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मिथिलांचल की पारंपरिक बरी-भात रेसिपी, जानिए मेहमाननवाजी और त्योहारों की इस खास डिश को बनाने का तरीकाखानपान
23 अक्तू॰ 2026, 11:35 pm (6 दिन पहले)· 4

मिथिलांचल की पारंपरिक बरी-भात रेसिपी, जानिए मेहमाननवाजी और त्योहारों की इस खास डिश को बनाने का तरीका

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में बरी-भात का विशेष महत्व है, जिसे खास अवसरों, मेहमानों के स्वागत और देवी के भोग के लिए तैयार किया जाता है। इसकी पारंपरिक रेसिपी और बनाने का अनोखा तरीका बेहद खास है।

बिहार के मधुबनी और पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में मेहमाननवाजी से लेकर हर खास उत्सव की थाली बरी-भात के बिना अधूरी मानी जाती है। चाहे घर में कोई तीर्थ यात्रा से लौटा हो, विशेष अतिथि आए हों या फिर देवी भगवती को भोग चढ़ाना हो, इस पारंपरिक व्यंजन को हर बड़े मौके पर जरूर बनाया जाता है। इसके अलावा बेटियों के आने और जाने के समय भी विशेष रूप से इसी पकवान को परोसने की पुरानी परंपरा चली आ रही है।

मिथिलांचल की संस्कृति में बरी-भात का खास स्थान

हर क्षेत्र की अपनी कोई न कोई खास पहचान और पारंपरिक रेसिपी होती है, जो उस संस्कृति की थाती को संभाल कर रखती है। मिथिलांचल का पारंपरिक भोजन मुख्य रूप से बरी और भात ही माना जाता है। यहां पर बनने वाली बरी कढ़ी वाली नहीं होती है, बल्कि बेसन की खास बरी होती है जिसे आमिल के बिना अधूरा समझा जाता है। इस भोजन का स्वाद और इसकी महक पूरे इलाके के खानपान को एक अलग ही पहचान देते हैं।

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बेसन का घोल जांचने की पारंपरिक तकनीक

इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया में बेसन का घोल तैयार करने का तरीका बेहद दिलचस्प और अनूठा है। चना बेसन को घोलते समय ही यह अंदाजा लगा लिया जाता है कि बरी स्वादिष्ट और फूली हुई बनेगी या नहीं। खाद्य विशेषज्ञ मुन्नी बताती हैं कि बेसन के तैयार घोल को सादा पानी में डालकर इसकी जांच की जाती है। यदि बेसन का गोला तैरकर पानी की सतह पर ऊपर आ जाता है, तो इसका मतलब है कि बरी का आकार बेहतरीन फूलेगा और स्वाद लाजवाब होगा। अगर वह पानी में नीचे ही बैठा रहता है, तो घोल अभी ठीक से तैयार नहीं हुआ है और उसे और मिलाने की जरूरत होती है।

घर पर ऐसे तैयार करें पारंपरिक बरी-भात

इस पारंपरिक रेसिपी को तैयार करने के लिए सबसे पहले बेसन में नमक, जीरा और हींग मिलाकर हाथों की सहायता से अच्छी तरह घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद कड़ाही में तेल गरम करके इन बरी को अच्छी तरह तल लिया जाता है। फिर दूसरे बर्तन में सादा पानी लेकर उसमें बेसन, नमक, हल्दी, धनिया और गरम मसाला मिलाकर पकाया जाता है। मिश्रण के गर्म होते ही इसमें तली हुई बरी डालकर धीमी आंच पर बीस से पच्चीस मिनट तक पकाया जाता है। इसके बाद खट्टा स्वाद लाने के लिए इसमें सूखे आम का आमिल यानी आमचूर मिलाया जाता है। अंत में जीरा, तेल, लाल मिर्च और तेजपत्ता का छौंक लगाकर इसे तैयार किया जाता है। लगभग एक घंटे में यह लजीज पारंपरिक व्यंजन बनकर तैयार हो जाता है, जिसे गर्मागर्म चावल और पकौड़ों के साथ परोसा जाता है।

सवाल-जवाब

मिथिलांचल में बरी-भात का क्या महत्व है?
यह मिथिला क्षेत्र का पारंपरिक भोजन है जो यात्रा से लौटने वाले मेहमानों के स्वागत, देवी के भोग और खास अवसरों पर जरूर बनाया जाता है।
बेसन के घोल की शुद्धता या गुणवत्ता कैसे जांची जाती है?
कच्चे बेसन के घोल को सादा पानी में डालकर चेक किया जाता है; यदि घोल ऊपर तैरने लगे तो बरी अच्छी फूलेगी।
इस रेसिपी में खट्टे स्वाद के लिए क्या मिलाया जाता है?
इसमें खट्टे स्वाद के लिए आम का सूखा आमिल यानी आमचूर का उपयोग किया जाता है।
बरी को ग्रेवी में कितनी देर तक पकाया जाता है?
फ्राई की हुई बरी को मसाले वाले पानी में डालने के बाद धीमी आंच पर बीस से पच्चीस मिनट तक पकाया जाता है।
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टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·5 दिन पहले

मधुबनी में एक दोस्त के घर गया था, तब पहली बार बरी-भात खाया था। वो पानी में बेसन का गोला तैरने वाला तरीका आज भी याद है, एकदम जादू जैसा लगा था।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·5 दिन पहले

बेसन तैरने से बरी अच्छी बनेगी, यह बात गणितीय रूप से कुछ पक्की नहीं लगती। बिना नाप-जोख के कैसे तय होता है?

Vikram Yadav@vikram-yadav·5 दिन पहले

आदित्य जी, पानी में तैरने वाला तरीका दादी मां के समय से आजमाया हुआ है, मधुबनी में हर घर में ऐसे ही बनती है बरी।

Nyra Kaif@nyra-kaif·5 दिन पहले

पानी में बेसन तैरने वाला तरीका थोड़ा अजीब लगता है। मैं तो अंदाज़ से ही बनाती हूँ, पर सच बताऊँ तो बिना दही वाली कढ़ी जैसी इस बरी का स्वाद बिना आमिल के भी अच्छा लग सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

न्यरा, पानी में तैरने वाला तरीका तो कमाल का लगा! क्या सच में इससे बरी इतनी सॉफ्ट बनती है?

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