पारंपरिक राजस्थानी खानपान में जोधपुर के मिर्चीबड़े की एक अलग ही पहचान है, और जब बात मथानिया की तीखी मिर्च से बने नाश्ते की हो तो लोगों के मुंह में पानी आना स्वाभाविक है। अब तक इस लाजवाब स्वाद का आनंद लेने के लिए लोगों को अक्सर पड़ोसी जिले जोधपुर का रुख करना पड़ता था। हालांकि, अब इस खास नाश्ते का स्वाद चखने के लिए शहर से बाहर जाने की मजबूरी खत्म हो चुकी है। पाली शहर के स्थानीय बाशिंदों के लिए यह पारंपरिक जायका अब उनके अपने शहर में ही बेहद प्रामाणिक रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे भोजन प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मेड़तिया स्वीट्स पर उपलब्ध हुआ प्रामाणिक जायका
पाली स्थित मशहूर मिष्ठान भंडार मेड़तिया स्वीट्स ने स्थानीय जायके के शौकीनों को यह बेहतरीन विकल्प मुहैया कराया है। इस प्रतिष्ठान पर अब बिल्कुल उसी पारंपरिक और पुराने अंदाज में मिर्चीबड़ा तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए मारवाड़ की गलियां पहचानी जाती हैं। बाहर से बेहद खस्ता और कुरकुरी बेसन की सुनहरी परत, अंदर तीखे और चटपटे मसालों से सना उबले आलू का भरावन, और बीच में तीखी मथानिया मिर्च का अनूठा मेल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। सुबह की गर्मागर्म चाय की चुस्कियों के साथ या फिर ढलती शाम के हल्के-फुल्के नाश्ते के तौर पर यहां का मिर्चीबड़ा लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
मथानिया मिर्च की खासियत और बनाने की पारंपरिक शैली
जोधपुर का मथानिया इलाका अपनी खास किस्म की मिर्च की खेती के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इस मिर्च की तीखी तासीर, गहरा लाल रंग और मनमोहक सुगंध ही पारंपरिक मिर्चीबड़े की असली आत्मा मानी जाती है। आम मिर्चों के मुकाबले इसका तीखापन स्वाद ग्रंथियों को झकझोरने वाला होता है, लेकिन यह गले में चुभन पैदा करने की बजाय जायके को गहरा बना देता है। प्रतिष्ठान के प्रबंधकों का कहना है कि वे गुणवत्ता और प्रामाणिकता के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं करते हैं। इसी वजह से मिर्चीबड़े के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिर्च को सीधे मथानिया से मंगवाया जाता है।
इसके अलावा, भरावन के लिए तैयार होने वाले उबले आलू के मसाले का फॉर्मूला भी जोधपुर के पुराने कारीगरों की पाक शैली पर आधारित है। खड़े मसालों, हींग और अन्य देसी सामग्रियों का संतुलित अनुपात इस भरावन को खास बनाता है। ऊपर से चढ़ाई जाने वाली बेसन की परत का घोल भी बिल्कुल सही गाढ़ेपन में तैयार किया जाता है, ताकि तलने के बाद वह तेल न सोखे और एकदम करारी बनी रहे। जब कोई ग्राहक इसका पहला निवाला लेता है, तो उसे वही चिर-परिचित मारवाड़ी स्वाद मिलता है जो जोधपुर की पहचान रहा है।
दुकान पर जुटने लगी खाने के शौकीनों की भीड़
जैसे ही स्थानीय नागरिकों को यह मालूम हुआ कि असली मथानिया मिर्च से बने मिर्चीबड़े शहर में ही परोसे जा रहे हैं, मेड़तिया स्वीट्स पर खरीदारों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय कड़ाही से उतरते गरमा-गरम बड़े खरीदने के लिए लोगों का तांता लगा रहता है। प्लेट में परोसे जाते समय इसके साथ दी जाने वाली इमली की खट्टी-मीठी चटनी और बारीक कटे कच्चे प्याज इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं। अब जायके के कद्रदानों को जोधपुर की यात्रा की योजना बनाने की जरूरत नहीं रही, बल्कि वे परिवार और दोस्तों के साथ पाली में ही इस प्रामाणिक मारवाड़ी नाश्ते का भरपूर आनंद ले रहे हैं।



















