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पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालखानपान
25 सित॰ 2026, 6:52 am (35 दिन पहले)· 2

पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दाल

मुरादाबाद में पीली मूंग दाल को धीमी आंच पर पकाकर देसी घी, घर के मसालों, नींबू और हरी चटनी के साथ चाट की तरह परोसा जाता है। शहर के हर कोने में मिलने वाला यह पारंपरिक व्यंजन अपने अनोखे स्वाद के लिए मशहूर है।

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर पूरी दुनिया में अपने हस्तशिल्प और पीतल के बर्तनों के काम के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके साथ ही यहां का स्थानीय खानपान भी अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस शहर की सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक डिश में मुरादाबादी मूंग दाल शामिल है, जिसका स्वाद घरों में बनने वाली सामान्य दाल से बिल्कुल जुदा होता है। इसे सिर्फ भोजन के हिस्से के रूप में ही नहीं खाया जाता, बल्कि लोग शाम के समय इसे चाट की तरह कटोरी में लेकर बड़े चाव से खाते हैं। कटोरी में परोसी जाने वाली इस गर्म दाल में भुना जीरा, बारीक कटी अदरक, तीखी हरी मिर्च, चटपटी हरी चटनी, नींबू का रस और पिघलता हुआ मक्खन डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद बेजोड़ बन जाता है।

धीमी आंच पर पकने की पारंपरिक प्रक्रिया

इस खास दाल को तैयार करने में समय और धैर्य दोनों की जरूरत होती है। स्थानीय दुकानदार आनंद के अनुसार, उनकी दुकान पर दाल की तैयारी पूरी तरह साफ-सफाई और शुद्धता के साथ की जाती है। सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाली धुली हुई पीली मूंग की दाल को पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद दाल को बड़े बर्तनों में हल्की और धीमी आंच पर देर तक पकाया जाता है। धीमी आंच पर पकाने का मकसद यह होता है कि दाल का एक-एक दाना पूरी तरह गल जाए, दाल एकदम मुलायम गाढ़ी हो जाए और उसका प्राकृतिक स्वाद व पौष्टिकता सुरक्षित रहे। दाल के पूरी तरह पक जाने के बाद इसमें घर के बने खास मसालों और छौंक का इस्तेमाल किया जाता है।

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देसी घी का तड़का और चटपटी टॉपिंग्स का कमाल

दाल की खुशबू और स्वाद को निखारने के लिए तड़के का खास ध्यान रखा जाता है। आनंद ने बताया कि दाल में शुद्ध देसी घी, खड़ा जीरा, धनिया और घर पर तैयार किए गए चुनिंदा मसालों का तड़का लगाया जाता है। जब कोई ग्राहक दाल मांगता है, तो गर्म दाल को कुल्हड़ या दोने में निकाला जाता है। इसके बाद उसके ऊपर भुना पिसा जीरा, लाल मिर्च पाउडर, बारीक कतरे हुए अदरक के लच्छे, तीखी हरी चटनी और ताजा नींबू का रस निचोड़ा जाता है। कई जगहों पर ग्राहक की पसंद के अनुसार दाल के ऊपर मक्खन की टिक्की भी डाली जाती है। यही संतुलित मसाले और देसी घी का संयोजन एक साधारण मूंग दाल को मुरादाबादी जायके में बदल देता है।

शहर के हर बाजार और नुक्कड़ पर मौजूद हैं दुकानें

मुरादाबाद शहर की गलियों और मुख्य बाजारों में कदम रखते ही आपको जगह-जगह मूंग दाल के ठेले, स्टॉल और छोटी दुकानें सजी हुई दिखाई दे जाएंगी। स्थानीय विक्रेताओं का कहना है कि पूरे शहर में इसे बनाने और परोसने का बुनियादी तरीका लगभग एक जैसा ही रहता है। धीमी आंच की सिकाई, देसी घी की महक और ऊपर से डाली जाने वाली चटपटी सामग्री ही इसे हर वर्ग के लिए पसंदीदा नाश्ता बनाती है। जो भी लोग शहर में आते हैं, वे इस अनोखी दाल चाट का स्वाद लेना नहीं भूलते।

सवाल-जवाब

मुरादाबादी मूंग दाल सामान्य दाल से अलग क्यों होती है?
यह दाल धीमी आंच पर पकाई जाती है और इसे रोटी या चावल के बिना सीधे कटोरी में चाट की तरह नींबू, हरी चटनी और भुने मसालों के साथ परोसा जाता है।
इस दाल को तैयार करने में कौन सी दाल इस्तेमाल की जाती है?
इस पारंपरिक डिश को बनाने के लिए धुली हुई पीली मूंग दाल का इस्तेमाल किया जाता है।
मुरादाबादी मूंग दाल में कौन से खास मसाले और सामग्रियां डाली जाती हैं?
इसमें देसी घी, खड़ा जीरा, धनिया, भुना जीरा, लाल मिर्च, अदरक के लच्छे, तीखी हरी चटनी, नींबू और मक्खन डाला जाता है।
क्या मुरादाबाद में इस दाल को बनाने का तरीका हर जगह अलग है?
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार शहर के ज्यादातर ठेलों और दुकानों पर इसे पकाने और परोसने का बुनियादी तरीका लगभग एक जैसा ही रहता है।
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टिप्पणियाँ 4

Kavya Nair@kavya-nair·34 दिन पहले

मुरादाबाद की इस दाल को चाट की तरह खाने का तरीका वाकई दिलचस्प है, लेकिन मक्खन और ढेर सारे मसालों के बाद भी क्या यह रोज शाम को खाने के लिए बहुत भारी नहीं हो जाती?

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·34 दिन पहले

काव्या जी, एशिया की स्ट्रीट फूड संस्कृति में ऐसे रिच स्नैक्स रोज शाम को खूब खाए जाते हैं, भारी तो होते हैं पर स्वाद के आगे वजन कौन देखता है!

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·34 दिन पहले

धीमी आंच पर दाल पकाने का पारंपरिक तरीका पढ़कर अच्छा लगा। आजकल हर कोई बस जल्दी में रहता है, पर असली स्वाद तो धैर्य से ही बनता है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·34 दिन पहले

अदित्य जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। क्या आपको लगता है कि घर पर भी वैसी धीमी आंच वाला स्वाद लाया जा सकता है?

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