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मिथिला का पारंपरिक व्यंजन घोरजौर, सिर्फ 15 मिनट में ऐसे तैयार करेंखानपान
30 अग॰ 2026, 4:15 pm (14 दिन पहले)· 2

मिथिला का पारंपरिक व्यंजन घोरजौर, सिर्फ 15 मिनट में ऐसे तैयार करें

मिथिलांचल का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन घोरजौर देखने में भले ही खीर जैसा लगे, लेकिन इसका स्वाद नमकीन और खट्टा-मीठा होता है। इसे खास तौर पर सावन के महीने या पंचमी पर बनाया जाता है।

यदि आप पारंपरिक व्यंजनों और देसी स्वाद के शौकीन हैं, तो मिथिलांचल की संस्कृति आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आज हम आपको मिथिला की एक ऐसी ही पारंपरिक डिश के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बनाने के दौरान हाथों से घोरने की प्रक्रिया से इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। इस व्यंजन का नाम घोरजौर है, जो अपनी खास बनावट और अनोखे जायके के लिए जाना जाता है।

कैसा होता है घोरजौर का स्वाद और रूप

घोरजौर की रेसिपी देखने में बिल्कुल खीर जैसी नजर आती है, लेकिन इसका स्वाद पूरी तरह से अलग यानी नमकीन और खट्टा-मीठा होता है। इस पारंपरिक व्यंजन को आमतौर पर सब्जी के साथ परोसा और खाया जाता है। हालांकि लोग इसे कभी-कभार अपने घरों में भी बनाते हैं, लेकिन विशेष अवसरों पर इसका महत्व बढ़ जाता है। इसे खासतौर पर पंचमी के अवसर पर या फिर सावन के पवित्र महीने में बहुतायत से बनाया जाता है।

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घोरजौर बनाने की सरल विधि

इस अनूठी डिश को तैयार करने के लिए सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर उबलते हुए पानी में पकाया जाता है। जब चावल लगभग आधा पक जाए, तब इसमें अच्छी मात्रा में दही को फेंटकर मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें स्वादानुसार नमक और थोड़ी सी चीनी डालकर इसे अच्छी तरह पकाया जाता है। जैसे ही यह मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है, इसके स्वाद को दोगुना करने के लिए इसमें विशेष तड़का लगाने की आवश्यकता होती है।

तड़के से बढ़ता है जायका

इस व्यंजन के तड़के में मुख्य रूप से तेल, जीरा, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसकी महक और स्वाद दोनों निखर जाते हैं। तैयार किए गए घोरजौर को गरमागरम सब्जी के साथ परोसा जाता है। जिस प्रकार पारंपरिक खीर में दूध, चीनी और सूखे मेवों की प्रधानता होती है, ठीक उसी तरह घोरजौर की असल पहचान इसके दही, नमक और खास तड़के से बनती है।

खट्टी दही और छाछ का कमाल

मिथिलांचल में घोरजौर बनाने के लिए कभी भी ताजी दही का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि इसके लिए हमेशा खट्टी दही को प्राथमिकता दी जाती है। दो दिन पहले जमी हुई दही इस व्यंजन को सबसे बेहतरीन स्वाद देती है। इसके अलावा कई लोग इसे मट्ठे यानी छाछ का उपयोग करके भी बनाते हैं। ऐसे में अगर आप किसी दिन कुछ अलग और पारंपरिक देसी व्यंजन का आनंद लेना चाहते हैं, तो केवल 15 से 20 मिनट के भीतर तैयार होने वाली इस रेसिपी को अपने घर पर जरूर आजमाएं।

सवाल-जवाब

घोरजौर किस क्षेत्र का पारंपरिक व्यंजन है?
घोरजौर मुख्य रूप से मिथिलांचल क्षेत्र का एक प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन है।
घोरजौर का स्वाद कैसा होता है?
घोरजौर दिखने में खीर जैसा लगता है, लेकिन इसका स्वाद नमकीन और खट्टा-मीठा होता है।
इसे बनाने में कितना समय लगता है?
इस पारंपरिक व्यंजन को तैयार होने में लगभग 15 से 20 मिनट का समय लगता है।
घोरजौर बनाने के लिए किस तरह की दही का उपयोग किया जाता है?
इसे बनाने के लिए ताजी दही की बजाय खट्टी दही या दो दिन पहले जमी हुई दही का उपयोग किया जाता है।
घोरजौर में तड़के के लिए किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
इसके तड़के में तेल, जीरा, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है।
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