गणेशोत्सव के शुभ अवसर पर पूरे देश में भगवान गणेश की आराधना की धूम मची हुई है, जहां श्रद्धालु अपने प्रिय विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान और पारंपरिक पकवान तैयार कर रहे हैं। विघ्नविनाशक की पूजा में मोदक का स्थान सर्वोपरि माना जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं में यह उनका सबसे पसंदीदा भोग है। इस उत्सव के दौरान देश के अलग-अलग कोनों से बप्पा को अर्पित किए जाने वाले विशेष प्रसादों की अनोखी झलकियां सामने आ रही हैं। महाराष्ट्र के नासिक शहर में स्थित एक प्रतिष्ठित मिष्ठान प्रतिष्ठान ने इस बार मोदक को अत्यंत भव्य और राजसी रूप में पेश किया है, जिसने शहरवासियों के साथ-साथ इंटरनेट जगत में भी भारी उत्सुकता पैदा कर दी है।
नासिक में 27,000 रुपये प्रति किलो बिक रहा स्वर्ण वर्क वाला मोदक
नासिक के विद्या विकास सर्कल क्षेत्र में मौजूद प्रसिद्ध सागर स्वीट्स नामक दुकान ने उत्सव के माहौल को ध्यान में रखते हुए 24 कैरेट शुद्ध सोने की परत से सुसज्जित एक खास मोदक तैयार किया है। इस विशेष मिठाई पर सोने का असली वर्क चढ़ाया गया है, जिसके चलते इसका मूल्य 27,000 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। आम दिनों में मिलने वाली पारंपरिक मिठाइयों की तुलना में यह दर काफी अधिक प्रतीत होती है, किंतु इसकी अनूठी चमक, निर्माण शैली और भव्यता ने इसे स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चित विषय बना दिया है। दुकान में इस अनूठे प्रसाद को देखने, तस्वीरें खींचने और खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों की लगातार हलचल बनी हुई है। सोशल मीडिया पर इस सुनहरे मोदक की तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
दुकान में पेश की गईं मोदक की 25 से अधिक वैरायटी
सागर स्वीट्स ने इस त्योहारी मौसम में ग्राहकों के स्वाद और पसंद को ध्यान में रखते हुए मोदक की 25 से अधिक विभिन्न किस्में उपलब्ध कराई हैं। इन विकल्पों में काजू मोदक, ड्राई फ्रूट मोदक, ऑरेंज मोदक और मलाई मोदक जैसी पारंपरिक और आधुनिक स्वादों वाली मिठाइयां शामिल हैं। विभिन्न सामग्रियों और स्वादों की मौजूदगी के बावजूद, सोने के वर्क से सजे इस शाही मोदक ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया है और वह इस वर्ष की सबसे खास पेशकश बनकर उभरा है। श्रद्धालु इस अनूठे भोग को अपनी आंखों से देखने और उत्सव का हिस्सा बनाने के लिए दुकान तक पहुंच रहे हैं।
कोलकाता में आकर्षण का केंद्र बना 1,100 किलोग्राम का महा-मोदक
मोदक के इस विशेष उत्साह की गूंज केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में भी इसका भव्य रूप देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की ऐतिहासिक और जानी-मानी मिठाई दुकान बलराम मल्लिक और राधारमण मल्लिक ने गणेशोत्सव के उपलक्ष्य में एक विशालकाय महा-मोदक तैयार किया है। इस अद्भुत मोदक का कुल वजन 1,100 किलोग्राम अर्थात लगभग 1.1 टन है। इस विशालकाय भोग को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे हैं, जिससे इस उत्सव का उल्लास और कई गुना बढ़ गया है। पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक प्रयोग का यह मेल त्योहार के आकर्षण को नई ऊंचाई दे रहा है।
गणेश चतुर्थी की धार्मिक महत्ता और पूजन परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार गणेश चतुर्थी का यह महापर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें समस्त विघ्नों को हरने वाला और प्रथम पूज्य देव माना गया है। ऐतिहासिक रूप से महाराष्ट्र इस उत्सव का मुख्य केंद्र रहा है, परंतु वर्तमान समय में कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इस पर्व को अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव से मनाया जाता है। उत्सव का शुभारंभ घरों और सार्वजनिक पंडालों में मिट्टी से निर्मित सुंदर मूर्तियों की स्थापना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान से होता है। इसके उपरांत प्रतिदिन सुबह और शाम विधि-विधान से आरती, भजन और प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं। अंत में यह उत्सव विसर्जन के साथ संपन्न होता है, जहां पारंपरिक ढोल-ताशों और गाजे-बाजे के साथ भगवान गणेश की मूर्तियों को विभिन्न जल स्रोतों में विसर्जित कर अगले वर्ष जल्दी आने की कामना की जाती है। इस प्रकार नासिक का यह 27 हजार रुपये किलो वाला मोदक और कोलकाता का विशाल भोग इस वर्ष के उत्सव को श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से यादगार बना रहे हैं।



















