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फिरोजाबाद में मात्र 15 रुपये की कचौड़ी ने बनाई सुबह के नाश्ते की खास पहचानखानपान
3 जुल॰ 2026, 10:07 pm (45 दिन पहले)· 3

फिरोजाबाद में मात्र 15 रुपये की कचौड़ी ने बनाई सुबह के नाश्ते की खास पहचान

फिरोजाबाद में सुबह की शुरुआत शुद्ध सरसों के तेल में तली आलू और दाल की कचौड़ियों से होती है, जो सब्जी और रायते के साथ महज 15 रुपये प्रति पीस में मिलती हैं.

फिरोजाबाद की सुबह की पहचान यहां की गलियों और सड़कों पर महकती गरमागरम कचौड़ियों से बनती है. शहर में खाने-पीने के लिए कई तरह के व्यंजन मौजूद हैं, लेकिन नाश्ते के मामले में यहां के लोगों का दिल दशकों से कचौड़ियों पर ही अटका हुआ है. सुबह होते ही नाश्ते की दुकानों के बाहर भीड़ जुटना शुरू हो जाती है और यह सिलसिला देर तक चलता रहता है. यहां की कचौड़ियां अपने खास स्वाद के लिए दूर-दूर तक जानी जाती हैं, इसी वजह से लोग इन्हें बड़े चाव से खाते हैं.

अगर सुबह के स्वादिष्ट नाश्ते के शौकीन हैं, तो फिरोजाबाद की आलू की कचौड़ी एक बार जरूर चखनी चाहिए. इसे बनाने का तरीका बेहद पारंपरिक है. सबसे पहले आलू उबालकर उसमें तरह-तरह के मिर्च मसाले मिलाए जाते हैं. इसके बाद मैदा का आटा गूंथकर उसमें यही आलू की स्टफिंग भरी जाती है. आखिर में इन्हें शुद्ध सरसों के तेल में तब तक तला जाता है, जब तक ये सुनहरे रंग की न हो जाएं. यही प्रक्रिया इन कचौड़ियों को इतना स्वादिष्ट बनाती है.

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शुद्ध सरसों के तेल में तैयार होता है असली स्वाद

फिरोजाबाद की कचौड़ियों की खासियत यह है कि इन्हें रिफाइंड तेल के बजाय शुद्ध सरसों के तेल में तैयार किया जाता है. दुकानदार सबसे पहले कढ़ाई में सरसों का तेल हल्की आंच पर गर्म करते हैं. तेल के अच्छी तरह गर्म होने के बाद ही उसमें कचौड़ियां डाली जाती हैं और उन्हें तब तक तला जाता है, जब तक वे सुनहरी न हो जाएं. इसी पारंपरिक तरीके से यहां रोज ताजा और स्वादिष्ट कचौड़ियां तैयार होती हैं.

दाल की कचौड़ी की भी उतनी ही मांग

सुबह के नाश्ते में सिर्फ आलू की कचौड़ी ही नहीं, बल्कि दाल की कचौड़ी भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. यही वजह है कि नाश्ते की हर दुकान पर दाल की कचौड़ियां भी ताजा तैयार की जाती हैं. इसके लिए पहले मूंग की दाल को भिगोकर पीसा जाता है, फिर उसमें मिर्च मसाले मिलाए जाते हैं. इसके बाद मैदा की लोई में दाल की यह स्टफिंग भरकर शुद्ध सरसों के तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है.

दुकानों से लेकर ठेलों तक उमड़ती है भीड़

फिरोजाबाद में सुबह के नाश्ते के लिए भीड़ सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सड़क किनारे लगे ठेलों पर भी लोगों का जमावड़ा देखने को मिलता है. दुकानदार और ठेले वाले दोनों ही आलू और दाल की ताजा कचौड़ियां बनाकर बेचते हैं. सुबह होते ही इन ठेलों पर नाश्ता करने वालों की कतार लग जाती है. यही वजह है कि फिरोजाबाद में सुबह के समय सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले नाश्तों में कचौड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है.

सब्जी और रायते से दोगुना हो जाता है स्वाद

यहां कचौड़ियों के साथ मसालेदार सब्जी और बूंदी का रायता भी परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. दुकानदार आलू और टमाटर से खास तरह की मसालेदार सब्जी तैयार करते हैं, जो कचौड़ियों के साथ बेहद अच्छी लगती है. इसके साथ ठंडे और स्वादिष्ट बूंदी के रायते का जोड़ इस नाश्ते को पूरी तरह लजीज बना देता है. कचौड़ी, सब्जी और रायते का यह संयोजन लोगों को खूब भाता है.

जेब पर भारी नहीं पड़ता यह स्वादिष्ट नाश्ता

फिरोजाबाद की इन कचौड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये स्वाद के साथ-साथ कीमत में भी बेहद किफायती हैं. यहां आलू और दाल दोनों तरह की कचौड़ी सिर्फ 15 रुपये प्रति पीस में मिल जाती है. इतना ही नहीं, इसके साथ परोसी जाने वाली सब्जी और रायते के लिए भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता. यही वजह है कि सुबह-सुबह दूर-दूर से लोग यहां सिर्फ इन कचौड़ियों का स्वाद चखने के लिए पहुंचते हैं.

घर पर भी आसानी से बनाई जा सकती हैं ये कचौड़ियां

फिरोजाबाद की इन मशहूर कचौड़ियों को घर पर भी बड़ी आसानी से तैयार किया जा सकता है. इन्हें बनाने के लिए मैदा, आलू और मूंग की दाल की जरूरत होती है. अगर इन्हें शुद्ध सरसों के तेल में तला जाए, तो घर पर भी वही पारंपरिक बाजार जैसा स्वाद पाया जा सकता है. इस तरह घर पर तैयार इन कचौड़ियों के साथ भी सुबह के नाश्ते का भरपूर मजा लिया जा सकता है.

सवाल-जवाब

फिरोजाबाद में कचौड़ी की कीमत कितनी है?
यहां आलू और दाल दोनों तरह की कचौड़ी सिर्फ 15 रुपये प्रति पीस में मिलती है.
क्या कचौड़ी के साथ सब्जी और रायते के लिए अलग से पैसे देने होते हैं?
नहीं, सब्जी और रायता बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के परोसा जाता है.
आलू की कचौड़ी किस तेल में तली जाती है?
इसे शुद्ध सरसों के तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है.
दाल की कचौड़ी बनाने के लिए किस दाल का इस्तेमाल होता है?
दाल की कचौड़ी बनाने के लिए मूंग की दाल को भिगोकर पीसा जाता है और उसमें मिर्च मसाले मिलाए जाते हैं.
क्या ये कचौड़ियां सिर्फ दुकानों पर मिलती हैं?
नहीं, दुकानों के अलावा सड़क किनारे लगे ठेलों पर भी ताजा आलू और दाल की कचौड़ियां बनाकर बेची जाती हैं.
क्या इन कचौड़ियों को घर पर बनाया जा सकता है?
हां, मैदा, आलू और दाल की मदद से और शुद्ध सरसों के तेल में तलकर घर पर भी वही पारंपरिक स्वाद पाया जा सकता है.
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