राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित रूपवास कस्बा अपनी अनूठी और पारंपरिक नानखटाई की मिठास के लिए दूर-दूर तक पहचाना जाता है। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा होने के कारण इस इलाके की खानपान संस्कृति में एक खास मेलजोल देखने को मिलता है, जहां की नानखटाई हर वर्ग के लोगों के बीच खूब पसंद की जाती है। यहां के हलवाई इसे पारंपरिक हुनर से बनाते हैं, जो कई तरह के अलग-अलग आकार और स्वादों में उपलब्ध कराई जाती है। कारीगर इसे मुख्य रूप से 3 से 4 अलग-अलग किस्मों में पेश करते हैं, ताकि हर उम्र के खरीदार अपनी पसंद के अनुसार इसका आनंद ले सकें।
मैदा, चीनी और शुद्ध घी से बनता है इसका खास मिश्रण
रूपवास की इस प्रसिद्ध नानखटाई को तैयार करने की शुरुआत बेहतरीन बुनियादी सामग्रियों से होती है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से मैदा, पिसी हुई चीनी और घी का सही संतुलन में उपयोग किया जाता है। सबसे पहले मैदा को बारीक छलनी से अच्छी तरह छान लिया जाता है ताकि उसमें कोई गांठ न रहे। इसके बाद इसमें आवश्यकतानुसार चीनी और घी डाला जाता है। इस पूरी सामग्री को हाथों से बहुत ही सलीके से गूंथकर एक मुलायम और चिकना आटा तैयार किया जाता है, जिससे बाद में एक समान आकार की छोटी-छोटी टिकिया ढाली जाती हैं।
आटे को सेट करने और डिजाइन तराशने का पारंपरिक हुनर
इस मिठाई की खास बनावट और स्वाद के पीछे एक अहम प्रक्रिया आटे को कुछ देर के लिए विश्राम देना है। गूंथने के बाद आटे को कुछ समय के लिए सेट होने के लिए रख दिया जाता है, जिससे सारी सामग्रियां आपस में अच्छी तरह रच-बस जाती हैं। इसके बाद कारीगर इस आटे से छोटी-छोटी लोइयां बनाते हैं और उन्हें हथेलियों के बीच रखकर हल्का सा चपटा करते हैं। इन लोइयों के ऊपरी हिस्से पर हल्की कटिंग या खूबसूरत डिजाइन उकेरी जाती है, जिससे पकने के बाद नानखटाई दिखने में भी काफी लुभावनी और आकर्षक नजर आती है।
धीमी आंच पर बेकिंग से मिलता है कुरकुरापन और सुनहरा रंग
आकार देने के बाद इन सभी लोइयों को भट्टी या ओवन में धीमी और नियंत्रित आंच पर पकने के लिए रख दिया जाता है। धीमी आंच पर धीरे-धीरे सिकने के कारण इसका रंग हल्का सुनहरा होने लगता है और आसपास शुद्ध घी की मनमोहक सुगंध बिखर जाती है। इस धीमी बेकिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि नानखटाई बाहर की परत से हल्की कुरकुरी बनती है, जबकि अंदर से पूरी तरह नरम और मुंह में घुल जाने वाली रहती है। यही दोहरा अहसास रूपवास की नानखटाई की असल पहचान माना जाता है।
ड्राई फ्रूट्स से लेकर सादे स्वाद तक की कई किस्में
रूपवास के बाजार में मिलने वाली नानखटाई में स्वादों की विविधता का पूरा ध्यान रखा जाता है। जहां एक तरफ पारंपरिक और साधारण स्वाद वाली नानखटाई की भारी मांग रहती है, वहीं दूसरी तरफ ड्राई फ्रूट्स के इस्तेमाल से तैयार खास वैरायटी भी लोगों को खूब आकर्षित करती है। कस्बे की स्थानीय दुकानों पर आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा उत्तर प्रदेश से आने वाले खरीदारों की भी लगातार आवाजाही बनी रहती है, जो यहां से सफर के दौरान इसे जरूर पैक करवाते हैं।
घर की रसोई में तैयार करने की आसान विधि
अगर कोई इस लजीज नानखटाई को अपने घर की रसोई में आजमाना चाहता है, तो इसकी विधि बेहद सीधी है। मैदा में पिसी चीनी और जरूरत के अनुसार घी मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें और एक बेहद नरम आटा बना लें। इस आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर ऊपर हल्का सा कट या डिजाइन बनाएं। इसके बाद इन्हें पहले से गर्म किए गए ओवन में रखें और धीमी आंच पर सुनहरा रंग आने तक बेक होने दें। ओवन से बाहर निकालने के बाद इन्हें पूरी तरह ठंडा होने दें, जिससे यह सही कुरकुरापन हासिल कर सकें। शाम की गर्मागर्म चाय के साथ परोसने पर इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।


















