरूर परोसें.
एक बार में कितने भटूरे खाना ठीक रहता है?
एक या दो भटूरे के साथ भरपूर छोले, सलाद और दही लेना बेहतर माना गया है.
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